जानिए, दुनिया का यह कोना जहाँ 'गरीब' शब्द ही अनजान
यहां आपको गगनचुंबी इमारतों के बीच हाथ फैलाए कोई भिखारी नहीं मिलेगा। इसकी वजह यहां की सरकार की फौलादी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था है, जो मुसीबत आने से पहले ही नागरिकों की झोली भर देती है। स्विट्जरलैंड में अत्यधिक गरीबी का न मिलना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि सरकार की सोची-समझी नीति का नतीजा है।

Poverty in Switzerland is not a coincidence : दुनिया के नक्शे पर एक ऐसा देश है, जहां 'गरीबी' शब्द मानो शब्दकोष से बाहर होता जा रहा है। यूरोप का स्वर्ग कहा जाने वाला स्विट्जरलैंड सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बर्फीले पहाड़ों के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि अपनी ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए भी जाना जाता है, जहां हर नागरिक नवाबों जैसी जिंदगी जीता है।
सड़कों पर नहीं दिखते हाथ फैलाए लोग
यहां आपको गगनचुंबी इमारतों के बीच हाथ फैलाए कोई भिखारी नहीं मिलेगा। इसकी वजह यहां की सरकार की फौलादी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था है, जो मुसीबत आने से पहले ही नागरिकों की झोली भर देती है। स्विट्जरलैंड में अत्यधिक गरीबी का न मिलना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि सरकार की सोची-समझी नीति का नतीजा है। हालांकि वहां कम आय वाले लोग मौजूद हैं, लेकिन सरकारी व्यवस्था इतनी पुख्ता है कि कोई भी व्यक्ति बुनियादी सुविधाओं जैसे भोजन और छत के लिए नहीं तड़पता है।
बेरोजगारी बीमा: नौकरी जाने पर मिलता है 80% वेतन
इस देश की सबसे बड़ी खूबी इसका बेरोजगारी बीमा है। अगर किसी नागरिक की नौकरी चली जाती है, तो वह सड़क पर नहीं आता। सरकार उसे पिछले वेतन का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा बेरोजगारी भत्ते के रूप में एक निश्चित समय तक देती रहती है। सिर्फ पैसा देकर ही नहीं, प्रशासन उस व्यक्ति को नई नौकरी दिलाने के लिए विशेष ट्रेनिंग और कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाता है, ताकि वह जल्द से जल्द मुख्यधारा में लौट सके।
झुग्गी-झोपड़ियों का नामोनिशान नहीं
स्विट्जरलैंड में घर का किराया किसी के लिए बोझ न बने, इसके लिए स्थानीय प्रशासन और सरकार मिलकर काम करते हैं। वहां बड़े पैमाने पर हाउसिंग कोऑपरेटिव और सब्सिडी योजनाएं चलाई जाती हैं, जो मध्यम और कम आय वाले परिवारों को बेहद सस्ती दरों पर मकान उपलब्ध कराती हैं। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि देश के किसी भी कोने में कोई भी व्यक्ति बिना छत के न सोए। इसी कारण वहां झुग्गी-झोपड़ियों का नामोनिशान तक नहीं मिलता है।
सेहत का मामला: इलाज के लिए कर्ज में नहीं डूबते लोग
स्वास्थ्य के मामले में स्विट्जरलैंड दुनिया के सबसे सख्त और सुरक्षित देशों में से एक है। यहां हर नागरिक के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है। जो लोग प्रीमियम भरने में सक्षम नहीं होते, सरकार उन्हें मोटी सब्सिडी देती है, ताकि इलाज हर किसी की पहुंच में रहे। इस व्यवस्था के कारण वहां का हर व्यक्ति, चाहे वह अमीर हो या कम आय वाला, दुनिया की बेहतरीन चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा पाता है और बीमारी की वजह से कर्ज के जाल में नहीं फंसता है।
'खुशहाल' देश में नवाबों जैसी जिंदगी
ऊंचा जीवन स्तर और औसत वेतन की वजह से स्विट्जरलैंड अक्सर दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची में टॉप पर रहता है। यहां की सरकार का यह अहम फैसला कि समाज का सबसे निचला तबका भी सम्मानजनक और गरिमापूर्ण जीवन जिए, इसे दुनिया का सबसे 'रसूख' देश बनाता है। Poverty in Switzerland is not a coincidence
Poverty in Switzerland is not a coincidence : दुनिया के नक्शे पर एक ऐसा देश है, जहां 'गरीबी' शब्द मानो शब्दकोष से बाहर होता जा रहा है। यूरोप का स्वर्ग कहा जाने वाला स्विट्जरलैंड सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बर्फीले पहाड़ों के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि अपनी ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए भी जाना जाता है, जहां हर नागरिक नवाबों जैसी जिंदगी जीता है।
सड़कों पर नहीं दिखते हाथ फैलाए लोग
यहां आपको गगनचुंबी इमारतों के बीच हाथ फैलाए कोई भिखारी नहीं मिलेगा। इसकी वजह यहां की सरकार की फौलादी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था है, जो मुसीबत आने से पहले ही नागरिकों की झोली भर देती है। स्विट्जरलैंड में अत्यधिक गरीबी का न मिलना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि सरकार की सोची-समझी नीति का नतीजा है। हालांकि वहां कम आय वाले लोग मौजूद हैं, लेकिन सरकारी व्यवस्था इतनी पुख्ता है कि कोई भी व्यक्ति बुनियादी सुविधाओं जैसे भोजन और छत के लिए नहीं तड़पता है।
बेरोजगारी बीमा: नौकरी जाने पर मिलता है 80% वेतन
इस देश की सबसे बड़ी खूबी इसका बेरोजगारी बीमा है। अगर किसी नागरिक की नौकरी चली जाती है, तो वह सड़क पर नहीं आता। सरकार उसे पिछले वेतन का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा बेरोजगारी भत्ते के रूप में एक निश्चित समय तक देती रहती है। सिर्फ पैसा देकर ही नहीं, प्रशासन उस व्यक्ति को नई नौकरी दिलाने के लिए विशेष ट्रेनिंग और कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाता है, ताकि वह जल्द से जल्द मुख्यधारा में लौट सके।
झुग्गी-झोपड़ियों का नामोनिशान नहीं
स्विट्जरलैंड में घर का किराया किसी के लिए बोझ न बने, इसके लिए स्थानीय प्रशासन और सरकार मिलकर काम करते हैं। वहां बड़े पैमाने पर हाउसिंग कोऑपरेटिव और सब्सिडी योजनाएं चलाई जाती हैं, जो मध्यम और कम आय वाले परिवारों को बेहद सस्ती दरों पर मकान उपलब्ध कराती हैं। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि देश के किसी भी कोने में कोई भी व्यक्ति बिना छत के न सोए। इसी कारण वहां झुग्गी-झोपड़ियों का नामोनिशान तक नहीं मिलता है।
सेहत का मामला: इलाज के लिए कर्ज में नहीं डूबते लोग
स्वास्थ्य के मामले में स्विट्जरलैंड दुनिया के सबसे सख्त और सुरक्षित देशों में से एक है। यहां हर नागरिक के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है। जो लोग प्रीमियम भरने में सक्षम नहीं होते, सरकार उन्हें मोटी सब्सिडी देती है, ताकि इलाज हर किसी की पहुंच में रहे। इस व्यवस्था के कारण वहां का हर व्यक्ति, चाहे वह अमीर हो या कम आय वाला, दुनिया की बेहतरीन चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा पाता है और बीमारी की वजह से कर्ज के जाल में नहीं फंसता है।
'खुशहाल' देश में नवाबों जैसी जिंदगी
ऊंचा जीवन स्तर और औसत वेतन की वजह से स्विट्जरलैंड अक्सर दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची में टॉप पर रहता है। यहां की सरकार का यह अहम फैसला कि समाज का सबसे निचला तबका भी सम्मानजनक और गरिमापूर्ण जीवन जिए, इसे दुनिया का सबसे 'रसूख' देश बनाता है। Poverty in Switzerland is not a coincidence












