Nitin Gadkari : भारत सरकार में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बहुत बड़ी बात कही है। नितिन गडकरी ने कहा है कि जो करेगा जाति की बात उसे कस के मारूंगा लात। नितिन गडकरी का यह बयान खूब वायरल हो रहा है। इस प्रकार का बयान नितिन गडकरी ने पहली बार नहीं दिया है। लोकसभा चुनाव-2024 के दौरान भी नितिन गडकरी ने यह बयान दिया था। चुनाव के दौरान जब सब नेता जाति तथा धर्म की बात कर रहे थे तब भी नितिन गडकरी ने कहा था कि जो करेगा जाति की बात उसको कस कर मारूंगा लात।
एक बार फिर पुराना बयान दोहराया है नितिन गडकरी ने
भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता तथा भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपना पुराना बयान एक बार फिर दोहराया है। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी नागपुर से सांसद हैं। नागपुर में आयोजित एक समारोह में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने समानता के महत्व पर जोर देते हुए जाति आधारित राजनीति को खारिज किया। गडकरी ने पिछले साल चुनाव प्रचार के दौरान कही अपनी बात याद करते हुए कहा, जो करेगा जाति की बात, उसको मारूंगा कस के लात। उन्होंने कहा, मैं धर्म और जाति की बातें सार्वजनिक रूप से नहीं करता। चाहे चुनाव हार जाऊं या मंत्री पद चला जाए, मैं अपने इस सिद्धांत पर अटल रहूंगा।
व्यक्ति को उसके गुणों से जाना जाता है
केंद्रीय मंत्री शनिवार को नागपुर में सेंट्रल इंडिया ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा, किसी व्यक्ति का मूल्य जाति, धर्म, भाषा या लिंग के बजाय उसके गुणों से निर्धारित होना चाहिए। किसी व्यक्ति को उसकी जाति, संप्रदाय, धर्म, भाषा या लिंग से नहीं, बल्कि उसके गुणों से जाना जाता है। इसलिए हम जाति, संप्रदाय, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करेंगे। नितिन गडकरी का यह बयान खूब वायरल हो रहा है।
जान लीजिए गडकरी को
नितिन गडकरी के परिचय की बात करें तो वे एक जुझारू नेता हैं। नितिन गडकरी का जन्म और कर्मभूमि दोनों ही नागपुर रही है। उनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। एलएलबी और एमकॉम तक की शिक्षा ग्रहण की और छात्र जीवन में ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कर दी। वर्ष-1995 में नितिन गडकरी महाराष्ट्र में शिव सेना-बीजेपी की गठबंधन सरकार में लोक निर्माण मंत्री बनाए गए और चार साल तक मंत्री पद पर रहे। 1989 में पहली बार विधान परिषद के लिए चुने गए। तब से लगातार 20 वर्षों तक विधान परिषद के सदस्य चुने जाते रहे। 2008 तक विधान परिषद के सदस्य बने रहने के बाद 19 दिसंबर, 2009 को बीजेपी के संसदीय बोर्ड में उन्हें सर्वसम्मति से नए अध्यक्ष के तौर पर चुना गया। 2013 तक वो पार्टी के अध्यक्ष पद पर बने रहे। आगे भी उनको अध्यक्ष बनाए रखने के लिए पार्टी के संविधान में संशोधन किया गया, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उन्होंने खुद ही पद स्वीकारने से मना कर दिया। पार्टी के अंदर भी तब उनके खिलाफ कई लोगों ने आवाज उठाई थी। श्रीपद अपराजित बताते हैं कि 'तब इंडिया अगेंस्ट करप्शन के प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल ने गडकरी की कंपनी पूर्ति पावर और शुगर लिमिटेड पर संदेहास्पद आर्थिक मदद हासिल करने के आरोप लगाए थे। बाद में ये आरोप गलत साबित हुए और केजरीवाल ने सार्वजनिक तौर पर गडकरी से माफी भी मांगी।' कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी 2012 में गडकरी पर ये आरोप लगाए थे कि उनके सांसद अजय संचेकती के साथ व्यवसायिक संबंध हैं और कोल ब्लॉक आवंटन मामले में उनको 450 करोड़ रुपये का फायदा मिला है। दिग्विजय सिंह के आरोपों के बाद गडकरी ने उन पर मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया, जिसके बाद कांग्रेस नेता अपने बयान से पलट गए और कहा कि उन्होंने ऐसा केवल पॉलिटिकल हीट में कह दिया था। साल-2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बनी भाजपा की सरकार में नितिन गडकरी कैबिनेट मंत्री बनाए गए। लगातार तीसरी बनी भाजपा की वर्तमान सरकार में भी नितिन गडकरी केन्द्रीय परिवहन मंत्री के पद पर तैनात हैं। नितिन गडकरी को पसंद करने वाले लोगों का मत है कि नितिन गडकरी भारत के सबसे शानदार नेता हैं। बड़ी संख्या में भारत के लोग नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री पद का सबसे उपयुक्त दावेदार मानते हैं। नितिन गडकरी का लात मारने वाला बयान चर्चा का विषय बन गया है।