Artificial Sweetener : आर्टिफिशियल शुगर का इस्तेमाल क्या बनता जा रहा है दबे पांव आने वाली आफत का संकेत
Artificial Sweetener
भारत
चेतना मंच
19 Nov 2025 05:45 AM
“आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥” स्वस्थ रहना परम नियति है और अन्य सभी कार्य स्वास्थ्य द्वारा सिद्ध होते हैं.
Artificial Sweetener : सेहत से जुड़े कई तरह के मसले जीवन में हम सभी के लिए चिंता का विषय होते ही हैं. सेहत की एक बड़ी समस्या जो दबे पांव आती है, और धीमे धीमे हम उसके प्रभाव में ऎसे फंसते चले जाते हैं कि उससे निकल पाना आसान नहीं होता है. जी हां हम बात कर रहे हैं आर्टिफिशियल शुगर जिसका आज एक अलग रुप सामने आ रहा है. अधिकांश लोगों पर डायबटीज का प्रभाव इतना अधिक हुआ की इसके कारण चीनी को त्यागना पड़ा और इसके बदले हमारे सामने बाजार में कई विकल्प मिलने शुरु हुए जो आर्टिफिशियल शुगर Sugar Substitute के रुप में लिया जाने लगा.
Artificial Sweetener :
शुगर और जीरो कैलरी का विकल्प बनी आर्टिफिशियल शुगर
आर्टिफिशियल शुगर जो चीनी का सब्स्टिट्यूट है आज के समय में बेहद ज्यादा चलन में, बाजार में इसके अनेक ब्राँड हमें आसानी से मिल जाते हैं. अब इस आर्टिफिशियल शुगर का प्रचार इतना अधिक हो रहा है की ये अब हर किसी की पसंद बनता जा रहा है क्योंकि जीरो-कैलोरी का होने के कारण इसे युवा बेहद पसंद कर रहे हैं और सतह में हर व्यक्ति अपने आप को फैट से मुक्त करने के लिए इसे अपने भोजन में जोड़ने के लिए आगे बढ़ रहा है. Artificial Sweetener जो पहले शुगर कंट्रोल के लिए विकल्प के रुप में आया अब हमारे जीवन में डाइट का एक जरुरी हिस्सा बन रहा है.
आर्टिफिशियल शुगर से जुड़े शोध जो बताते हैं इसके खतरे
चीनी के विकल्प रुप में Artificial Sweetener एक बेहतर विकल्प है लेकिन इसके कई प्रकार के दुष्प्रभाव भी हैं जो अब नए शोधों के जरिये सामने आ रहे हैं. एरिथ्रिटल जिसे चीनी के विकल्प रुप में उपयोग किया जाता है और इससे एक बड़ा खतरा ब्लड क्लॉटिंग स्ट्रोक के रुप में दिल से जुड़ी बीमारियों का कारण बन रहा है. नए रिसर्च में सामने आया है कि ये लोगों में हार्ट अटैक के खतरों को बढ़ा सकता है.
क्लीवलैंड क्लिनिक लर्नर रिसर्च इंस्टीट्यूट के द्वारा जारी की गई अपनी खोज में उन्होंने बताया है की कैसे जो लोग यदि पहले से ही दिल की बीमारियों से प्रभावित हैं उनके लिए erythritol का उपयोग करना बेहद खराब होगा और ऎसे में दौरे या स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है.
आर्टिफिशियल शुगर से जुड़ी बातें जिन्हें अपनाने से होगा बचाव
लो-कैलोरी, लो-कार्ब्स के लिए लोग इसे जल्दी से लेने का सोच रहे हैं और ऎसे में आर्टिफिशियल स्वीटनर का उपयोग बढ़ता ही जा रहा है. शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स होने के कारण मरीजों के लिए भी इसे उपयोग में अधिक लाया जाता है लेकिन ये एक गंभीर स्थिति है जिसके लिए सजग होने की जरुरत है. एरिथ्रिटॉल चीने के समान ही मीठा होता है, लेकिन यह पचने में बेहद समय लेता है और रक्त में यह घुल कर यूरिन के जरिये शरीर से बाहर निकलता है. ऎसे में यह रक्त में घुलने पर सेहत पर असर डालता है. किसी भी चीज की अधिकता सदैव हानिकारक रही है, इसलिए जरुरी है की उचित रुप से चीजों का उपयोग किया जाए न कि देखादेखी में. यदि इन बातों को समझ कर आगे बढ़ते हैं तो हम इस से बचाव पाने में भी सफल होते हैं. तो अगली बार आर्टिफिशियल शुगर का इस्तेमाल करते हुए समझें की आखिर आपको इसकी आवश्यकता क्यों है और कितनी है.
लेखिका (राजरानी शर्मा )