
Ghaziabad : यूपी के गाजियाबाद से पुलिस को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है। खबर यह है कि यहां पर तैनात 35 पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। 40 दिन पहले कोर्ट ने रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए थे, लेकिन अब जाकर इन पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज हो सका है। आपको बता दें कि जुलाई 2022 में फर्जी केस में महंत व उनकी पत्नी को जेल भेजा गया था। जेल से छुटने के बाद महंत ने कोर्ट में गुहार लगाई थी।
मामला गाजियाबाद के थाना लोनी बॉर्डर इलाके का है। यहां के सिद्ध बाबा मंदिर मोनू धाम के महंत और उनकी पत्नी की शिकायत के के बाद 35 पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज हुआ है। आपको बता दें कि 7 जुलाई 2022 में पुलिस अफसर और उनके साथ अन्य पुलिस कर्मी महंत के घर में पहुंचे थे। महंत की पत्नी ने आरोप लगाए थे कि पुलिसकर्मियों ने उनके घर में लूटपाट की थी। जब उन्होंने इस बात का विरोध किया था तो उन पर ही झूठा केस कर दिया और फिर उन्हें जेल भेज दिया गया था। पुलिस के इस कारनामे के पीछे उन्होंने किसी स्थानीय नेता का जिक्र भी किया था।
महंत ने जेल से वापस आने के बाद पुलिस के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 35 आरोपियों समेत 3 अन्य पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। इस फैसले पर अमल करते हुए पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है।
महंत की पत्नी दीपा शर्मा ने बताया है कि उनके पति सिद्ध बाबा मंदिर मोनू धाम में महंत हैं। इस मंदिर में सालभर खूब चढ़ावा आता है जिन पैसों से वह मंदिर का रख-रखाव भी करते हैं साथ ही आस-पास के लोगों के लिए भोग प्रसाद भी बांटते हैं। इतना ही नहीं पैसे इकट्ठे होने पर वह गरीब बच्चियों को शादियां भी करवाते थे। उनके मंदिर के चढ़ावे को देखते हुए मनीष भाटी और विकास दुबे ने उनसे दो करोड़ की रंगदारी की मांग की थी।
इस घटना के बाद ही 6 जुलाई 2022 को उनके घर में जांच के नाम पर पुलिसकर्मी आए और घर के अंदर सब सामान चेक करने लग गए। उनकी पत्नी ने सामान लूटने का विरोध किया तो दोनों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने का फर्जी केस बनाकर जेल पहुंचा दिया था। पुलिस ने महंत व उनकी पत्नी सहित परिजनों पर चौकी सेवाधाम लोनी बार्डर पर जाम लगाने, गाड़ियों में तोड़फोड़ व पथराव आदि करने तथा पथराव में स्थानीय पुलिस के घायल होने का आरोप लगाते हुए 7 जुलाई 2022 को लोनी थाने में रिपोर्ट दर्ज कर 13 लोगों को जेल भेजा था। इस मामले में जांच अधिकारी ने जांच के दौरान पाया कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई, जिसके बाद एफआरआई को खारिज कर दिया गया। इस मामले में तत्कालीन एसओ योगेंद्र पंवार सहित 35 पुलिस कर्मियों व 3 अन्य के खिलाफ के आदेश पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। Ghaziabad News