
डॉ. इलियासी (Dr. Ilyasi) ने केवल आतंकियों के जनाजे में नमाज पढ़ने पर रोक नहीं लगाई, बल्कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों से यह भी अपील की है कि वे अपने नाम से “इस्लामिक पहचान” हटा लें। उन्होंने कहा कि इन संगठनों के नाम में 'मोहम्मद' या 'इस्लाम' जैसे शब्दों का प्रयोग एक धार्मिक अपमान है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय इमाम ने इस तरह का वैश्विक फतवा जारी कर पाकिस्तानी संगठनों को भी निशाने पर लिया हो। फतवे की प्रति पाकिस्तान के वरिष्ठ मुफ्ती तकी उस्मानी को भी भेजी गई है।
डॉ. इलियासी (Dr. Ilyasi) इससे पहले भी सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रख चुके हैं। उन्होंने “लव जिहाद” जैसे शब्दों को 'नापाक' बताते हुए कहा कि ऐसी शादियों से समाज में अशांति फैलती है, और इस्लाम इसकी इजाज़त नहीं देता। साथ ही, उन्होंने बलूचिस्तान की आजादी की मांग का समर्थन करते हुए पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बलूच लोगों पर पाकिस्तान की ओर से अन्याय हो रहा है और अब समय आ गया है कि वे भी आजादी की सांस लें। उन्होंने दो टूक कहा — “मुस्लिम समाज भारत की नीति और डिप्लोमेसी के साथ खड़ा है।”
डॉ. इलियासी (Dr. Ilyasi) का यह फतवा आतंकवाद के खिलाफ धर्म के स्तर पर छेड़ी गई जंग की शुरुआत है। भारत से निकली यह आवाज अब सीमाएं लांघ रही है और कट्टरपंथ के खिलाफ एक वैश्विक अभियान का रूप ले सकती है। अब देखना ये है कि क्या पाकिस्तान और बाकी इस्लामिक देश इस फतवे को गंभीरता से लेते हैं या इसे नज़रअंदाज़ करते हैं। Dr. Ilyasi :