
हर हिस्से का होता प्रयोग
इन सबको देखते हुए पर्यावरण इंजीनियरिंग के क्षेत्र में 23 साल बिताने वाले गौरव आनंद ने इस पर कुछ रिसर्च करनी शुरू की। इस रिसर्च में ये पाया गया कि जलकुंभी से निकाले गए फाइबर से साड़ियों को तैयार करना वास्तव में संभव है। इस क्षेत्र में आजीविका पैदा करने के लिए लैंपशेड, नोटबुक और शोपीस तैयार किए। बस धीरे-धीरे कारवां बन गया। उन्होंने पश्चिम बंगाल के शांतिपुर में इसे बनाने की प्रक्रिया शुरू की। गौरव ने कहा कि वे कागज बनाने के लिए तने के नरम आवरण को रखते हैं और लुगदी का उपयोग फाइबर बनाने के लिए किया जाता है। गूदे से कीड़ों को दूर करने के लिए गर्म पानी से उपचारित करने के बाद तने से रेशे निकाले जाते हैं। इन रेशों का इस्तेमाल धागा बनाने में किया जाता है और इसके बाद उन पर रंग लगाया जाता है।
3-4 दिन में बनती एक साड़ी
इन धागों को बुनकरों द्वारा साड़ियों में बदला जाता है। एक साड़ी को बनाने में लगभग 3-4 दिन का समय लगता है। जलकुंभी से निकाले गए फाइबर का लगभग 25 प्रतिशत अन्य सामग्रियों के साथ मिलाया जाता है और साड़ियों के दूसरे प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं। गौरव के अनुसार, वे इस बात से काफी खुश हैं कि वे 450 से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने में सक्षम रहे हैं। गौरव का दावा है कि ये दुनिया में अपनी तरह का पहला उत्पाद है। एक साड़ी की कीमत लगभग 2,000-3,500 रुपये है।
हैंडीक्राफ्ट्स प्रोडक्ट बन रहे जलकुंभी से
साड़ी के साथ ही जलकुंभी का उपयोग चटाई, कागज और दूसरे हैंडीक्राफ्ट्स प्रोडक्ट बनाने में भी किया जा रहा है। गौरव आनंद बताते हैं कि इस पहल से झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में जल निकायों के पास रहने वाली महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद मिल रही है। उन्होंने बताया कि महिलाएं जलस्रोतों से जलकुंभी निकालती हैं, उन्हें सुखाती हैं और उसमें से पतले रेशे निकालती हैं। इन्हें जिसे आगे संसाधित करके महीन धागों में बदला जाता है। फिर उसका प्रयोग साड़ी बनाने में किया जाता है। हमने अपने प्रोडक्ट की वैरायटी बढ़ाते हुए बाद में चटाई, कागज और दूसरे हैंडीक्राफ्ट्स प्रोडक्ट भी बनाने प्रारंभ किए हैं।
बढ़ाना चाहते हैं काम
गौरव आनंद इस काम को और बढ़ाना चाहते हैं। वह कहते हैं कि चूंकि धागे को मैन्युअल रूप से बनाना एक बोझिल काम है, इसलिए उन्होंने हैदराबाद और तमिलनाडु के इरोड में कुछ छोटे उद्योगों से संपर्क किया है, जहां टेक्नोलॉजी से धागा तैयार किया जा रहा है। अगर 100 फीसदी जल जलकुंभी की साड़ी बनाई जाती है, तो यह ताकत में बहुत कमजोर होगी, इसलिए इसे मजबूत करने के लिए कपास, पॉलिएस्टर, टसर और अन्य फाइबर जैसी सामग्री का उपयोग किया जाता है।