Hindi Kavita –
आप कैसे शुरू करेंगे आखिरी कविता लिखना?
एक उम्र के बाद
सबसे अच्छा दोस्त होता है
नमक मिला गुनगुना पानी।
जब आप भूल चुके होते हैं प्रेम करने की गंभीरता,
बादलों से बरसने की ताकीद करना,
हर कविता में शब्दों से बस एक चेहरा बार-बार बनाना
और छुट्टी की शामों को बांसुरी बजाना।
पूरी की पूरी उम्र गुज़रती है
खोजते हुए, अलविदा कहने का सबसे सही मौका
और सबसे सही शब्द जो आकर भरे रहते हैं गले में।
बस आपकी खुरदरी उँगलियों से लिपटा रहता है
सब गुम गए दरख्तों का स्पंदन।
पुराने जूतों में लगी मिट्टी भर ही रिश्ता रह जाता है
कुएँ से और गर्मी की दोपहरों से।
उम्रदराज़ लोग
उठते हैं हर सुबह
उठाये हुए अपनी गर्दन पर
बीत गये दिनों का बोझ
और रोज़ सीखते भूलते हैं इंतज़ार करना
चाय के कप का, नयी दवाइयों का
और अपनी आवाज़ भी सही तरह से सुन पाने का।
एक उम्र के बाद
नींद से उठने का मन नहीं होता,
डर लगता है दूर हवा से आवाज़ कर रही खिड़की से,
बहुत दूर लगती है गुलमोहर की गंध
और आप प्रार्थना करते हैं बेहोशी के घंटों के लिए.
आप सर झुकाना चाहते हैं मसीहे के आगे
और पालना चाहते हैं भ्रम कि आप तो बस कठपुतली हैं।
वो बूढा थका आदमी
अपने कमरे में बैठा, कांपते हाथों से कवितायेँ लिखता हुआ
खुद को ये दिलासा देना चाहता है कि एक उम्र पहले,
उसी ने चुराई थी देवों से आग और उसी आग से उसने जला दी थी
एक पुरानी गिटार और कई फ़िज़ूल शब्द।
वो यकीन करना चाहता है कि
शताब्दियों पहले उसने ही उगाया था लड़की की देह से सूरज।
अपने पोपले मुंह से आत्मस्वीकृति के शब्द तक नहीं निकाल पाता।
बाहर आती है बस हवा और उसके सांस की बदबू
कि जिया वह वैसे ही जैसे सब जिए उम्मीद और निराशा में झूलते
एक बड़ी बस में लदा हुआ, बड़ों से सीखता छोटों को सिखाता
कि "पीछे के दरवाज़े से चढो और अगले से उतर जाना। नंबर याद रखना"
वो ताउम्र वह आदमी रहा जो एक पडोसी से लड़ता और दुसरे से दबता रहा।
उन बूढ़े थके आदमियों की भीड़ में से एक आदमी।
"मैं जो तुम्हारे दिल के करीब था, वहाँ से हटा दिया गया एक दिन,
सुन्दरता को भय में खोने और भय को जिज्ञासा में खो देने को।
मेरे सब जूनून हश्र हो गये और उनको रखने की क्या ज़रूरत थी
कि जो रहता है वह अपभ्रंशित हो जाता है।"
कैसे लिखा जाता है आखिरी कविता का अंत?
अंचित
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