पीटता था ड्रग एडिक्ट पति, बच्चों को पालने के लिए बेची चाय, आज महीने का कमाती हैं 60 लाख
Patricia Narayan
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 11:33 PM
Success Story : हौसले बुलंद हो और सपनों को पूरा करने का जुनून हो, तो बुरी से बुरी परिस्थिति भी आपको झुका नहीं सकती। इस कहावत को सच करती है पेट्रीसिया नारायण की कहानी। जिन्होंने कम उम्र में एक गलत फैसला किया, जिसके चलते उन्हें एक ऐसे रास्ते पर चलना पड़ा जो संघर्षों से भरा हुआ था। अपने संघर्ष के दिनों में पेट्रीसिया ने अपने पति से धोखा खाया, लेकिन इसके बाद भी उनके हौसले कम नहीं हुए। वह अपने बच्चों का पेट भरने के लिए दर दर भटकीं। लेकिन फिर भी हार नहीं मानी। आखिर में उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई। आज पेट्रीसिया नारायण रोजाना लाखों रुपये कमाती हैं। आइए जानते हैं अर्श से फर्श तक का सफर तय करने वाली पेट्रीसिया नारायण के संघर्ष के दिनों की कहानी।
कौन है पेट्रीसिया नारायण ?
तमिलनाडु के नागरकोइल में जन्मी पेट्रीसिया एक पारंपरिक क्रिश्चियन परिवार में पैदा हुईं। जब वह 17 साल की हुई तो उन्होंने अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती कर दी। दरअसल उन्हें एक ब्राह्मण युवक नारायण से प्यार हो गया। जिससे शादी करने के लिए वह अपने परिवार के भी खिलाफ चली गई। लेकिन शादी के कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि उनका यह फैसला कितना गलत था।
नशे में पति करता था मारपीट
शादी के कुछ दिनों बाद ही उन्ही पता चल गया कि उनका पति बेहद बेरहम है और ड्रग्स का नशा किया करता है। नशे की हालत में नारायण, पेट्रीसिया को बेरहमी से मारा-पीटा करता था। लेकिन वह इतनी बेबस थी कि इसके खिलाफ वह आवाज नहीं उठा सकती थी। कुछ सालों बाद पेट्रीसिया के दो बच्चे हो गए, लेकिन इसके बाद भी उनके पति का रवैया नहीं बदला। एक दिन पेट्रीसिया अपने पति की आदतों से इतनी परेशान हो गई की उन्होंने अपने पति को छोड़ने का फैसला कर लिया। उन्होंने यह फैसला केवल अपने लिए नहीं बल्कि अपने बच्चों को एक बेहतर जिंदगी देने के लिए लिया।
मां से पैसे लेकर किया काम शुरू
घर छोड़ने के बाद वह सड़क पर आ गई, ऐसे में उनके पिता ने उन्हें संभाला और फिर से अपना लिया। घर वापस आकर भी पैट्रिसिया ने ठान लिया कि वह अपने पैरों पर खड़ी होगी और अपने बच्चों को एक बेहतर भविष्य देंगी। कम उम्र से ही पेट्रीसिया का मन कुकिंग में लगता था, तो उन्होंने इसी को अपना करियर बनाने का सोचा लिया। इसके लिए पेट्रीसिया ने अपनी मां से पैसे उधार लेकर अचार और जैम बनाना शुरू किया। उनके बनाएं गए अचार और जैम की क्वालिटी अच्छी होने से उनका काम भी चल पड़ा।
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50 पैसे में बेचती थी चाय
कुछ समय बाद उन्होने पैसे जोड़कर मरीना बीच पर अपना एक खोखा लगा लिया। जिसमें उन्होंने कई चीजों को रखा के साथ चाय और कॉफी रखी, जिसकी कीमत 50 पैसे थी। पहले दिन तो उनके खोखे में सिर्फ कॉफी की ही बिक्री हुई, लेकिन अगले दिन की कमाई 700 रुपये की रही। इसके बाद तो आगे बढ़ने का सिलसिला चल पड़ा और साल 1982 से 2003 तक पेट्रीसिया ने परिवार के लिए काफी पैसे जुटा लिए।
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रोड एक्सीडेंट में बेटी को खोया
पैसे के साथ-साथ अपने अच्छे खाने के चलते पेट्रीसिया ने काफी इज्जत भी कमाई। इसी बीच उनके खाने की क्वालिटी देखकर स्लम क्लीयरिंग बोर्ड के चेयरमैन ने अपनी कैंटीन संभालने का जिम्मा पेट्रीसिया को दे दिया। लेकिन उन्होंने इस कठिन परिस्थियों में भी हार नहीं मानी। धीरे-धीरे पैट्रिसिया की पहुंच बढ़ने लगी और उन्होंने चेन्नई में स्थित बोर्ड की हर ऑफिस में कैंटीन का जिम्मा संभाल लिया। पैसे आने पर साल 1998 में वह संगीता रेस्तरां बिजनेस में पार्टनर बन गईं। साल 2004 में पेट्रीसिया के जीवन में फिर से एक दुखद घटना घट गई, जब एक एक्सीडेंट में उन्होंने अपनी बेटी को खो दिया। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इसके बाद उनके जीवन में सबसे बड़ा मौका आया, जब खुद का बिजनेस शुरू किया।
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[caption id="attachment_146048" align="aligncenter" width="278"] Patricia Narayan[/caption]
बेटी की याद में शुरू किया पहला रेस्तरां
साल 2006 में पैट्रिसिया ने अपना खुद का बिजनेस शुरू किया जिसमें उनका साथ उनके बेटे दिया। अपने इस पहले रेस्तरां को उन्होंने अपनी बेटी की याद में संदीपा के नाम से शुरू किया। इसके बाद तो उनका नाम चेन्नई के बड़े रेस्तरां में शुमार होने लगा और एक के बाद एक कई चेन खोल दी। आज चेन्नई में उनके कई रेस्तरां चलते हैं। वहीं अगर हम बात करें उनकी रोज की कमाई की तो वह रोजाना करीबन 2 लाख रुपये तक की कमाई करती हैं। उनका 20 करोड़ से ज्यादा का कारोबार बन चुका। साल 2004 में एक्सीडेंट में बेटी की मौत के बाद पैट्रिसिया ने एंबुलेस सर्विस भी शुरू की। वहीं साल 2010 में पैट्रिसिया को फिक्की वुमेन इंटरप्रेन्योर अवार्ड से भी नवाजा गया। Success Story