राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने फ्रांस में ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता व्यवस्था में बदलाव का जिक्र करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उनके बयान के बीच भारत में सत्ता परिवर्तन, राजनीतिक विरोध और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर बहस चर्चा में है।

National News : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने दशहरा कार्यक्रम में देश की एकता और सामाजिक एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि जब-जब हम बंटे हैं, तब-तब कमजोर हुए हैं। फ्रांस में ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता व्यवस्था में बदलाव का जिक्र करते हुए उनके बयान ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और देश की स्थिरता से जुड़ी बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। मोहन भागवत का संदेश ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत में भी ‘रिजीम चेंज’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। सत्ता परिवर्तन, विरोध-प्रदर्शन और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दलों के बीच चल रही बहस के बीच संघ प्रमुख की टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। National News
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मोहन भागवत के संदेश का प्रमुख केंद्र देश की एकता है। भारत जैसे विविधताओं वाले देश में सामाजिक एकजुटता को राष्ट्रीय शक्ति का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। भाषा, जाति, क्षेत्र और विभिन्न सामाजिक पहचानों के बावजूद देश की एकता बनाए रखना भारत की स्थिरता और विकास के लिए जरूरी है। उनके कथन ‘हम जब भी बंटे, कमजोर हुए’ का व्यापक अर्थ यही है कि आंतरिक विभाजन किसी भी समाज की सामूहिक शक्ति को प्रभावित कर सकता है। देश की चुनौतियों का सामना करने के लिए नागरिकों के बीच विश्वास, सहयोग और साझा राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना आवश्यक है। National News
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‘रिजीम चेंज’ अंग्रेजी का शब्द है, जिसका सामान्य अर्थ किसी देश की सत्ता या शासन व्यवस्था में बदलाव होता है। यह बदलाव अलग-अलग परिस्थितियों में चुनावों, राजनीतिक आंदोलनों या अन्य घटनाक्रमों के माध्यम से हो सकता है। भारत में सरकार बदलने का संवैधानिक और लोकतांत्रिक रास्ता चुनाव है। हाल के दिनों में भारत में इस विषय पर राजनीतिक बहस तेज हुई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 18 अक्टूबर 2026 को बांग्लादेश और फ्रांस में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए भारत में कथित तौर पर अशांति फैलाने की साजिश का आरोप लगाया था। विपक्षी नेताओं ने इन तुलनाओं पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका जोर शांतिपूर्ण विरोध और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों पर है। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि में फ्रांस में ‘रिजीम चेंज’ का संदर्भ राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, किसी भी कथित साजिश या आरोप को प्रमाणित तथ्य मानने से पहले उसके समर्थन में उपलब्ध साक्ष्यों को देखना जरूरी है।National News
भारत की ताकत उसकी विविधता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में निहित है। देश में अलग-अलग विचारधाराओं, राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों का होना स्वाभाविक है। लोकतंत्र में असहमति और शांतिपूर्ण विरोध भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। लेकिन राजनीतिक मतभेदों के बीच सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर संवाद, संवैधानिक संस्थाओं में विश्वास और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाता है। मोहन भागवत के कथन को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है कि देश की सामूहिक शक्ति को कमजोर करने वाले विभाजनों से बचना चाहिए और राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता देनी चाहिए। National News
भारत के सामने आर्थिक विकास, रोजगार, सामाजिक समरसता, आंतरिक सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करने जैसी अनेक चुनौतियां हैं। इन लक्ष्यों को हासिल करने में राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा भी महत्वपूर्ण है। देश की एकता का अर्थ विचारों की एकरूपता नहीं, बल्कि विभिन्न विचारों के बावजूद संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता है। किसी भी लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती इस बात से तय होती है कि वह असहमति को किस प्रकार संभालता है और नागरिकों के बीच विश्वास को कितना कायम रख पाता है। मोहन भागवत के बयान के बहाने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक एकजुटता का मुद्दा फिर चर्चा में है। उनका संदेश इस बात पर जोर देता है कि देश की सामूहिक शक्ति को बनाए रखना आवश्यक है। वहीं, ‘रिजीम चेंज’ से जुड़ी मौजूदा बहस में विभिन्न पक्षों के दावों और तर्कों को तथ्यों तथा संवैधानिक मूल्यों के आधार पर समझना भी जरूरी है। National News
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