
CWC : भारत के राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक हमेशा से नीतिगत दिशा तय करने वाला मंच रही है। इस बार गुजरात की धरती पर हुई बैठक ऐतिहासिक और वैचारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रही। बैठक का केंद्र बिंदु रहे महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इन तीनों दिग्गजों की विचारधारा और उनके आपसी संबंधों पर प्रकाश डाला।
खरगे ने बताया कि महात्मा गांधी, नेहरू और पटेल की भूमिका न केवल स्वतंत्रता संग्राम में बल्कि कांग्रेस की नींव को मजबूत करने में भी रही है।
तीनों नेताओं ने भारत की आत्मा को सामाजिक न्याय, एकता और अहिंसा से जोड़ा।
खरगे ने ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला देते हुए बताया कि पंडित नेहरू और सरदार पटेल के रिश्तों को तोड़ने की कोशिश एक साजिश है।
उन्होंने कहा, "वे एक सिक्के के दो पहलू थे। नेहरू जी पटेल साहब से सलाह लेने उनके घर जाते थे।"
सरदार पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था। उनकी सोच, संघ की विचारधारा से अलग थी।
खरगे ने कहा कि आज आरएसएस सरदार पटेल की विरासत को हड़पने की कोशिश कर रहा है, जबकि सच इसके बिल्कुल विपरीत है।
महात्मा गांधी ने कांग्रेस को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया, जिसे आज भी पार्टी ने अपनाया हुआ है।
खरगे ने कहा, "गांधी जी की लाठी और चश्मा कोई भी ले सकता है, पर उनके सिद्धांतों पर चलना सिर्फ कांग्रेस जानती है।"
पटेल जी ने संविधान सभा की 'एडवाइजरी कमेटी' की अध्यक्षता की, जो मौलिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा करती थी।
बाबासाहेब अंबेडकर ने भी स्वीकारा था कि कांग्रेस के सहयोग के बिना संविधान बनाना असंभव था।
खरगे ने कहा, "बीजेपी और संघ परिवार अपने पास कोई स्वतंत्रता संग्राम की विरासत नहीं होने के कारण इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं।"
पुतले जलाने, संविधान की आलोचना और गांधीवादियों को दरकिनार करना इसी रणनीति का हिस्सा है।
कांग्रेस के लिए गुजरात केवल एक राज्य नहीं, बल्कि प्रेरणा और बल का स्रोत है।
दादाभाई नौरोजी, गांधी जी और सरदार पटेल जैसे नेताओं ने यहीं से कांग्रेस को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
खरगे ने सरदार पटेल का उद्धरण देकर संगठन की शक्ति पर बल दिया:
"संगठन के बिना संख्या बल बेकार है। जब सूत के धागे मिलते हैं तो ही मजबूत कपड़ा बनता है।"
यही मंत्र आज कांग्रेस को आत्मसात करना है। CWC :