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Monsoon Travel: लगातार बारिश की वजह से भूस्खलन, बाढ़, सड़कें बंद होने और नदियों के जलस्तर बढ़ने जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। ऐसे में अगर आप मानसून के दौरान कहीं घूमने की योजना बना रहे हैं तो पहले उस जगह की स्थिति और मौसम की जानकारी जरूर लें।

मॉनसून का मौसम आते ही पहाड़ों, झरनों और हरियाली से भरी वादियों में घूमने का मन करने लगता है। बारिश के दौरान कई पर्यटन स्थल पहले से भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई देते हैं इसलिए बड़ी संख्या में लोग इस मौसम में छुट्टियां बिताने की योजना बनाते हैं लेकिन यही मौसम कई जगहों पर खतरा भी लेकर आता है। लगातार बारिश की वजह से भूस्खलन, बाढ़, सड़कें बंद होने और नदियों के जलस्तर बढ़ने जैसी घटनाएं आम हो जाती हैं। ऐसे में अगर आप मानसून के दौरान कहीं घूमने की योजना बना रहे हैं तो पहले उस जगह की स्थिति और मौसम की जानकारी जरूर लें।
उत्तराखंड के मसूरी, नैनीताल, केदारनाथ, बद्रीनाथ और जोशीमठ जैसे पर्यटन स्थल हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं लेकिन मानसून के दौरान इन इलाकों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कई बार पहाड़ों से पत्थर और मलबा गिरने की वजह से सड़कें बंद हो जाती हैं और यात्रियों को घंटों या कई दिनों तक फंसना पड़ सकता है। इसके अलावा तेज बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है। कुछ इलाकों में बादल फटने जैसी घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। इसलिए मौसम सामान्य होने तक इन स्थानों की यात्रा सोच-समझकर ही करनी चाहिए।
हिमाचल प्रदेश का कुल्लू-मनाली अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ठंडे मौसम के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि मानसून के समय यहां भारी बारिश के कारण कई चुनौतियां सामने आती हैं। पहाड़ों से मलबा और पत्थर गिरने की वजह से हाईवे और स्थानीय सड़कें बंद हो सकती हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में बारिश और बाढ़ से कई बार भारी नुकसान देखने को मिला है। इसलिए यदि आप मानसून में कुल्लू-मनाली जाने की योजना बना रहे हैं तो यात्रा से पहले मौसम विभाग की ताजा जानकारी और सड़क मार्ग की स्थिति जरूर जांच लें।
पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग अपनी हरी-भरी वादियों, चाय के बागानों और ठंडे मौसम के लिए दुनियाभर में मशहूर है। बारिश के मौसम में यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और भी आकर्षक हो जाता है लेकिन लगातार बारिश कई बार परेशानी भी खड़ी कर देती है। मानसून के दौरान तीस्ता नदी का जलस्तर बढ़ सकता है और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में दार्जिलिंग की यात्रा पर निकलने से पहले स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह जरूर देखनी चाहिए।
मानसून के दौरान पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश होती है। असम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में कई बार बाढ़ की स्थिति बन जाती है जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है। इसी तरह मुंबई और गोवा जैसे तटीय पर्यटन स्थलों पर भी लगातार बारिश के कारण जलभराव, ट्रैफिक और समुद्र में ऊंची लहरों जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। ऐसे समय में यात्रा से पहले स्थानीय हालात की जानकारी लेना बेहद जरूरी है।
बारिश के मौसम में यात्रा करना पूरी तरह गलत नहीं है लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। यात्रा पर निकलने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना आपको परेशानी से बचा सकता है।
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