देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर विवाद ने स्वतंत्र भारद्वाज की बढ़ाई मुश्किलें, वायरल वीडियो के बाद पुलिस हिरासत और SC/ST एक्ट के साथ POCSO FIR ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

National news : जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट के मामले में चर्चा में आया स्वतंत्र भारद्वाज अपने आपको भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छोटा भाई बताता है। भारत समाचार नामक न्यूज चैनल के संवाददाता से बात करते हुए शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस छोटे भाई ने दावा किया था कि उसके ऊपर बड़े भाई का सीधा आशीर्वाद है इस कारण उसका कुछ नहीं बिगाड़ा जा सकता। भारत समाचार के संवाददाता से बात करने के कुछ देर बाद ही पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार करके उसके सही स्थान यानी जेल भेज दिया है। इस बीच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पिछले कुछ दिनों में वायरल हुए एक पॉडकास्ट वीडियो ने कई महीने पुराने इस विवाद को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया। वीडियो में भारद्वाज द्वारा संजय कुमार के सिर पर वार करने का दावा किए जाने के बाद दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे और मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया। National news
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यह मामला मूल रूप से 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, CJP के प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट हुई थी। बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित पॉडकास्ट क्लिप में स्वतंत्र भारद्वाज ने कथित तौर पर यह दावा किया कि उन्होंने संजय कुमार के सिर पर वार किया था। इसी वीडियो के वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई। राजनीतिक संरक्षण मिलने संबंधी भारद्वाज के कथित दावों ने विवाद को और बढ़ा दिया। हालांकि दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक दबाव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मामले में पहले से कानूनी कार्रवाई की जा रही थी और चोट की प्रकृति को लेकर भी पुलिस का पक्ष अलग रहा है। National news
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मामला दोबारा गरमाने के बाद CJP से जुड़े लोगों ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने पर प्रदर्शन किया और स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग की। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया और 72 घंटे के भीतर गिरफ्तारी की बात कही गई। इसके बाद 4 सितंबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया। इस कार्रवाई की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर एक बार फिर उनके समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। National news
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई के विरुद्ध दर्ज मुकदमें में बढ़ाई गई SC/ST एक्ट की धाराएंमामले में एक और बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब दिल्ली पुलिस ने पुरानी FIR में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं जोड़ीं। रिपोर्टों में इसका कारण पीड़ित परिवार से संबंधित जातिगत पहलू बताया गया है। इस कार्रवाई के बाद विवाद केवल जंतर-मंतर पर हुई कथित मारपीट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पुलिस कार्रवाई, सामाजिक न्याय और कानून के समान अनुप्रयोग को लेकर राजनीतिक बहस का विषय बन गया। 5 सितंबर को मामले में एक और महत्वपूर्ण मोड़ आया। दिल्ली पुलिस ने POCSO अधिनियम के तहत नई FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्रवाई इसलिए सामने आई क्योंकि मामले से संबंधित लड़की नाबालिग है और उसकी ओर से अलग शिकायत की गई है। यानी स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ अब मामला एक से अधिक कानूनी पहलुओं में जांच के दायरे में आ गया है। हालांकि किसी भी व्यक्ति पर दर्ज FIR अथवा लगाए गए आरोप को न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने तक अंतिम अपराध साबित नहीं माना जा सकता। वायरल पॉडकास्ट क्लिप को लेकर विवाद बढ़ने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने बचाव में अलग पक्ष रखा। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर उन्हें भीड़ ने घेर लिया था और स्थिति मॉब लिंचिंग जैसी हो सकती थी। उनके अनुसार, उन्होंने आत्मरक्षा में हाथ चलाया और हाथ में पहने कड़े से संजय कुमार को चोट लगी। उन्होंने यह भी कहा कि वे जांच में सहयोग कर रहे थे। यही विरोधाभास अब इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन गया है एक ओर वायरल वीडियो में कही गई बातें हैं, जबकि दूसरी ओर स्वतंत्र भारद्वाज की बाद की सफाई है। इन दोनों पहलुओं की वास्तविक कानूनी स्थिति जांच और अदालत की प्रक्रिया में ही स्पष्ट होगी। National News
चंद्रशेखर आजाद और अन्य नेताओं के हस्तक्षेप से बढ़ा राजनीतिक दबावप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई के इस मामले में सांसद चंद्रशेखर आजाद समेत कई राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने निशु आजाद के समर्थन में आवाज उठाई। चंद्रशेखर ने पुलिस रिकॉर्ड और स्वतंत्र भारद्वाज के सार्वजनिक बयानों के बीच कथित अंतर को लेकर सवाल उठाए। वहीं, निशु आजाद के समर्थन में राजनीतिक हस्तियों के सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया से निकलकर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया। दूसरी ओर स्वतंत्र भारद्वाज के हिरासत में लिए जाने के बाद उनके समर्थन में भी कुछ संगठनों के लोग सामने आए और SC/St एक्ट के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। स्वतंत्र भारद्वाज प्रकरण ने सोशल मीडिया को भी दो हिस्सों में बांट दिया है। एक पक्ष वायरल वीडियो और कथित मारपीट के आधार पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष भारद्वाज की आत्मरक्षा वाली दलील और मामले में लगाए गए कानूनों पर सवाल उठा रहा है। मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही क्लिप और पोस्टों को पूर्ण घटनाक्रम का अंतिम प्रमाण मानने के बजाय पुलिस रिकॉर्ड, CCTV वीडियो फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट, शिकायतों और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिए जाने, SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़े जाने और POCSO act के तहत नई FIR सामने आने के बाद अब निगाहें दिल्ली पुलिस की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिक गईगा। National News
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