Mahatma Gandhi Death anniversary- गाँधी जी के जीवन से हमने क्या सीखा, और क्या सीख सकते हैं?
भारत
चेतना मंच
30 Jan 2023 12:22 PM
Mahatma Gandhi Death anniversary- भारत के राष्ट्रपति गाँधी जी के बारे में तो बच्चा बच्चा जानता है। भारत को ब्रिटिश शासन जे आज़ाद कराने में गांधी जी ने बहुत ही अहम भूमिका निभाई थी। अंतिम सांस तक उन्होंने देशवासियों को एकता का पाठ पढ़ाया और सबको एक साथ करते करते ही वो शहीद हो गए। गांधी जी की हत्या 1948 में 30 जनवरी को गोली मारकर कर दी गई थी। आज उनकी पुण्यतिथि है। हर साल 30 जनवरी को उनकी पुण्यतिथि (Mahatma Gandhi Death anniversary) के रूप में मनाया जाता है। आज उनकी 75वीं पुण्यतिथि पर देश उन्हें श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है। लेकिन अभी भी बहुत से ऐसे लोग मौजूद हैं जो गांधी जी की देश के प्रति उनकी देशभक्ति को नजरअंदाज कर देते हैं और उनके इतने अहम योगदान देने के बाद भी उनकी आलोचना करने से पीछे नहीं हटते हैं। ऐसे में बहुत सी ऐसी महत्वपूर्ण बातें हैं गांधी जी के जीवन की, जिनसे हम सभी को काफी कुछ सीखना चाहिए।
आंख के बदले आंख, पूरी दुनिया को अंधा कर देगी-
गांधी जी ने अपने पूरे जीवन काल में अपनी आंखों से दो विश्व युद्ध देखे थे। इसके बाद वो इस नतीज़े पर पहुंचे थे कि, ‘आंख के बदले आंख, पूरी दुनिया को अंधा कर देगी’। उनकी यह बात सच भी साबित हुई थी। उस समय हो भी कुछ ऐसा ही रह था। उन्होंने विश्व युद्ध (World War) से यह जाना कि शांति का क्या महत्व है और नफ़रत का क्या दुष्प्रभाव होता है।
स्वच्छता हर व्यक्ति की निज़ी ज़िम्मेदारी है-
स्वच्छता की सीख तो हमें गांधी जी से सीखनी ही चाहिए। उन्होंने स्वच्छता को जगह जगह प्रोत्साहित किया। उनका मानना था कि हर व्यक्ति को अपने आसपास की जगह को स्वच्छ रखना ही चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि, ‘स्वच्छता हर व्यक्ति की निज़ी ज़िम्मेदारी है।’ उन्होंने लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए कई बार अपने ही हाथों में झाड़ू पकड़ ली थी और सफाई करनी शुरू कर दी थी। उनके अनुसार स्वच्छता को अपनी आदत बना लेना चाहिए। इसे इस तरह से अपने स्वभाव का हिस्सा बनाना ताकि इसकी हमें आदत लग जाए और सफाई करने से मन कभी न घबराए।
अगर क्षमा और विनम्रता है तो इंसान दुनिया को जीत सकता है-
दृढ़ता की भी सीख हमें गांधी (Mahatma Gandhi) जी के जीवन से मिलती है। इसकी तो वो एक बहुत बड़ी मिसाल है। उनका यह मानना था कि व्यक्ति को सदैव अपने लक्ष्य और विचारों के प्रति निष्ठा भाव रखना चाहिए और दृढ़ता कायम रखनी चाहिए। संकल्प को गांधी जी ने एक बहुत बड़ी शक्ति के रूप में माना है। गांधी जी के यह विचार तो हम कभी नहीं भूल सकते कि, ‘कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे, तो तुम दूसरा गाल आगे कर दो।’ इसी तरह से उनका यह भी कहना था कि अगर क्षमा और विनम्रता है तो इंसान दुनिया को जीत सकता है।
पाप से घृणा करो, पापी से नहीं, –
गांधी जी ने एक वाक्य कहा था कि, ‘पापी से नहीं, पाप से घृणा करो’। उनका यह वाक्य आज भी काफी ज्यादा प्रसिद्ध है। इतना ही नहीं उस वक़्त भले ही भारत देश अंग्रेजों का गुलाम था, लेकिन गांधी जी कभी घृणा किसी से भी नहीं की। यही कारण था कि कई अंग्रेजी शासक गांधी जी के मित्र हुआ करते थे। गांधी जी का तो ऐसा व्यवहार था कि वो जहां भी जाते थे वहां लोगों से मित्रता बना ही लेते हैं
गांधी जी (Mahatma Gandhi) से मिली है हमें निष्ठा की सीख-
निष्ठा की सीख भी हमें गांधी जी से मिलती थी। उनका हमेशा से ही यह मानना था कि हमें किसी भी चीज़ को कहने से पहले उसको खुद पर अमल करना चाहिए’। इससे जुड़ा एक रोचक किस्सा भी है जो काफी मशहूर है। एक बार कोई महिला उनके पास अपने बच्चों की शिकायत लेकर आई। उसने गांधी जी से कहा कि उसके बच्चे गुड़ बहुत खाते हैं। तब गांधी जी ने उस महिला से एक महीने बाद अपने बच्चों को लाने के लिए कहा। फिर महिला बच्चों को लेकर उनके सामने प्रकट हुई। तब गांधी जी ने बच्चों से कहा कि बेटा गुड़ खाना अच्छी बात है, लेकिन एक सीमा में रहकर। तब महिला ने बोला कि आप पहले भी ऐसा कर सकते थे। तो गांधी जी ने उसे बताया कि पहले मैंने गुड़ खाना कम किया। इसका यह मतलब हुआ कि मैंने पहले बात खुद पर अमल की बाद में दूसरों से कही।
अहिंसा का पाठ गांधी जी से ही पढ़ा है हमने –
गांधी (Mahatma Gandhi) जी ने अहिंसा का क्या महत्व बताया है, यह तो हम सभी जानते हैं। उनकी अहिंसा की भावना विदेशों में भी काफी मशहूर है। कई बार उन्होंने शांति और हिंसा के बीच का अंतर लोगों को समझाया है। हमेशा उन्होंने अहिंसा को प्रेम के रूप में बताया है। उनका यह मानना था कि जो अहिंसा है वो प्रेम का ही एक पर्यायवाची है।