How to Reduce Stress Quickly: मिट्टी की तरह घास पर नंगे पैर चलना भी तनाव कम करने का आसान तरीका है। शोध बताते हैं कि इससे कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन लेवल पर सकारात्मक असर पड़ता है।

आज की तेज-तर्रार जिंदगी में तनाव लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। काम का दबाव, लगातार स्क्रीन पर समय बिताना, नींद की कमी और भागदौड़ हमारी मानसिक सेहत पर भारी असर डालते हैं। योग, ध्यान और ब्रीदिंग एक्सरसाइज तो पहले से लोकप्रिय हैं लेकिन विज्ञान ने कुछ ऐसे अनौखे और प्राकृतिक तरीके भी सुझाए हैं जो तनाव को कम करने में मददगार साबित हुए हैं। आइए जानते हैं उन सरल और असरदार उपायों के बारे में।
साइंस ने यह माना है कि मिट्टी या जमीन के सीधे संपर्क में आने से शरीर में इलेक्ट्रॉन्स का संतुलन बेहतर होता है। इसे अर्थिंग या ग्राउंडिंग कहते हैं। 2012 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मिट्टी पर चलने से सूजन, नींद की समस्या और तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। शरीर में फ्री रेडिकल्स का संतुलन बनाने वाले प्राकृतिक इलेक्ट्रॉन्स मानसिक शांति और रिलैक्सेशन लाते हैं।
मिट्टी की तरह घास पर नंगे पैर चलना भी तनाव कम करने का आसान तरीका है। शोध बताते हैं कि इससे कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन लेवल पर सकारात्मक असर पड़ता है। घास या मिट्टी पर चलने से शरीर और प्रकृति के बीच एक बायोलॉजिकल कनेक्शन बनता है जो मानसिक शांति और नींद की गुणवत्ता में सुधार लाता है।
जापान में शिनरिन-योकू या फॉरेस्ट बाथिंग का तरीका बहुत लोकप्रिय है। इसमें लोग जंगल या हरियाली वाले स्थानों में समय बिताते हैं। 2010 के अध्ययन में पाया गया कि जंगल में समय बिताने से तनाव हार्मोन कोर्टिसोल घटता है और मूड बेहतर होता है। पेड़ों की खुशबू, प्राकृतिक आवाजें और शांत वातावरण दिमाग को आराम देते हैं।
कुछ रिसर्च के अनुसार मिट्टी में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। न्यूरोसाइंस जर्नल की 2007 की स्टडी में बताया गया कि मिट्टी में मौजूद Mycobacterium Vaccae सेरोटोनिन यानी मूड सुधारने वाले रसायन के स्तर को बढ़ा सकते हैं। इसका मतलब यह है कि बागवानी या मिट्टी के संपर्क में रहना दिमाग को खुश रखता है।
लगातार मोबाइल और स्क्रीन पर समय बिताने से दिमाग थक जाता है और तनाव बढ़ता है। डिजिटल डिटॉक्स यानी कुछ समय के लिए स्क्रीन से दूरी बनाना, तनाव कम करने में मदद करता है। जब हम प्रकृति के बीच समय बिताते हैं तो ध्यान क्षमता बढ़ती है और दिमाग को आराम मिलता है।