गर्मी में खुद को ठंडा रखने के 10 असरदार ट्रिक्स, आज ही करें फॉलो

Heatwave: विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ला नीना से एल नीनो जैसी स्थिति बनती है तो हीटवेव और तेज हो सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि हम समय रहते सावधानियां अपनाएं और हीट स्ट्रेस से बचाव करें।

Heatwave
तेज धूप से बचने के तरीके
locationभारत
userअसमीना
calendar12 Mar 2026 02:56 PM
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भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल मार्च से मई के बीच देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने की चेतावनी जारी की है। पिछले महीने फरवरी में भी कई क्षेत्रों में रिकॉर्ड गर्मी दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ला नीना से एल नीनो जैसी स्थिति बनती है तो हीटवेव और तेज हो सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि हम समय रहते सावधानियां अपनाएं और हीट स्ट्रेस से बचाव करें।

हीटवेव क्या है और कैसे होता है?

हीटवेव तब होती है जब किसी क्षेत्र में कई दिनों तक तापमान सामान्य से बहुत अधिक बना रहता है। अगर इस दौरान नमी भी ज्यादा हो तो गर्मी का असर और खतरनाक हो सकता है। जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया भर में हीटवेव पहले से लंबी और तीव्र हो रही हैं।

कौन लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं?

हीटवेव का असर सभी पर पड़ता है लेकिन कुछ लोग इसे झेलने में सबसे कमजोर होते हैं-

  • छोटे बच्चे और नवजात
  • बुजुर्ग और लंबे समय से बीमार लोग
  • गर्भवती महिलाएं

इन लोगों में तेज गर्मी से डिहाइड्रेशन, कमजोरी, सिरदर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं जल्दी विकसित हो सकती हैं।

हीटवेव से बचने के प्रभावी तरीके

पर्याप्त पानी पीते रहें

गर्मियों में नियमित रूप से पानी पीना बेहद जरूरी है भले ही प्यास न लगे। बच्चों को बार-बार पानी पीने के लिए प्रेरित करें।

दोपहर की तेज धूप से बचें

सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। अगर बाहर जाना आवश्यक हो तो छायादार जगह का चयन करें और बीच-बीच में आराम करें।

घर को ठंडा रखें

खिड़कियों पर परदे या ब्लाइंड्स बंद रखें ताकि तेज धूप अंदर न आए। रात में खिड़कियां खोलकर ठंडी हवा आने दें। पंखा या कूलर का इस्तेमाल भी घर को ठंडा रखने में मदद करता है।

हल्के और ढीले कपड़े पहनें

गर्मियों में कॉटन जैसे हल्के और ढीले कपड़े पहनें। यह शरीर को ठंडा रखता है और गर्मी के कारण होने वाली परेशानियों को कम करता है।

बाहर जाने के समय अतिरिक्त सावधानी

  • सनस्क्रीन लगाएं।
  • टोपी या छाता इस्तेमाल करें।
  • बीच-बीच में छांव में आराम करें।
  • हीट स्ट्रेस के संकेत और पहचान।

हीट स्ट्रेस के दौरान शरीर में कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं-

  1. अत्यधिक पसीना आना।
  2. चक्कर या कमजोरी।
  3. सिरदर्द।
  4. मतली या उल्टी।
  5. मांसपेशियों में ऐंठन।
  6. अगर किसी व्यक्ति को बेहोशी, भ्रम, बहुत अधिक शरीर का तापमान या दौरे जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

हीट स्ट्रेस की स्थिति में क्या करें?

  • व्यक्ति को ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं।
  • शरीर पर ठंडे पानी या गीले कपड़े लगाएं।
  • पानी या ORS पिलाएं।
  • गंभीर लक्षण होने पर तुरंत अस्पताल ले जाएं।

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Kidney Health
किडनी का कैसे रखें ख्याल
locationभारत
userअसमीना
calendar12 Mar 2026 01:48 PM
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किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, रक्त को फिल्टर करने और कई जरूरी हार्मोन बनाने में मदद करती है लेकिन आधुनिक जीवनशैली, खराब खानपान और कम पानी पीना किडनी पर दबाव डाल सकता है। अगर आप भी अपनी किडनी को स्वस्थ और साफ रखना चाहते हैं तो कुछ नेचुरल ड्रिंक्स का नियमित सेवन बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। आज हम जानेंगे पांच ऐसे ड्रिंक्स जिन्हें अपनाकर आप अपनी किडनी का ध्यान रख सकते हैं।

नींबू पानी- किडनी पथरी और पीएच बैलेंस के लिए

नींबू पानी किडनी को स्वस्थ रखने में सबसे आसान और असरदार उपायों में से एक है। इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड किडनी में पथरी बनने से रोकने में मदद करता है। साथ ही यह यूरिन में साइट्रेट का स्तर बढ़ाता है जिससे किडनी का पीएच संतुलित रहता है और संक्रमण या पथरी बनने की संभावना कम होती है। सुबह खाली पेट गुनगुना नींबू पानी पीना फायदेमंद होता है।

ग्रीन टी- एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट किडनी की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाते हैं। यह किडनी के समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है और उम्र के साथ होने वाले नुकसान से भी बचाव करता है। रोजाना एक या दो कप ग्रीन टी का सेवन किडनी और पूरे शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है।

क्रेनबेरी जूस- UTI और किडनी इंफेक्शन से सुरक्षा

क्रेनबेरी जूस खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो बार-बार यूरिन इंफेक्शन (UTI) से परेशान रहते हैं। यह किडनी और मूत्रमार्ग को संक्रमण से बचाने में मदद करता है। रोजाना ताजा क्रेनबेरी जूस पीने से किडनी में स्वस्थ बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।

चुकंदर का जूस- ब्लड फ्लो और डिटॉक्स के लिए

चुकंदर एंटीऑक्सीडेंट और नाइट्रेट्स का अच्छा स्रोत है। यह रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है और किडनी के लिए डिटॉक्सिफाइंग प्रभाव डालता है। चुकंदर का जूस पीने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और किडनी को अतिरिक्त तनाव से बचाया जा सकता है।

हर्बल टी- प्राकृतिक तरीके से किडनी हेल्थ

अदरक, पुदीना, हिबिस्कस या तुलसी जैसी हर्बल टी किडनी को नेचुरल तरीके से हेल्दी रखने में मदद करती हैं। ये टीस मूत्र प्रवाह को बढ़ाती हैं और किडनी में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मददगार होती हैं। हर्बल टी को दिन में 1-2 बार पीना लाभकारी होता है।

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Grass Walking Benefits
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locationभारत
userअसमीना
calendar12 Mar 2026 01:20 PM
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आज की तेज-तर्रार जिंदगी में तनाव लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। काम का दबाव, लगातार स्क्रीन पर समय बिताना, नींद की कमी और भागदौड़ हमारी मानसिक सेहत पर भारी असर डालते हैं। योग, ध्यान और ब्रीदिंग एक्सरसाइज तो पहले से लोकप्रिय हैं लेकिन विज्ञान ने कुछ ऐसे अनौखे और प्राकृतिक तरीके भी सुझाए हैं जो तनाव को कम करने में मददगार साबित हुए हैं। आइए जानते हैं उन सरल और असरदार उपायों के बारे में।

मिट्टी में नंगे पैर चलना

साइंस ने यह माना है कि मिट्टी या जमीन के सीधे संपर्क में आने से शरीर में इलेक्ट्रॉन्स का संतुलन बेहतर होता है। इसे अर्थिंग या ग्राउंडिंग कहते हैं। 2012 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मिट्टी पर चलने से सूजन, नींद की समस्या और तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। शरीर में फ्री रेडिकल्स का संतुलन बनाने वाले प्राकृतिक इलेक्ट्रॉन्स मानसिक शांति और रिलैक्सेशन लाते हैं।

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जंगल में समय बिताना (Forest Bathing)

जापान में शिनरिन-योकू या फॉरेस्ट बाथिंग का तरीका बहुत लोकप्रिय है। इसमें लोग जंगल या हरियाली वाले स्थानों में समय बिताते हैं। 2010 के अध्ययन में पाया गया कि जंगल में समय बिताने से तनाव हार्मोन कोर्टिसोल घटता है और मूड बेहतर होता है। पेड़ों की खुशबू, प्राकृतिक आवाजें और शांत वातावरण दिमाग को आराम देते हैं।

मिट्टी में मौजूद हैप्पी बैक्टीरिया

कुछ रिसर्च के अनुसार मिट्टी में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। न्यूरोसाइंस जर्नल की 2007 की स्टडी में बताया गया कि मिट्टी में मौजूद Mycobacterium Vaccae सेरोटोनिन यानी मूड सुधारने वाले रसायन के स्तर को बढ़ा सकते हैं। इसका मतलब यह है कि बागवानी या मिट्टी के संपर्क में रहना दिमाग को खुश रखता है।

डिजिटल डिटॉक्स और प्रकृति के साथ समय बिताना

लगातार मोबाइल और स्क्रीन पर समय बिताने से दिमाग थक जाता है और तनाव बढ़ता है। डिजिटल डिटॉक्स यानी कुछ समय के लिए स्क्रीन से दूरी बनाना, तनाव कम करने में मदद करता है। जब हम प्रकृति के बीच समय बिताते हैं तो ध्यान क्षमता बढ़ती है और दिमाग को आराम मिलता है।

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