10 साल में भारत में 93,000 से अधिक स्कूल बंद, क्या बताते हैं सरकारी रिकॉर्ड

सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 93,000 स्कूलों को बंद कर दिया गया है, जो शिक्षा व्यवस्था की दिशा पर बड़ी चुनौतियाँ पैदा कर रहा है। यह जानकारी नीति मामलों पर लोकसभा में शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी द्वारा पेश किए गए डेटा में साझा की गई है।

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स्कूल बंद होने की प्रक्रिया
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar03 Feb 2026 02:37 PM
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School Closures : पिछले एक दशक में भारत में सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 93,000 स्कूलों को बंद कर दिया गया है, जो शिक्षा व्यवस्था की दिशा पर बड़ी चुनौतियाँ पैदा कर रहा है। यह जानकारी नीति मामलों पर लोकसभा में शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी द्वारा पेश किए गए डेटा में साझा की गई है। 

कब सबसे ज्यादा स्कूल बंद हुए?

डेटा बताता है कि 2014-15 से 2019-20 के बीच स्कूल बंद होने की प्रक्रिया सबसे अधिक तीव्र थी। इस छह साल की अवधि में लगभग 70,000 से अधिक स्कूलों को हटाया गया, जो कि पिछले दशक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इसके बाद 2020-21 से 2024-25 के बीच भी करीब 18,700 और स्कूलों का बंद होना जारी रहा।

किस राज्यों में सबसे ज्यादा प्रभाव?

सरकारी डेटा के अनुसार उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा स्कूल बंद हुए जिनकी संख्या करीब 24,590 है। इसके बाद मध्य प्रदेश है, जहाँ लगभग 22,438 स्कूल बंद कर दिए गए। इसके अलावा ओडिशा, झारखंड, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में भी सैकड़ों से हजारों स्कूलों में गिरावट दर्ज हुई है।

क्या स्कूलों का बंद होना चिंता का विषय है?

शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि स्कूलों का लगातार बंद होना अकेले एक संख्या नहीं है इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, सामुदायिक विकास और स्थानीय शिक्षा अवसरों पर होता है। खासकर उन इलाकों में जहाँ पहले से संसाधन कम हैं, वहाँ यह स्थिति और गंभीर दिखती है। 

आलोचना और प्रतिक्रिया

कुछ विद्वान और शिक्षा संगठन इस प्रवृत्ति को चिंताजनक मानते हैं और कहते हैं कि स्कूल बंद करना सिर्फ गणितीय आंकड़ा नहीं है इससे बच्चों की पहुँच, शिक्षा की गुणवत्ता और बराबरी के अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि कई ऐसे स्कूल थे जहाँ छात्रों की संख्या बेहद कम थी, और इनका विलय या बंद करना शिक्षा संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग सुनिश्चित करने की कोशिश थी। 

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NDA बैठक में पीएम मोदी का हमला, कहा— आलोचना करने वाले अब परिणाम देखें

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस ट्रेड डील से देश में सकारात्मक व्यापारिक माहौल बना है, जिसका सीधा लाभ भारतीय उद्योगों, निर्यातकों और रोजगार सृजन को मिलेगा। उन्होंने सांसदों से ‘मेक इन इंडिया’ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया।

India-US Trade Deal
वैश्विक मंच पर मजबूत हुआ भारत (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar03 Feb 2026 01:43 PM
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India-US Trade Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के साथ संपन्न हुई व्यापारिक समझौते को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए “नई सुबह” करार देते हुए कहा कि वैश्विक मंच पर भारत के प्रति भरोसा लगातार मजबूत हुआ है। मंगलवार को संसद परिसर में आयोजित एनडीए संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लगातार आलोचनाओं के बावजूद सरकार ने धैर्य बनाए रखा और आज उसी का सकारात्मक परिणाम देश के सामने है।

एनडीए सांसदों और कार्यकर्ताओं ने अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ घटाने और सफल ट्रेड डील को लेकर प्रधानमंत्री का जोरदार स्वागत और सम्मान किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने विपक्ष पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि जब हम इस दिशा में ईमानदारी से काम कर रहे थे, तब कुछ लोग लगातार हमारी आलोचना कर रहे थे, लेकिन हमने धैर्य रखा और आज उसका परिणाम सबके सामने है।

सात प्रमुख देशों का भारत पर भरोसा: किरेन रिजिजू

बैठक में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं है कि दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियां भारत के साथ व्यापारिक समझौते कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार अब तक यूरोपीय यूनियन, यूएई, मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, यूके, न्यूजीलैंड और अमेरिका सहित सात बड़े देशों और क्षेत्रों के साथ सफल ट्रेड डील कर चुकी है। रिजिजू ने कहा कि ये समझौते इस बात का प्रमाण हैं कि वैश्विक समुदाय को भारत की आर्थिक नीतियों और भविष्य की संभावनाओं पर पूरा भरोसा है।

मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ट्रेड डील के बाद देश में मैन्युफैक्चरिंग को नई गति देने की जरूरत है। उन्होंने भारतीय कंपनियों से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया, ताकि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पाद वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बन सकें। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी बाजार में अवसर बढ़े हैं, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

सांसदों को मिला ‘होमवर्क’

प्रधानमंत्री ने सांसदों को संसद की कार्यवाही में नियमित उपस्थिति और सक्रिय भागीदारी के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने बजट 2026 की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और ट्रेड डील से मिलने वाले लाभों तथा रोजगार के अवसरों के बारे में लोगों को जागरूक करने को कहा।प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार के विजन को जमीन पर उतारने में सांसदों की भूमिका सबसे अहम है। India-US Trade Deal

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जिंदगी और मौत एक छत के नीचे, जाने आगरा के गांव की दर्दनाक कहानी

आगरा छह पोखर गांव की सच्चाई ऐसी है, जहां जिंदगी और मौत एक ही छत के नीचे साथ रहती हैं। छह पोखर गांव आज भी इसी सवाल के साथ जी रहा है, जहां लोग जिंदगी भी अपने घरों में गुजारते हैं और मौत भी उसी घर में दफन हो जाती है।

Six Pokhar village in Agra
आगरा के छह पोखर गांव में अनोखी मजबूरी (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar03 Feb 2026 12:41 PM
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उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक ऐसा अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जिसे जानकर कोई भी हैरान रह जाएगा। यहां एक गांव ऐसा है, जहां जिंदगी और मौत एक ही छत के नीचे साथ रहती हैं। गांव के लगभग हर मुस्लिम परिवार के घर में किसी न किसी अपने की कब्र बनी हुई है। हम बात कर रहे हैं आगरा से करीब 30 किलोमीटर दूर किरावली तहसील के अछनेरा क्षेत्र में स्थित छह पोखर गांव की। बाहर से यह गांव किसी आम गांव जैसा ही नजर आता है, लेकिन जैसे ही इसकी गलियों में कदम रखते हैं, हकीकत भीतर तक झकझोर देती है।

कब्र के पास जलता है चूल्हा

बता दें कि गांव में रहने वाले करीब 15 मुस्लिम परिवारों के घरों में कब्रें बनी हैं। कहीं रसोई के पास तो कहीं आंगन में, कब्र के सामने ही चूल्हा जलता है और रोजमर्रा की जिंदगी चलती है। जहां बच्चे खेलते हैं, वहीं किसी मां, पिता या मासूम की आखिरी आरामगाह बनी हुई है।

मजबूरी बनी परंपरा

बता दें कि ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई धार्मिक परंपरा या रिवाज नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही मजबूरी है। गांव में मुस्लिम समुदाय के लिए कोई कब्रिस्तान नहीं है। अधिकांश लोग जमीन के मालिक नहीं हैं, ऐसे में जब किसी की मौत हो जाती है तो मजबूरन अपने ही घर में गड्ढा खोदकर शव को सुपुर्द-ए-खाक करना पड़ता है। एक ग्रामीण ने बताया कि उनके घर में पत्नी और मासूम बच्ची की कब्र है। बात करते समय उनकी आंखें भर आती हैं। उनका कहना है,जब दफनाने की कोई जगह ही नहीं थी, तो इंसान क्या करता?

कब्रों के बीच पलते बच्चे

बता दें कि गांव में बच्चे कब्रों के ऊपर खेलते नजर आते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी मौत की खामोश मौजूदगी के बीच चल रही है। रात के वक्त कई परिवारों को डर और खौफ के साए में रहना पड़ता है, लेकिन मजबूरी के आगे सब खामोश हैं।

2 गज जमीन का सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन गरीब मुस्लिम परिवारों को इंसान की आखिरी जरूरत 2 गज जमीन भी नसीब नहीं होगी? छह पोखर गांव आज भी इसी सवाल के साथ जी रहा है, जहां लोग जिंदगी भी अपने घरों में गुजारते हैं और मौत भी उसी घर में दफन हो जाती है।

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