
मंगलवार देर रात जब प्रशासनिक टीम दरगाह हटाने पहुंची, तो अचानक बिजली सप्लाई बाधित हो गई और वहां मौजूद भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। पुलिस पर पत्थरबाज़ी में करीब पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। पथराव के कारण प्रशासन को तुरंत कार्रवाई रोकनी पड़ी। हालात को संभालने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और कुछ समय के लिए पीछे हटना पड़ा। यह इस साल नागपुर हिंसा के बाद दूसरा बड़ा पथराव की घटना थी।
बुधवार सुबह प्रशासन ने दोबारा मोर्चा संभाला और इस बार इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। करीब 500 से अधिक जवानों की मौजूदगी में सुबह करीब पौने नौ बजे बुलडोजर चलाया गया। कार्रवाई से पहले दरगाह (Illegal Dargah ) के आसपास 100 मीटर तक बैरिकेडिंग की गई थी और आम नागरिकों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। ट्रैफिक को भी डायवर्ट किया गया ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न फैले।
इस दरगाह (Illegal Dargah ) को लेकर फरवरी में कुछ हिंदू संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था और इसे हटाकर हनुमान मंदिर बनाए जाने की मांग की थी। इसके बाद यह धार्मिक स्थल विवादों में आ गया। पुलिस ने उस समय कुछ साधु-संतों को भी हिरासत में लिया था। अब जब नगर निगम ने बुलडोजर कार्रवाई की, तो पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया, जिसे काबू करने के लिए प्रशासन ने लगातार निगरानी और सुरक्षा बनाए रखी। Illegal Dargah :