भारतीय राजनीति की 8 ऐसी महिलाएं जिन्होंने पुरुषों को भी छोड़ा पीछे, एक तो रह चुकी हैं PM
राजनीतिक संघर्षों के बीच इन महिलाओं ने ऐसा मुकाम हासिल किया जिसने पूरे देश को प्रेरित किया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के मौके पर यह याद करना जरूरी है कि भारत की राजनीति में कई ऐसी महिला नेता रही हैं जिन्होंने न सिर्फ सत्ता के सर्वोच्च पदों तक पहुंच बनाई बल्कि अपने फैसलों और कामों से देश की...

भारतीय राजनीति को अक्सर पुरुष प्रधान माना जाता रहा है, लेकिन समय-समय पर कई महिलाओं ने इस सोच को बदलकर रख दिया। मुश्किल परिस्थितियों, सामाजिक चुनौतियों और राजनीतिक संघर्षों के बीच इन महिलाओं ने ऐसा मुकाम हासिल किया जिसने पूरे देश को प्रेरित किया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के मौके पर यह याद करना जरूरी है कि भारत की राजनीति में कई ऐसी महिला नेता रही हैं जिन्होंने न सिर्फ सत्ता के सर्वोच्च पदों तक पहुंच बनाई बल्कि अपने फैसलों और कामों से देश की दिशा भी बदल दी। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक इन नेताओं ने साबित किया कि नेतृत्व क्षमता किसी लिंग की मोहताज नहीं होती। आइए जानते हैं ऐसी ही आठ महिलाओं की कहानी जिन्होंने भारतीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देने वाली राजकुमारी अमृत कौर
Rajkumari Amrit Kaur स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री थीं और उन्होंने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। कपूरथला के शाही परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने आरामदायक जीवन छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया और Mahatma Gandhi के साथ मिलकर काम किया। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उनका सबसे बड़ा योगदान दिल्ली में All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) की स्थापना रहा। उन्होंने न केवल सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया बल्कि विदेशों से भी सहयोग जुटाया ताकि भारत को एक विश्वस्तरीय मेडिकल संस्थान मिल सके। इसके अलावा उन्होंने चेचक और मलेरिया जैसी बीमारियों के खिलाफ बड़े अभियान चलाए और महिलाओं के अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई।
सुचेता कृपलानी: देश की पहली महिला मुख्यमंत्री
Sucheta Kriplani भारतीय राजनीति की एक साहसी और ईमानदार नेता थीं। 1963 में वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और इस तरह किसी भी भारतीय राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने भूमिगत रहकर काम किया और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रशासन में अनुशासन और पारदर्शिता लाने पर जोर दिया। उनके कार्यकाल में राज्य कर्मचारियों की बड़ी हड़ताल भी हुई जिसे उन्होंने संयम और दृढ़ता से संभाला।
इंदिरा गांधी: साहसिक फैसलों वाली प्रधानमंत्री
Indira Gandhi भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक मानी जाती हैं। वह भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और अपने मजबूत फैसलों के कारण “आयरन लेडी” के नाम से भी जानी गईं। उनके कार्यकाल में 1969 में बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ, जिससे बैंकिंग सेवाएं आम लोगों तक पहुंच सकीं। उन्होंने हरित क्रांति को बढ़ावा दिया, जिससे भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बना। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनके नेतृत्व में भारत ने ऐतिहासिक जीत हासिल की और बांग्लादेश का निर्माण हुआ।
सुषमा स्वराज: जनता से जुड़ी हुई नेता
Sushma Swaraj भारतीय राजनीति की सबसे लोकप्रिय और सम्मानित नेताओं में से एक थीं। वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं और बाद में देश की विदेश मंत्री भी रहीं। विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद की। चाहे पासपोर्ट की समस्या हो या युद्धग्रस्त इलाकों से लोगों को निकालना उन्होंने हर बार तुरंत प्रतिक्रिया दी। उनकी संवेदनशीलता और शानदार भाषण शैली ने उन्हें देश की सबसे पसंदीदा नेताओं में शामिल कर दिया।
निर्मला सीतारमण: आर्थिक फैसलों की मजबूत आवाज
Nirmala Sitharaman वर्तमान में भारत की वित्त मंत्री हैं और इससे पहले वह देश की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री भी रह चुकी हैं। वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने कई बड़े आर्थिक फैसले लिए, जिनमें कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती और आर्थिक सुधारों से जुड़े कदम शामिल हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने कई आर्थिक पैकेज घोषित किए जिससे देश की अर्थव्यवस्था को सहारा मिला। वे दुनिया की प्रभावशाली महिलाओं की सूची में भी कई बार शामिल हो चुकी हैं।
ममता बनर्जी: संघर्ष से सत्ता तक का सफर
Mamata Banerjee पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं और अपनी सादगी तथा संघर्ष के लिए जानी जाती हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने राजनीति में लंबा सफर तय किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने शिक्षा, महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण से जुड़ी कई योजनाएं शुरू कीं। उनकी “कन्याश्री” योजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया।
मायावती: सामाजिक बदलाव की मजबूत आवाज
Mayawati उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और देश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव भी उन्हें ही मिला। उन्होंने राजनीति में बहुजन समाज की भागीदारी को मजबूत किया और सामाजिक न्याय की राजनीति को नई दिशा दी। उनके शासनकाल में कानून-व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के प्रयासों की अक्सर चर्चा होती है।
जयललिता: “अम्मा” की लोकप्रिय राजनीति
J. Jayalalithaa तमिलनाडु की राजनीति का बेहद मजबूत चेहरा थीं। उनके समर्थक उन्हें “अम्मा” कहकर पुकारते थे। उन्होंने राज्य में कई ऐसी योजनाएं शुरू कीं जो आम लोगों के जीवन से सीधे जुड़ी थीं। “अम्मा कैंटीन”, सस्ती दवाएं और गरीबों के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं ने उन्हें जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। उनके नेतृत्व में तमिलनाडु ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की।
भारतीय राजनीति को अक्सर पुरुष प्रधान माना जाता रहा है, लेकिन समय-समय पर कई महिलाओं ने इस सोच को बदलकर रख दिया। मुश्किल परिस्थितियों, सामाजिक चुनौतियों और राजनीतिक संघर्षों के बीच इन महिलाओं ने ऐसा मुकाम हासिल किया जिसने पूरे देश को प्रेरित किया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के मौके पर यह याद करना जरूरी है कि भारत की राजनीति में कई ऐसी महिला नेता रही हैं जिन्होंने न सिर्फ सत्ता के सर्वोच्च पदों तक पहुंच बनाई बल्कि अपने फैसलों और कामों से देश की दिशा भी बदल दी। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक इन नेताओं ने साबित किया कि नेतृत्व क्षमता किसी लिंग की मोहताज नहीं होती। आइए जानते हैं ऐसी ही आठ महिलाओं की कहानी जिन्होंने भारतीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देने वाली राजकुमारी अमृत कौर
Rajkumari Amrit Kaur स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री थीं और उन्होंने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। कपूरथला के शाही परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने आरामदायक जीवन छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया और Mahatma Gandhi के साथ मिलकर काम किया। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उनका सबसे बड़ा योगदान दिल्ली में All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) की स्थापना रहा। उन्होंने न केवल सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया बल्कि विदेशों से भी सहयोग जुटाया ताकि भारत को एक विश्वस्तरीय मेडिकल संस्थान मिल सके। इसके अलावा उन्होंने चेचक और मलेरिया जैसी बीमारियों के खिलाफ बड़े अभियान चलाए और महिलाओं के अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई।
सुचेता कृपलानी: देश की पहली महिला मुख्यमंत्री
Sucheta Kriplani भारतीय राजनीति की एक साहसी और ईमानदार नेता थीं। 1963 में वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और इस तरह किसी भी भारतीय राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने भूमिगत रहकर काम किया और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रशासन में अनुशासन और पारदर्शिता लाने पर जोर दिया। उनके कार्यकाल में राज्य कर्मचारियों की बड़ी हड़ताल भी हुई जिसे उन्होंने संयम और दृढ़ता से संभाला।
इंदिरा गांधी: साहसिक फैसलों वाली प्रधानमंत्री
Indira Gandhi भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक मानी जाती हैं। वह भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और अपने मजबूत फैसलों के कारण “आयरन लेडी” के नाम से भी जानी गईं। उनके कार्यकाल में 1969 में बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ, जिससे बैंकिंग सेवाएं आम लोगों तक पहुंच सकीं। उन्होंने हरित क्रांति को बढ़ावा दिया, जिससे भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बना। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनके नेतृत्व में भारत ने ऐतिहासिक जीत हासिल की और बांग्लादेश का निर्माण हुआ।
सुषमा स्वराज: जनता से जुड़ी हुई नेता
Sushma Swaraj भारतीय राजनीति की सबसे लोकप्रिय और सम्मानित नेताओं में से एक थीं। वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं और बाद में देश की विदेश मंत्री भी रहीं। विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद की। चाहे पासपोर्ट की समस्या हो या युद्धग्रस्त इलाकों से लोगों को निकालना उन्होंने हर बार तुरंत प्रतिक्रिया दी। उनकी संवेदनशीलता और शानदार भाषण शैली ने उन्हें देश की सबसे पसंदीदा नेताओं में शामिल कर दिया।
निर्मला सीतारमण: आर्थिक फैसलों की मजबूत आवाज
Nirmala Sitharaman वर्तमान में भारत की वित्त मंत्री हैं और इससे पहले वह देश की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री भी रह चुकी हैं। वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने कई बड़े आर्थिक फैसले लिए, जिनमें कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती और आर्थिक सुधारों से जुड़े कदम शामिल हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने कई आर्थिक पैकेज घोषित किए जिससे देश की अर्थव्यवस्था को सहारा मिला। वे दुनिया की प्रभावशाली महिलाओं की सूची में भी कई बार शामिल हो चुकी हैं।
ममता बनर्जी: संघर्ष से सत्ता तक का सफर
Mamata Banerjee पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं और अपनी सादगी तथा संघर्ष के लिए जानी जाती हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने राजनीति में लंबा सफर तय किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने शिक्षा, महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण से जुड़ी कई योजनाएं शुरू कीं। उनकी “कन्याश्री” योजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया।
मायावती: सामाजिक बदलाव की मजबूत आवाज
Mayawati उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और देश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव भी उन्हें ही मिला। उन्होंने राजनीति में बहुजन समाज की भागीदारी को मजबूत किया और सामाजिक न्याय की राजनीति को नई दिशा दी। उनके शासनकाल में कानून-व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के प्रयासों की अक्सर चर्चा होती है।
जयललिता: “अम्मा” की लोकप्रिय राजनीति
J. Jayalalithaa तमिलनाडु की राजनीति का बेहद मजबूत चेहरा थीं। उनके समर्थक उन्हें “अम्मा” कहकर पुकारते थे। उन्होंने राज्य में कई ऐसी योजनाएं शुरू कीं जो आम लोगों के जीवन से सीधे जुड़ी थीं। “अम्मा कैंटीन”, सस्ती दवाएं और गरीबों के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं ने उन्हें जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। उनके नेतृत्व में तमिलनाडु ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की।












