In the mirror of history : आइये जानें, कैसे हुई थी नालन्दा विश्वविद्यालय को जलाने वाले जेहादी बख्तियार खिलजी की मौत
Let us know how the jihadi Bakhtiyar Khilji, who burnt Nalanda University, died
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 05:17 AM
In the mirror of history : बख्तियार खिलजी तूं ज्ञान के मंदिर नालंदा को जलाकर कामरूप (असम) की धरती पर आया है... अगर तूं और तेरा एक भी सिपाही ब्रह्मपुत्र को पार कर सका तो मां चंडी (कामातेश्वरी) की सौगंध मैं जीते-जी अग्नि समाधि ले लूंगा... राजा पृथु और उसके बाद 27 मार्च 1206 को असम की धरती पर एक ऐसी लड़ाई लड़ी गई, जो मानव अस्मिता के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है।
In the mirror of history
एक ऐसी लड़ाई, जिसमें किसी फौज के फौजी लड़ने आए तो 12 हजार हों और जिन्दा बचे सिर्फ 100...। जिन लोगों ने युद्धों के इतिहास को पढ़ा है, वे जानते हैं कि जब कोई दो फौज लड़ती है तो कोई एक फौज या तो बीच में ही हार मान कर भाग जाती है या समर्पण करती है। लेकिन, इस लड़ाई में 12 हजार सैनिक लड़े और बचे सिर्फ 100 वो भी घायल। ऐसी मिसाल दुनियाभर के इतिहास में संभवतः कोई नहीं है। आज भी गुवाहाटी के पास वो शिलालेख मौजूद है, जिस पर इस लड़ाई के बारे में लिखा है।
उस समय मुहम्मद बख्तियार खिलजी बिहार और बंगाल के कई राजाओं को जीतते हुए असम की तरफ बढ़ रहा था। इस दौरान उसने नालंदा विश्वविद्यालय को जला दिया था और हजारों बौद्ध, जैन और हिन्दू विद्वानों का कत्ल कर दिया था। नालंदा विवि में विश्व की अनमोल पुस्तकें, पाण्डुलिपियां, अभिलेख आदि जलकर खाक हो गये थे। यह जेहादी खिलजी मूलतः अफगानिस्तान का रहने वाला था और मुहम्मद गोरी व कुतुबुद्दीन एबक का रिश्तेदार था। बाद के दौर का अलाउद्दीन खिलजी भी उसी का रिश्तेदार था।
In the mirror of history
असल में वो जेहादी खिलजी, नालंदा को खाक में मिलाकर असम के रास्ते तिब्बत जाना चाहता था। क्योंकि, तिब्बत उस समय चीन, मंगोलिया, भारत, अरब व सुदूर पूर्व के देशों के बीच व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र था तो खिलजी इस पर कब्जा जमाना चाहता था। लेकिन, उसका रास्ता रोके खड़े थे असम के राजा पृथु, जिन्हें राजा बरथू भी कहा जाता था।
राजा पृथु ने सौगन्ध खाई कि किसी भी सूरत में वो खिलजी को ब्रह्मपुत्र नदी पार कर तिब्बत की और नहीं जाने देंगे। उन्होंने व उनके आदिवासी योद्धाओं नें जहर बुझे तीरों, खुकरी, बरछी और छोटी, लेकिन घातक तलवारों से खिलजी की सेना को बुरी तरह से काट दिया। स्थिति से घबड़ाकर खिलजी अपने कई सैनिकों के साथ जंगल और पहाड़ों का फायदा उठाकर भागने लगा। लेकिन, असम वाले तो जन्मजात यौद्धा थे। और, आज भी दुनिया में उनसे बचकर कोई नहीं भाग सकता। उन्होंने, उन भगोड़ों खिलजियों को अपने पतले, लेकिन जहरीले तीरों से बींध डाला। अन्त में खिलजी महज अपने 100 सैनिकों को बचाकर जमीन पर घुटनों के बल बैठकर क्षमा याचना करने लगा।
राजा पृथु ने तब उसके सैनिकों को अपने पास बंदी बना लिया और खिलजी को अकेले को जिन्दा छोड़ दिया। उसे घोड़े पर लादा और कहा कि तूं वापस अफगानिस्तान लौट जा और रास्ते में जो भी मिले, उसे कहना कि तूने नालंदा को जलाया था, फिर तुझे राजा पृथु मिल गया। बस इतना ही कहना लोगों से। खिलजी रास्तेभर इतना बेइज्जत हुआ कि जब वो वापस अपने ठिकाने पंहुचा तो उसकी दास्तान सुनकर उसके ही भतीजे अली मर्दान ने ही उसका सिर काट दिया। लेकिन, कितनी दुखद बात है कि इस बख्तियार खिलजी के नाम पर बिहार में एक कस्बे का नाम बख्तियारपुर है और वहां रेलवे जंक्शन भी है। जबकि, हमारे राजा पृथु के नाम के शिलालेख को भी ढूंढना पड़ता है। लेकिन, जब अपने ही देश भारत का नाम भारत करने के लिए कोर्ट में याचिका लगानी पड़े तो समझा जा सकता है कि क्यों ऐसा होता होगा।