बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बदल रहे सियासी समीकरण
Political Equation
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 05:29 AM
Political Equation : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। एनडीए के भीतर सहयोगी दलों की महत्वाकांक्षाएं भाजपा के लिए एक नई चुनौती बनती दिख रही हैं। यूपी में भाजपा की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) ने बिहार में सीट शेयरिंग को लेकर बड़ा दांव खेला है। पार्टी ने भाजपा से 15 से 25 सीटों की मांग की है और दबाव की राजनीति शुरू कर दी है। भाजपा सहयोगी पार्टी के इस रुख को लेकर सतर्क हो गई है।
ओबीसी तथा महादलित वोट बैंक को साधने की कोशिश
ओम प्रकाश राजभर की पार्टी एसबीएसपी ने बिहार में बीते तीन महीनों में 24 रैलियां की हैं और ओबीसी तथा महादलित वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुटी है। पार्टी ने बिहार के सासाराम, पश्चिम चंपारण, नवादा, नालंदा, गया, औरंगाबाद और बेतिया समेत 28 जिलों में 25 सीटों पर अपनी दावेदारी ठोक दी है। राजभर की पार्टी ने अब कुछ बड़ा करने का मन बना लिया है। लेकिन बीजेपी उसके इस दवाब में आती नहीं दिख रही है।
अन्य दलों से गठबंधन पर है नजर
भाजपा के लिए मुश्किल यह है कि अगर एसबीएसपी को मनमाफिक सीटें नहीं मिलतीं, तो उसने राजद सहित अन्य दलों के साथ गठबंधन करने की संभावना को भी खुला रखा है। पार्टी महासचिव अरुण राजभर ने साफ कहा है कि भाजपा उनकी पहली पसंद है, लेकिन अगर उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया तो वे दूसरे विकल्पों पर भी विचार करेंगे। राजभर की पार्टी के इस रुख पर भाजपा में मंथन शुरू हो गया है, जल्द ही भाजपा भी अपने पत्ते खोल देगी।
सीट बंटवारे को लेकर तेज हो सकती है खींचतान
एसबीएसपी के इस कदम से बिहार में एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो सकती है। अब तक भाजपा ने जेडीयू को मुख्यमंत्री पद देकर अपने जूनियर पार्टनर के रूप में स्वीकार किया है, लेकिन एसबीएसपी की एंट्री से समीकरण बदल सकते हैं। बिहार की राजनीति को अभी तक भाजपा ने अपनी तरह से घुमाया है। अगर भाजपा एसबीएसपी की बात मानती है तो भाजपा को सीटों को लेकर समझौता करना पड़ेगा।
पहले भी अलग राह पकड़ चुकी है एसबीएसपी
गौरतलब है कि एसबीएसपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा से अलग होकर एनडीए को झटका दिया था, लेकिन 2023 में वह दोबारा गठबंधन में शामिल हुई। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में एसबीएसपी ने सपा के साथ मिलकर 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें छह सीटों पर जीत हासिल की थी। बाद में यह गठबंधन टूट गया। एक बार फिर एसबीएसपी वही तरीका आजमाती दिखाई पड़ रही है।
भाजपा के सामने आई एक नई चुनौती
अब बिहार में एसबीएसपी की एंट्री से भाजपा के सामने एक नई चुनौती आ गई है। अगर भाजपा उसकी मांगों को मानती है, तो उसे जेडीयू और अन्य सहयोगियों के साथ संतुलन साधना होगा। लेकिन अगर सीट शेयरिंग में उसे ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती, तो वह विपक्षी खेमे की तरफ भी जा सकती है। बिहार चुनाव से पहले यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस दबाव की राजनीति से कैसे निपटेगी। क्या एसबीएसपी को सीटें देकर एनडीए में बनाए रखा जाएगा, या फिर वह विपक्षी खेमे में नया समीकरण खड़ा करेगी? यह चुनावी माहौल आने वाले दिनों में और दिलचस्प मोड़ ले सकता है।