Chief Justice of India : चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया कानून के सबसे बड़े रक्षक होते हैं। वही चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जब कानून पढ़ाने लगें तो कैसा नजारा होगा? दरअसल भारत के चीफ जस्टिस रहे डी.वाई. चंद्रचूड़ को लेकर एक बहुत बड़ी खबर आई है। खबर यह है कि भारत के पूर्व न्यायधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ एक नई भूमिका में नजर आने वाले हैं। वर्ष-2024 में भारत के मुख्य न्यायधीश (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) रहे डी.वाई.चन्द्रचूड को देश के लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। डी.वाई. चंद्रचूड़ (D.Y. Chandrachud) भारत के लिए भविष्य के वकील तथा जज तैयार करने का बड़ा काम करेंगे।
भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश बन गए प्रोफेसर
आपको बता दें कि, भारत के पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी.वाई. चंद्रचूड़ पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। सभी को यह जानने की जिज्ञासा थी कि रिटायरमेंट के बाद भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ क्या कर रहे हैं। हम आपको बता देते हैं कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ अब कानून के प्रोफेसर बन गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ अब नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) दिल्ली में प्रोफेसर बन गए हैं। यूनिवर्सिटी ने इसे भारतीय कानूनी शिक्षा में एक नया और बड़ा कदम बताया है। 15 मई 2025 को (NLU) दिल्ली ने एक्स पर इसकी जानकारी दी और कहा, "हमें गर्व है कि भारत के पूर्व चीफ जस्टिस डॉ. जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ अब नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली में प्रोफेसर के तौर पर जुड़ रहे हैं।" पोस्ट में चंद्रचूड़ की NLU के वाइस-चांसलर जी. एस. बाजपेयी के साथ एक तस्वीर भी शेयर की गई है।
कानूनी शिक्षा के लिए आ गया ऐतिहासिक पल
भारतीय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का प्रोफेसर बनना कानून के लिए ऐतिहासिक पल है। NLU के वाइस-चांसलर जी.एस. बाजपेयी ने इसे कानूनी शिक्षा के लिए ऐतिहासिक पल करार दिया। उन्होंने कहा, 'जस्टिस चंद्रचूड़ का आना हमारे लिए गर्व की बात है। वो एक प्रगतिशील जज रहे हैं और अब उनकी मौजूदगी से हमारी यूनिवर्सिटी में कानूनी पढ़ाई को नई दिशा मिलेगी। वो अगली पीढ़ी के वकीलों को तैयार करने में मदद करेंगे।' इस मौके पर NLU दिल्ली एक नया सेंटर फॉर कॉन्स्टिट्यूशनल स्टडीज शुरू करने जा रहा है, जहां चंद्रचूड़ रिसर्च को लीड करेंगे। बाजपेयी ने बताया कि जस्टिस चंद्रचूड़ ने संवैधानिक नैतिकता, ट्रांसफॉर्मेटिव कॉन्स्टिट्यूशनलिज्म और मौलिक अधिकारों की व्याख्या में जो काम किया है, वो कानूनी पढ़ाई के लिए बहुत बड़ा खजाना है। इसके अलावा, जुलाई से यूनिवर्सिटी एक नई पहल "इन द स्पिरिट ऑफ जस्टिस : द DYC डिस्टिंग्विश्ड लेक्चर सीरीज" शुरू करेगी। इस सीरीज में चंद्रचूड़ के अनुभवों के आधार पर आज के कानूनी मुद्दों पर चर्चा होगी।
वर्ष- 2024 में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पद से रिटायर हुए हैं डी.वाई. चंद्रचूड़
जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ नवंबर 2024 में चीफ जस्टिस के पद से रिटायर हुए थे। वो भारत के 50वें चीफ जस्टिस थे और उनका कार्यकाल दो साल का रहा। सुप्रीम कोर्ट में उनकी जर्नी 13 मई 2016 से शुरू हुई थी, जहां उन्होंने 38 कॉन्स्टिट्यूशन बेंच में हिस्सा लिया। अयोध्या जमीन विवाद, समलैंगिक संबंधों को अपराध से बाहर करना, प्राइवेसी का अधिकार और आर्टिकल 370 को हटाने जैसे बड़े फैसलों में उनकी अहम भूमिका रही। इससे पहले वो 2000 में बॉम्बे हाई कोर्ट में जज रहे, फिर 2013 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। 1998 में उन्हें सीनियर एडवोकेट बनाया गया था और वो एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भी रहे। NLU दिल्ली ने कहा कि चंद्रचूड़ का अनुभव कानूनी पढ़ाई को नई ऊंचाई देगा और समाज में बदलाव लाने में मदद करेगा।