
AI : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जहां एक ओर आधुनिक युग में क्रांति ला रहा है, वहीं अब यह मानव अस्तित्व के लिए खतरे की घंटी भी बनता जा रहा है। गूगल की AI शाखा DeepMind ने हाल ही में AGI (Artificial General Intelligence) से जुड़े खतरों को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी है।
AGI, यानि कृत्रिम सामान्य बुद्धिमत्ता, एक ऐसी तकनीक है जो मानव की तरह सोचने, समझने, सीखने और निर्णय लेने की क्षमता रखती है। पारंपरिक AI के विपरीत, AGI किसी एक कार्य तक सीमित नहीं होती – यह बहु-क्षेत्रीय निर्णय ले सकती है।
DeepMind की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर AGI का विकास नियंत्रित रूप से नहीं हुआ, तो यह मानवता के लिए स्थायी खतरा बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि 2030 तक AGI अस्तित्व में आ सकती है।
जब AI का इस्तेमाल जानबूझकर दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाए, जैसे साइबर अटैक, युद्ध या सामाजिक अफरा-तफरी।
AI के उद्देश्यों और मानवीय मूल्यों में सामंजस्य की कमी से विनाशकारी निर्णय संभव हैं।
AI द्वारा लिए गए अनजाने निर्णय जो समाज या पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
AGI के कारण सामाजिक ढांचे और वैश्विक शक्ति-संतुलन में बड़े स्तर पर बदलाव हो सकते हैं।
AI के दुरुपयोग पर रोक लगाना।
उच्च स्तर की निगरानी प्रणाली विकसित करना।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियामक संस्था की स्थापना।
नीति निर्माताओं और वैज्ञानिकों के बीच सहयोग।
फरवरी 2025 में DeepMind के CEO डेमिस हासबिस ने एक अहम बात कही
"मानव के समकक्ष या उससे अधिक बुद्धिमान AGI अगले 5-10 वर्षों में उभर सकता है।"
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि CERN और IAEA की तर्ज पर AGI पर नजर रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था की आवश्यकता है।