नाबालिग छात्रा को सामूहिक दुष्कर्म के बाद कुएं में फेंका, हुई मौत

सारण जिले के डेरनी थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

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सामूहिक दुष्कर्म
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar13 Mar 2026 04:03 PM
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Gang Rape : बिहार के सारण जिले के डेरनी थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि कुछ युवकों ने पहले छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और बाद में उसे कुएं में फेंक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है, जबकि पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

छात्रा को पकड़कर जबरन ले जाने का आरोप

परिवार के लोगों के मुताबिक घटना बुधवार देर शाम की है। बताया जा रहा है कि छात्रा अपने घर के आसपास थी, तभी कुछ युवकों ने उसे पकड़ लिया। परिजनों का आरोप है कि आरोपी उसे जबरन एक सुनसान जगह पर ले गए और वहां उसके साथ गलत काम किया। 

घटना के बाद छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई। आरोप है कि अपनी करतूत छिपाने के लिए आरोपियों ने उसे पास के एक कुएं में फेंक दिया।

कुएं में पानी होने से नहीं बच सकी जान

स्थानीय लोगों के अनुसार जिस कुएं में छात्रा को फेंका गया, उसमें पर्याप्त पानी भरा हुआ था। घायल अवस्था में कुएं में गिरने के कारण वह बाहर नहीं निकल सकी और उसकी मौत हो गई। बाद में जब आसपास के लोगों को इस घटना की जानकारी मिली तो गांव में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। परिजनों के मुताबिक छात्रा अपनी मां और दो बहनों के साथ गांव में रहती थी। उसके पिता काम के सिलसिले में दूसरे राज्य में रहते हैं और घर पर कम ही आ पाते हैं। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया। मां और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी इस दर्दनाक घटना से बेहद दुखी और आक्रोशित दिखाई दे रहे हैं। इस घटना के बाद लोगों में गुस्सा है और उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।

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भारत में नहीं होगा तेल तथा गैस का संकट, अफवाहों में दम नहीं

भारत में तेल तथा गैस का कोई संकट नहीं है। भारत सरकार की दूरदर्शी नीति के कारण भारत में तेल तथा गैस का संकट कभी भी नहीं होगा। भारत में तेल तथा गैस का संकट पैदा होने की तमाम खबरें केवल अफवाहें हैं।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह मजबूत
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह मजबूत
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar13 Mar 2026 01:50 PM
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India oil and gas crisis : भारत में तेल तथा गैस का कोई संकट नहीं है। भारत सरकार की दूरदर्शी नीति के कारण भारत में तेल तथा गैस का संकट कभी भी नहीं होगा। भारत में तेल तथा गैस का संकट पैदा होने की तमाम खबरें केवल अफवाहें हैं। भारत सरकार ने घोषणा की है कि तेल तथा गैस के संकट को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर बिल्कुल भी ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है। भारत ने अपनी जरूरत का भरपूर तेल खास प्रकार की गुफाओं में सुरक्षित रखा हुआ है। 

गुफाओं में भरा पड़ा है भारत के लिए भरपूर तेल

आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि भारत में बनाई गई खास प्रकार की गुफाओं में भारत की जरूरत भर का तेल सुरक्षित है। ऊपर से भारत के सबसे पुराने मित्र देश रूस ने वायदा किया है कि भारत में तेल तथा गैस की कमी पैदा नहीं होने दी जाएगी। भारत सरकार ने दूरदर्शी रणनीति के तहत ‘सीक्रेट ऑयल केव्स’ बना रखी है। आपको बता दें कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में भूमिगत तेल भंडारण गुफाएं (Underground Oil Storage Caverns) बनाईं और तेल आयात के स्रोतों को व्यापक रूप से विविध बनाया गया। भारत की ऊर्जा सुरक्षा का सबसे अहम आधार उसकी भूमिगत रणनीतिक तेल भंडारण गुफाएं हैं. ये तीन प्रमुख स्थानों पर बनाई गई हैं- विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में. इन गुफाओं को भारतीय सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड ने विकसित किया है। इनकी कुल भंडारण क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (करीब 4 करोड़ बैरल) है, जो भारत की लगभग 10 दिनों की जरूरत पूरी कर सकती है। इन भूमिगत भंडारों की खासियत यह है कि ये ड्रोन या मिसाइल हमलों से सुरक्षित रहते हैं, प्राकृतिक आपदाओं से कम प्रभावित होते हैं, आग या तेल रिसाव का खतरा कम होता है. सरकार ने अभी तक इन रणनीतिक भंडारों का इस्तेमाल नहीं किया है. जरूरत पड़ने पर ये आपूर्ति संकट के दौरान एक सुरक्षा कवच का काम करते हैं।

भारत 40 देशों से आयात कर रहा है तेल

ईरान युद्ध के बाद भारत ने अपने तेल आयात के स्रोतों को और अधिक विविध बनाया है। सरकार के मुताबिक अब भारत करीब 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जिनमें यूरोप, लैटिन अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका शामिल हैं. अब भारत के करीब 70% तेल आयात ऐसे समुद्री मार्गों से आ रहे हैं जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर नहीं हैं, जबकि पहले यह हिस्सा करीब 50-55% था। भारत की ऊर्जा रणनीति में रूस से आयात होने वाला तेल भी अहम भूमिका निभा रहा है. पिछले साल इस मुद्दे पर अमेरिका ने भारत की आलोचना की थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस समय रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ भी लगाया था. लेकिन मार्च 2026 में मिडिल ईस्ट संकट के चलते अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दे दी. इसके बाद भारत ने तेजी से रूसी तेल खरीद बढ़ा दी। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत ने करीब 3 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है, जो दक्षिण एशिया के आसपास टैंकरों में मौजूद था। ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत ने अफ्रीकी देशों से भी खरीद बढ़ाई है. अंगोला से मार्च के पहले 10 दिनों में करीब 34 लाख बैरल तेल आयात किया गया. वहीं कांगो गणराज्य से करीब 19 लाख बैरल तेल खरीदा गया. विशेषज्ञों के मुताबिक कुल मिलाकर भारत के पास लगभग 10 करोड़ बैरल तेल तक की संभावित उपलब्धता है।

एलपीजी के लिए भी है भूमिगत भंडारण 

ईरान के साथ चल रहे अमेरिका के युद्ध के कारण भारत में रसोई गैस (LPG) की कीमतों में बढ़ोतरी जरूर हुई है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट प्रभावित हुए हैं। इस दौरान भारत सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का उपयोग कर घरेलू LPG उत्पादन 25% तक बढ़ा दिया है। दरअसल, एलपीजी के लिए भी भारत ने भूमिगत भंडारण सुविधा विकसित की है. मंगलुरु में 500 मीटर गहराई पर बना भारत का सबसे बड़ा एलपीजी भंडार, जिसकी क्षमता 80,000 टन है. विशाखापट्टनम में दूसरा भंडार, जिसकी क्षमता 60,000 टन है। सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसे और भंडार बनाए जा सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अफवाहों पर ना दें ध्यान

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को आश्वस्त किया है कि भारत के पास तेल तथा गैस की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने तेल तथा गैस की कमी के लिए फैलाई जा रही अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि तेल तथा गैस की कालाबाजारी करने वालों के साथ सख्ती के साथ निपटा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिमी एशिया में मौजूद संकट से दुनिया का कोई भी देश अछूता नहीं है। भारत सरकार अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रकार के प्रयास प्राथमिकता के आधार पर कर रही है। India oil and gas crisis


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बंगाल विजय मिशन में जुटी भाजपा, उम्मीदवारों के नाम लगभग फाइनल

दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा की यह महत्वपूर्ण बैठक इस बार पार्टी मुख्यालय के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित की गई। भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के पदभार संभालने के बाद यह केंद्रीय चुनाव समिति की पहली बड़ी बैठक भी मानी जा रही है।

बंगाल फतह मिशन पर भाजपा
बंगाल फतह मिशन पर भाजपा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Mar 2026 01:08 PM
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Bharatiya Janata Party : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक तैयारियों को तेज कर दिया है। गुरुवार को दिल्ली में भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक हुई, जिसमें राज्य की बड़ी संख्या में सीटों पर उम्मीदवारों के नामों को लेकर मंथन किया गया। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में करीब 140 संभावित उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन चुकी है। माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही अपनी पहली सूची जारी कर चुनावी बढ़त लेने की कोशिश करेगी। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा की यह महत्वपूर्ण बैठक इस बार पार्टी मुख्यालय के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर आयोजित की गई। भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन के पदभार संभालने के बाद यह केंद्रीय चुनाव समिति की पहली बड़ी बैठक भी मानी जा रही है।

आधी सीटों पर रणनीति तय

पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा लगभग आधी सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर अपनी सहमति बना चुकी है। ऐसे संकेत हैं कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में चुनाव होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए पार्टी अब चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटी है। भाजपा की रणनीति यह है कि उम्मीदवारों की पहली सूची समय रहते जारी कर राजनीतिक संदेश दिया जाए कि पार्टी इस बार पहले से अधिक संगठित और तैयार है। खबर यह भी है कि पार्टी कुछ पूर्व सांसदों को विधानसभा चुनाव मैदान में उतारने पर विचार कर रही है।

पहली सूची में कई बड़े नाम संभव

जिन नेताओं के नाम शुरुआती सूची में आने की चर्चा है, उनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक और वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इस बार एक बड़ा बदलाव यह माना जा रहा है कि मौजूदा सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने से पार्टी बच सकती है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीटें जीतकर खुद को मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित किया था। हालांकि बाद में कई विधायकों के दल बदलने के कारण विधानसभा में उसकी संख्या घटकर 65 रह गई। इसके बावजूद पार्टी अपने मौजूदा विधायकों में से अधिकांश पर फिर भरोसा जता सकती है।

इस बार नहीं दोहराई जाएगी पुरानी भूल

भाजपा ने इस बार उम्मीदवार चयन में 2021 के चुनाव से मिले अनुभवों को गंभीरता से लिया है। पिछले चुनाव में पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं और कुछ चर्चित चेहरों, खासकर फिल्मी हस्तियों, को टिकट देकर बड़ा दांव खेला था। लेकिन बाद में इनमें से कई नेता या तो निष्क्रिय हो गए या फिर राजनीतिक रूप से भरोसेमंद नहीं साबित हुए।

इसी पृष्ठभूमि में भाजपा अब ऐसी रणनीति अपनाती दिख रही है, जिसमें दलबदल कर आए नेताओं और केवल लोकप्रियता के आधार पर चुने जाने वाले चेहरों से दूरी बनाई जाए। पार्टी का जोर इस बार अपने पुराने, समर्पित और संगठननिष्ठ कार्यकर्ताओं पर है।

वफादारों को दी प्राथमिकता

पार्टी के भीतर यह समझ बनी है कि टिकट वितरण केवल चुनावी गणित का मामला नहीं है, बल्कि यह संगठन के मनोबल से भी जुड़ा होता है। इसलिए भाजपा ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाना चाहती है, जो लंबे समय से पार्टी के साथ खड़े रहे हैं। इससे एक ओर संगठन का कैडर उत्साहित रहेगा, वहीं दूसरी ओर जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि भाजपा अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को महत्व देती है। सूत्रों के अनुसार, इस बार टिकट वितरण में केवल जीतने की संभावना ही एकमात्र आधार नहीं होगी। पार्टी संगठन क्षमता, सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय प्रभाव, जातीय संतुलन और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता जैसे कई पहलुओं को साथ लेकर चल रही है। मतलब साफ है कि भाजपा इस बार केवल चेहरों के भरोसे नहीं, बल्कि एक सुनियोजित चुनावी संरचना के साथ मैदान में उतरना चाहती है। उम्मीदवार चयन के समानांतर भाजपा ने राज्य में प्रचार अभियान को भी गति दे दी है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक जनसभा में बड़ा वादा करते हुए कहा था कि यदि भाजपा पश्चिम बंगाल में सत्ता में आती है तो कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएंगी। इस तरह पार्टी चुनावी नैरेटिव को संगठन, उम्मीदवार और वादों—तीनों स्तर पर मजबूत करने की कोशिश में है। Bharatiya Janata Party

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