Patna High Court: बिहार में जातीय जनगणना का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने दिखाई हरी झंडी
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 12:54 AM
सुप्रिया श्रीवास्तव, 1 अगस्त, बिहार
Patna High Court: बिहार राज्य से जातीय जनगणना को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को जातीय जनगणना मामले में बड़ा फैसला देते हुए सरकार द्वारा जातीय जनगणना को चुनौती देने वाले सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
गौरतलब है पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) में नीतीश सरकार के जातिगत जनगणना कराने के फैसले के खिलाफ 6 याचिकाएं दाखिल की गई थी। कोर्ट में दाखिल की गई याचिकाओं में जातिगत जनगणना पर रोक लगाने की मांग यह कहते हुए की गई थी कि, सरकारी योजनाओं का फायदा लेने के लिए सभी अपनी जाति बताने को आतुर रहते हैं। अतः जातिगत जनगणना को खत्म किया जाए। पटना हाईकोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुनाते हुए सरकार की तरफ से दाखिल की गई याचिकाओं को खारिज करते हुए, जातिगत जनगणना को जारी रखने का फैसला दिया है।
Patna High Court on Bihar Caste Census:
जातीय जनगणना मामले में मंगलवार को पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति मधुरेश प्रसाद की पीठ ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए, सरकार द्वारा दाखिल की गई सभी याचिकाओं को खारिज किया और जातिगत जनगणना को जारी रखने का फैसला दिया।
बता दें कि जाति आधारित जनगणना प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए पांच अलग-अलग याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी, जिसपर कोर्ट में कई दिनों तक सुनवाई की गई और सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर 1 अगस्त 2023 को सुनवाई होनी तय हुई थी। आज पूरे 25 दिन बाद कोर्ट की पहली पाली में इस मामले में सुनवाई हुई।
अधिवक्ता पीके शाही ने अपने दलील में कही ये बातें -
राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता पीके शाही ने आज सुनवाई के आखिरी दिन कोर्ट के सामने अपनी दलील रखी कि जनगणना एक सर्वेक्षण है, जिसका मकसद आम नागरिकों के बारे में सामाजिक अध्ययन के लिए आंकड़े एकत्रित करना है और इसका उपयोग आम लोगों के कल्याण और हितों के लिए किया जाएगा।
आगे अधिवक्ता ने कोर्ट से कहा कि जाति संबंधी सूचना शिक्षण संस्थानों में प्रवेश या नौकरियों के लिए आवेदन या नियुक्ति के समय भी दी जाती है। जातियां समाज का हिस्सा है। हर धर्म में अलग-अलग जातियां होती हैं। इस सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की कोई जानकारी अनिवार्य रूप से देने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जा रहा है यह स्वैच्छिक सर्वेक्षण वाली जनगणना है, जिसका लगभग 80 फ़ीसदी कार्य पूरा हो गया है। ऐसा सर्वेक्षण राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। सर्वेक्षण में किसी की निजता का उल्लंघन नहीं हो रहा। बहुत सी सूचनाएं पहले से ही सार्वजनिक होती हैं।
पटना हाई कोर्ट के जातीय जनगणना से संबंधित इस फैसले को लेकर आपकी क्या राय है, कमेंट सेक्शन में हमें जरूर बताएं।