Noida Latest News Live : जैविक खेती ने बनाया मालामाल, अब किसानी के लिए खरीद रहे हेलीकॉप्टर
Organic farming has created wealth, now buying helicopters for farming
भारत
चेतना मंच
28 Nov 2025 08:45 AM
नोएडा/जगदलपुर। अनूठे संकल्प और प्रयोग ने साधारण से किसान को फर्श से अर्श पर ला दिया। आज वह दुनिया के कई देशों में पहचान के मोहताज नहीं हैं। विदेशों की तर्ज पर अब वह खेतों में दवाओं के छिड़काव के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करने जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के किसान डा. राजाराम त्रिपाठी सात करोड़ रुपये में हेलीकाप्टर का सौदा कर चुके हैं। हालैंड की राबिंसन कंपनी आर-44 मॉडल का फोर सीटर हेलीकाप्टर उन्हें चार साल में उपलब्ध कराएगी। उस हेलीकॉप्टर को खेती-किसानी के लिहाज से विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है। नोएडा निवासी कृषि वैज्ञानिक चौधरी जगपाल सिंह का भी दावा है कि जैविक खेती से किसान मालामाल हो सकते हैं। गौतमबुद्ध नगर जिले में भी कई किसान इस तरह के सफल प्रयोग कर रहे हैं।
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400 आदिवासी परिवार कर रहे सामूहिक खेती
वर्तमान में 25 करोड़ रुपये वार्षिक टर्न ओवर वाले मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के सीईओ डॉ. राजाराम त्रिपाठी के साथ 400 आदिवासी परिवार एक हजार एकड़ में सामूहिक खेती कर रहे हैं। यह समूह यूरोपीय और अमेरिकी देशों में काली मिर्च का निर्यात कर रहा है। कोंडागांव के रहने वाले राजाराम त्रिपाठी सफेद मूसली और जैविक खेती के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने आस्ट्रेलियन टीक के साथ काली मिर्च की खेती के लिए प्राकृतिक ग्रीन हाउस तकनीक भी विकसित की है। इसमें एक से डेढ़ लाख रुपये की लागत में 40 वर्षों तक प्रति एकड़ करोड़ों रुपये की आय की जा सकती है।
शिक्षित युवाओं को खेती के लिए कर रहे प्रेरित
कृषि परिषद की ओर से वह तीन बार देश के सर्वश्रेष्ठ किसान व राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से एक बार सर्वश्रेष्ठ निर्यातक सम्मान से पुरस्कृत हो चुके हैं। राजाराम कहते हैं कि गरीब और बदहाल किसान की छवि युवाओं को खेती-किसानी के लिए प्रेरित नहीं कर सकती। नई पीढ़ी के युवा आईटी कंपनी में नौकरी कर सकते हैं, पर वे खेती को उद्यम बनाने का प्रयास नहीं करते। इसी सोच को बदलने के लिए वह हेलीकाप्टर खरीद रहे हैं, ताकि युवा पीढ़ी में खेती-किसानी को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो। वह उज्जैन स्थित उड्डयन अकादमी से हेलीकाप्टर उड़ाने का प्रशिक्षण भी लेने जा रहे हैं।
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हेलीकॉप्टर से करेंगे दवा का छिड़काव
राजाराम ने बताया कि इंग्लैंड और जर्मनी प्रवास के दौरान उन्होंने देखा कि वहां दवा व खाद के छिड़काव में हेलीकाप्टर का उपयोग हो रहा है। अपने समूह के एक हजार एकड़ के साथ आसपास के खेती प्रधान वाले जिलों में वे हेलीकाप्टर का उपयोग करना चाहते हैं। इसके लिए वह कस्टमाइज हेलीकाप्टर बनवा रहे हैं, ताकि मशीन भी लगवाई जा सके।
70 साल पहले यूपी छोड़कर चले गए थे छत्तीसगढ़
डा. राजाराम त्रिपाठी का परिवार मूलरूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ बेल्हा के पास स्थित गांव धर्मपुर पट्टी का रहने वाला है। परिवार 70 वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ (तब मध्य प्रदेश) चला गया था। डा. त्रिपाठी का ननिहाल यूपी के सुलतानपुर के गांव मिश्रौली (गोसाईंगंज के निकट) में है। डा. त्रिपाठी ने बताया कि वह वर्ष में दो बार प्रतापगढ़ आते हैं, उसी दौरान ननिहाल भी अवश्य जाते हैं।
नौकरी छोड़कर साल 1996 में शुरू की थी खेती
डॉ. राजाराम के पिता जगदीश प्रसाद शिक्षक थे। जगदलपुर कालेज से पढ़ाई के बाद वह स्टेट बैंक आफ इंडिया में प्रोबेशनरी अधिकारी (पीओ) बनकर व कोंडागांव चले गए। 1996 में पांच वे एकड़ से सब्जी की खेती शुरू करने के बाद मूसली और अश्वगंधा की खेती की। इसके बाद उन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ दी। 2002 में सफेद मूसली के दाम गिरे तो दिवालिया होने की स्थिति आ गई, पर उन्होंने हार नहीं मानी। अब वह देश ही नहीं, दुनियाभर में जैविक खेती के लिए
नोएडा में भी कई किसान अपना रहे ये तकनीक
नोएडा में रहने वाले कृषि वैज्ञानिक चौधरी जगपाल सिंह ने भी दावा किया कि जैविक खेती मौजूदा समय की जरूरत है। इससे न सिर्फ जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहती है, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी होती है। उन्होंने बताया कि जैविक खेती से उत्पादित अनाज, फल और मसालों की देश ही नहीं विदेशों में अच्छी खासी मांग है। उसका मूल्य भी अधिक मिलता है। इस तकनीक को अपना कर किसान मालामाल हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि गौतमबुद्ध नगर में भी कई किसान इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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