
सार
आप इस शीर्षक (हैंडिंग) को पढ़ते हुए सोच रहे होंगे कि यह किसी कविता अथवा शायरी का हिस्सा है। जी नहीं, हम बात कर रहे हैं दुनियाभर के नागरिकों के लिए बड़ी समस्या लेकर आई नई तकनीक (टैक्नोलॉजी) AI की। AI यानि आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस नाम की इस टैक्नोलॉजी ने इंटरनेट की दुनिया में तहलका मचा रखा है। यह तकनीक बेहद खतरनाक साबित हो रही है।
विस्तार
Artificial Intelligence : आपको बताना जरुरी है कि आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस (AI) इन दिनों दुनियाभर में चर्चा व चिंता का विषय बनी हुई है। भारत के मुख्य सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का साफ मत है कि AI तकनीक दुनियाभर के लिए खतरनाक साबित होने वाली है। इस तकनीक से प्रत्येक नागरिक को खतरा पैदा हो रहा हैं यदि आप स्मार्ट फोन अथवा इंटरनेट यूजर हैं तो खतरा आपके ऊपर भी मंडरा रहा है। दरअसल, AI तकनीक में दूसरे अनेक फीचर्स होने के साथ ही साथ किसी भी महिला अथवा पुरुष की आवाज में हुबहू बात करने का फीचर भी मौजूद है और तो और AI के द्वारा किसी भी महिला अथवा पुरुष की शक्ल में वीडियो भी बनाई जा सकती है।
जी हां, एआई से आपके किसी मित्र अथवा परिजन को भी खतरा हो सकता है। आपके किसी रिश्तेदार की आवाज में आपके पास फोन अथवा मैसेज आ सकता है। इस फोन अथवा मैसेज के द्वारा आप किसी भी समय ठगे जा सकते हैं। दरअसल, भारत में इन दिनों एआई के द्वारा साइबर ठगी का धंधा खूब फल फूल रहा है। साइबर क्राइम रोकने के काम में लगे हुए तमाम अधिकारी, कर्मचारी व एजेंसियां एआई (AI) के माध्यम से ठगी को रोक नहीं पा रहे हैं। इस विषय में साइबर क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने एडवाइजरी भी जारी की है।
दरअसल, AI से ठगी आपके सगे संबंधी, मित्र अथवा रिश्तेदारों के नाम पर की जा रही है। इस एआई तकनीक में एक टूल (उपकरण) है। इस टूल का नाम 'वॉयस क्लोनिंग टूल' है। यह टूल किसी की भी आवाज की हुबहू वॉयस क्लोनिंग करने की क्षमता रखता है। यानि आपकी आवाज इतनी बेहतरीन ढंग से नकल करता है कि आवाज सुनकर आपको लगेगा कि यह सचमुच आपकी ही आवाज है। इसी वॉयस क्लोनिंग टूल का फायदा साइबर ठगी करने वाले ठग उठा रहे हैं। इस ठगी को करने के लिए साइबर क्रिमिनल सबसे पहले किसी शख्स को ठगी के लिए चुनते हैं। इसके बाद उसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल को देखते हैं और उसकी किसी ऑडियो व वीडियो को अपने पास रख लेते हैं। इसके बाद AI की वॉयस क्लोनिंग टूल की मदद से उसकी आवाज क्लोन करते हैं। फिर उनके परिचित को उसकी आवाज में फोन कर बताया जाता है कि उनका एक्सिडेंट हो गया है या कोई भी इमरजेंसी स्थिति बताकर ठगी की जा रही है।
Artificial Intelligence - उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी और साइबर क्राइम के एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि एआई की मदद से साइबर ठगी में एनसीआर के कई मामलों की जांच हो रही है। हाल के महीने में दर्जनों ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें एआई के इस्तेमाल होने की आशंका है। साइबर क्राइम की टीम सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। एआई के माध्यम से किसी की भी आवाज की नकल करने के लिए सिर्फ तीन से पांच सेकेंड का वीडियो चाहिए। साइबर क्रिमिनल फेसबुक, इंस्टाग्राम या यूट्यूब पर सर्च करके किसी भी आवाज का सैंपल ले लेते हैं। इसके बाद वायस क्लोन कर उनके परिचित, रिश्तेदारों को फोन किया जाता है। Artificial Intelligence