चीन, पाक तो छोड़ो भारत की मिसाइल की जद में अब साउथ कोरिया भी
Indian Missile
भारत
चेतना मंच
18 Apr 2025 12:12 AM
Indian Missile : भारत की रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) वर्तमान में के-5 (के-5) नामक एक नई सबमरीन-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल (एसएलबीएम) विकसित कर रही है, जो देश की परमाणु त्रिकोणीय क्षमता को मजबूत करेगी। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की न्यूक्लियर सबमरीन से लॉन्च की जाएगी और इसकी रेंज 5,000 से 6,000 किलोमीटर तक होगी।
के-5 मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं
- रेंज : 5,000 से 6,000 किलोमीटर, जो इसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) की श्रेणी में लाता है।
- पेलोड क्षमता : 2,000 किलोग्राम तक का न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम।
- प्रणोदन प्रणाली : तीन चरणों वाली ठोस ईंधन (सालिड फ्यूल) आधारित प्रणाली, जो इसे तेज और विश्वसनीय बनाती है।
- लॉन्च प्लेटफॉर्म : आईएनएस अरिहंत और भविष्य की एस 5-क्लास न्यूक्लियर सबमरीन से लॉन्च किया जाएगा।
- एमआईआरवी तकनीक : मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल्स (एमआईआरवी एस) से लैस, जो एक ही मिसाइल से कई लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता प्रदान करता है।
रणनीतिक महत्व
के-5 मिसाइल के विकास से भारत की समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे देश की परमाणु त्रिकोणीय क्षमता पूरी होगी। यह मिसाइल चीन, पाकिस्तान, जापान, कोरिया और यूरोप के कई हिस्सों तक पहुंचने में सक्षम होगी, जिससे भारत की रणनीतिक पहुंच में विस्तार होगा। इसके अलावा, एमआईआरवी तकनीक के माध्यम से यह मिसाइल एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला कर सकती है, जिससे दुश्मन के लिए जवाबी कार्रवाई करना कठिन हो जाएगा।
वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना
के-5 मिसाइल का विकास 2015 में शुरू हुआ था, और इसके पहले परीक्षण की तैयारी 2022 तक की गई थी। भविष्य में, डीआरडीओ के-6 जैसी और भी लंबी रेंज वाली मिसाइलों पर काम कर रहा है, जिसकी रेंज 8,000 से 12,000 किलोमीटर तक हो सकती है। के-5 मिसाइल का विकास भारत की आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश की सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा।