Vaastu : घर एक मंदिर की तरह होता है। उसकी साज—सज्जा अगर वास्तु के हिसाब से करें तो उसका फल बेहद शुभदायी होता है। पुराने और परंपरागत रीति रिवाज़ों के साथ ही घर में खुशहाली के लिए वास्तु बेहद सटीक और कारगर साबित होने वाला उपाय है।
वास्तु यानि घर की संरचना। वास्तु के हिसाब से मुख्य द्वार सबसे महत्वपूर्ण होता है। उसको हमेशा से ही महत्त्व दिया गया है। मुख्य द्वार को देवी देवताओं के घर में प्रवेश का द्वार कहा गया है। मुख्य द्वार के सामने रंगोली, तोरण या दीपक जलाकर रखना हमेशा ही शुभ और शुभ ऊर्जाओं को आमंत्रित करता है। मुख्य द्वार से कभी आवाज नहीं आनी चाहिए। उसमें कोई छिद्र भी नहीं होना चाहिए।
Vaastu :
त्योहारों में घर की साफ सफाई का विशेष महत्त्व है। इससे घर में देवी देवताओं का आगमन और स्थायी वास होता है और शुभ ऊर्जा विद्यमान होती है। रंग रोगन करने से भी शुभ ऊर्जा विद्यमान होती है। टूटी फूटी, बदरंग दीवारें आपकी किस्मत ख़राब कर सकती हैं। हमेशा धूप बत्ती, फूल की खुशबू से घर को सुसज्जित रखना श्रेष्ठ होता है। शास्त्रों में कहा गया है, सुगंधिम पुष्टिवर्धनम। मां लक्ष्मी को आमंत्रित करने के लिए घर से कबाड़ निकाल देना चाहिए। इसका सीधा सम्बन्ध आर्थिक प्रगति से है।
वास्तु के अनुसार ईशान यानि उतर पूर्व दिशा का पूजन कक्ष सर्वोत्तम होता है। इसमें पूजा करने से अधिक लाभ प्राप्त होता है। आप भी इन छोटी छोटी बातों को ध्यान में रखकर अपने घर में सुख शांति और वैभव की स्थायी स्थापना कर सकते हैं।