प्रशांत किशोर ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया है। बिहार में जन-सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर अचानक सीधे-सीधे चुनावी मैदान में उतर पड़े हैं। बिहार की जिस सीट से प्रशांत किशोर ने उप चुनाव लड़ने की घोषणा की है वह विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का गढ़ है।

Prashant Kishore : राजनीतिक रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया है। बिहार में जन-सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर अचानक सीधे-सीधे चुनावी मैदान में उतर पड़े हैं। बिहार की जिस सीट से प्रशांत किशोर ने उप चुनाव लड़न की घोषणा की है वह विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का गढ़ है। भाजपा के गढ़ में उप-चुनाव लड़ने की घोषणा करके प्रशांत किशोर ने देश भर के नागरिकों को चौंका दिया है। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर प्रशांत किशोर का चुनाव लडऩा किसी अग्रि परीक्षा से कम नहीं है।Prashant Kishore
यह भी पढ़े :अहमदाबाद ब्लास्ट केस में 38 दोषियों की फांसी बरकरार, अरशद मदनी बोले- सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उप-चुनाव में प्रशांत किशोर का चुनाव मैदान में उतरना राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका रहा है। वरिष्ठ पत्रकार तथा राजनीतिक विश्लेषक सर्वेश कुमार सिंह का कहना है कि प्रशांत किशोर ने विधानसभा का चुनाव लडऩे का फैसला करके बड़ा दांव खेला है। इस चुनाव में प्रशांत किशोर जीत गए तो वें केवल बिहार में ही नहीं देश भर में राजनीतिक हीरो बन जाएंगे। सर्वेश कुमार सिंह ने जोर देकर कहा कि यह बात भी पूरी तरह से सही है कि उप चुनाव में हारने के बाद प्रशांत किशोर राजनीति में पूरी तरह से जीरो साबित हो जाएंगे। चुनाव हारने के बाद यह साफ हो जाएगा कि दूसरों को चुनाव जिताने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर राजनीति के बेहद अनाड़ी खिलाड़ी हैं। Prashant Kishore
इसे भी पढ़े : चार बच्चों की मां संग शादीशुदा भतीजे के प्रेम प्रपंच से मचा हंगामा,पंचायत के सामने भरी मांग
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कभी चुनावी रणनीतिकार के रूप में पूरे देश की राजनीति की दिशा बदलने वाले प्रशांत किशोर अब अपने राजनीतिक भविष्य की सबसे बड़ी परीक्षा से गुजर रहे हैं। बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव उनके लिए केवल एक विधानसभा चुनाव नहीं, बल्कि उनकी पार्टी जन सुराज और उनकी व्यक्तिगत साख का इम्तिहान बन गया है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज के अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर 2026 में प्रशांत किशोर भाजपा के मजबूत गढ़ बांकीपुर से जीत का दावा किस आधार पर कर रहे हैं? प्रशांत किशोर ने साफ कर दिया है कि उन्होंने आसान सीट चुनने के बजाय जानबूझकर बांकीपुर जैसी कठिन सीट को चुना है। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विधायक बनना नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति को जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठाने का संदेश देना है। Prashant Kishore
बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले कई दशकों से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। यहां शहरी मतदाता, व्यापारी वर्ग और मध्यम वर्ग की संख्या अधिक है। भाजपा इस सीट को प्रतिष्ठा की लड़ाई मान रही है और उसने इसे बचाने के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं को चुनाव प्रचार में उतार दिया है। पार्टी ने अभिषेक कुमार को उम्मीदवार बनाया है और बड़े स्तर पर चुनावी रणनीति तैयार की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर किसी आसान सीट से चुनाव लड़ते तो जीतने के बावजूद वह संदेश नहीं जाता, जो बांकीपुर से लडक़र जा सकता है। यदि भाजपा के सबसे मजबूत किले में वे अच्छा प्रदर्शन भी कर देते हैं तो जन सुराज को बिहार की राजनीति में नई पहचान मिल सकती है। प्रशांत किशोर का तर्क है कि राजनीति केवल सुरक्षित सीट खोजने का नाम नहीं है। यदि बदलाव लाना है तो सबसे मजबूत राजनीतिक ढांचे को चुनौती देना जरूरी है। Prashant Kishore
2025 के विधानसभा चुनाव में जन सुराज का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। पार्टी के अधिकांश उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे। विरोधी दल लगातार इसी मुद्दे को उठाकर प्रशांत किशोर पर हमला कर रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि जनता पहले ही जन सुराज को नकार चुकी है और बांकीपुर में भी वही परिणाम दोहराया जाएगा। 2025 के चुनाव के बाद प्रशांत किशोर लगातार बिहार में जन संवाद, पदयात्रा और संगठन विस्तार में जुटे रहे। उन्होंने गांव-गांव जाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का प्रयास किया। जन सुराज का दावा है कि पिछले एक वर्ष में पार्टी का संगठन पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है और इस बार चुनावी तस्वीर अलग होगी। Prashant Kishore
इस चुनाव ने पूरे बिहार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ भाजपा अपने परंपरागत गढ़ को बचाने में जुटी है, तो दूसरी तरफ प्रशांत किशोर अपनी पहली चुनावी जीत दर्ज करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह उपचुनाव केवल एक सीट का नहीं बल्कि बिहार की भविष्य की राजनीति का संकेत भी देगा। राजनीतिक गलियारों में प्रशांत किशोर के चुनाव को 2014 के 'वाराणसी मॉडल' से भी जोडक़र देखा जा रहा है। उस समय भी मुकाबला केवल जीत-हार का नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश का था। अब बांकीपुर में भी चर्चा यही है कि प्रशांत किशोर जीत हासिल करेंगे या फिर केवल बड़ा राजनीतिक नैरेटिव बनाने में सफल होंगे। Prashant Kishore
यह चुनाव प्रशांत किशोर के लिए 'करो या मरो' जैसा माना जा रहा है। यदि वे भाजपा के मजबूत गढ़ में जीत दर्ज करते हैं तो जन सुराज बिहार की राजनीति में बड़ी ताकत बन सकती है। लेकिन यदि हार मिलती है तो विरोधियों को यह कहने का बड़ा मौका मिलेगा कि चुनावी रणनीति बनाने वाला नेता खुद चुनाव जीतने में असफल रहा। आपको बता दें कि बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा तथा 3 अगस्त 2026 को इस सीट के नतीजों की घोषणा कर दी जाएगी। इस घोषणा के साथ ही यह तय हो जाएगा कि प्रशांत किशोर वास्तव में राजनीति के हीरो हैं अथवा जीरो। Prashant Kishore
े
विज्ञापन