
Noida Farmers : उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर (Noida) के किसानों की बल्ले बल्ले होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उनके पक्ष में एक फैसला सुनाया है। इस फैसले के आने के बाद ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण (Noida Authority) को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देना होगा। यदि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार नोएडा विकास प्राधिकरण इस रकम का किसानों का भुगतान करता है तो गौतमबुद्ध नगर के 225 किसानों की बल्ले बल्ले हो जाएगी।
आपको बता दें कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट से जुड़े विवाद को लेकर साल 2011 में पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने किसानों (Noida Farmers) के पक्ष में यह फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट की संवैधानिक बेंच ने फैसला सुनाया था कि किसानों को पूर्व में जिस दर पर मुआवजे का भुगतान किया गया है, उस पर 64.7% अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए। साथ ही आबादी के लिए दिए जाने वाले 5% या 6% भूखंडों का क्षेत्रफल बढ़ाकर 10% किया जाए। बाद में इस मामले को लेकर तमाम तर्क और वितर्क होते रहे। स्थिति साफ करने के लिए 225 किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर गुरुवार को यह फैसला सुनाया गया है।
Indian Rupees: लगातार गिरावट के बाद निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, अमेरिकी डाॅलर ने बनाई बढ़तइलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण से जुड़े मामले में 64.7% अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया था। बाद में यह फैसला नोएडा अथॉरिटी और यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने भी मान लिया था। लेकिन बाद में किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने से इनकार कर दिया। इससे क्षुब्ध होकर करीब 225 किसानों (Noida Farmers) ने यमुना अथॉरिटी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लंबी सुनवाई के बाद 26 अप्रैल 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुरक्षित कर लिया था। आज अदालत ने फैसला सुनाया है। जिसमें अदालत ने साफतौर पर प्राधिकरण को आदेश दिया है कि सभी किसानों को 64.7% अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए। किसी किसान को बढ़े लाभ देना और किसी को नहीं देना, गलत है। यह व्यवस्था सभी के लिए बराबर लागू होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के खिलाफ हाईकोर्ट ने गजराज आदि बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले की सुनवाई करते हुए व्यवस्था दी थी। जनहित को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्णय लिया था। जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट तक मान्यता दी गई है। ऐसे में जनहित और किसानों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए यह फैसला उचित है।
गुरुवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की एक और खासियत है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के साथ-साथ यमुना अथॉरिटी को भी बड़ी राहत दे दी है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि प्राधिकरण किसानों से जो जमीन अधिग्रहित की है, उसके लिए 64.7% अतिरिक्त मुआवजा देना होगा। इस धनराशि की वसूली अपने आवंटियों से प्राधिकरण करेगा। मतलब, जिन्हें इस जमीन पर भूखंडों का आवंटन किया गया है। साफ है कि यमुना अथॉरिटी अपने आवंटियों से 64.7% अतिरिक्त पैसा लेकर किसानों को देगा। इससे यमुना अथॉरिटी पर कोई अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, इस बढ़ोतरी का आर्थिक दबाव यमुना प्राधिकरण के आवंटियों को उठाना होगा।