
Success Story of Poonam Gupta : क्या आप यकीन कर सकते हैं कि रद्दी कागज आपको करोड़पति बना सकता है, वह भी इतना बड़ा करोड़पति कि आप 800 करोड़ रूपये वाली एक बड़ी कंपनी खड़ी कर दें, लेकिन यह सच है। दिल्ली की रहने वाली एक महिला रद्दी पेपर से हर महीने करोड़ों रुपये की कमाई करती है। इसी रद्दी कागज के बलबूते इस महिला ने 800 करोड़ की लागत वाली एक बड़ी कंपनी खड़ी कर दी है।
हम बात कर रहे हैं दिल्ली की रहने वाली पूनम गुप्ता (Poonam Gupta) की। पूनम गुप्ता का नाम दिल्ली के बड़े उद्योगपतियों में बड़ी शान से लिया जाता है। पूनम गुप्ता ने करीब बीस साल पहले रद्दी पेपर खरीदना शुरू किया था। जब उन्होंने रद्दी पेपर खरीदा तो उनके घर वालों को भी समझ में नहीं आया कि पूनम आखिर रद्दी पेपर खरीदकर क्या करेगी। चलिए हम आपको बताते हैं कि रद्दी पेपर से कैसे करोड़ों रुपयों में खेला जा सकता है।
दिल्ली निवासी पूनम गुप्ता अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद एक अच्छी नौकरी की तलाश कर रही थी। नौकरी की तलाश करते करते पूनम गुप्त ने रद्दी पेपर पर रिसर्च करना भी शुरू कर दिया। अब उनके दिमाग में आइ्डिया आया कि क्यों न रद्दी पेपर को ही अपना कैरियर बनाया जाए। इस आइडिया ने ही पूनम गुप्ता को आज करोड़ों रुपयों का मालिक बना दिया। दरअसल, पूनम गुप्ता ने रद्दी पेपर को रीसाइकलिंग करने का विचार बनाया और पेपर रिसाइकलिंग का बिजनेश शुरू कर दिया। पूनम गुप्ता ने 20 साल पहले 1 लाख रुपये से यह बिजनेश शुरू किया और देखते ही देखते आज वह PG Paper 800 करोड रुपए से अधिक की कंपनी की मालकिन बन गई है।
पूनम गुप्ता पीजी पेपर कंपनी की मालकिन हैं। शादी के बाद वह ब्रिटेन चली गई क्योंकि उनके पति वहीं पर काम करते थे। ब्रिटेन में पूनम गुप्ता नौकरी की तलाश कर रही थी। पूनम के पास ब्रिटेन में कामकाज करने का कोई अनुभव नहीं था इसलिए उन्हें वहां आसानी से नौकरी नहीं मिल रही थी। स्कॉटलैंड सरकार के एक प्लान के तहत पूनम गुप्ता को 1,00,000 का एक फंड मिला था। इसी फंड से पूनम गुप्ता ने अपने बिजनेस की शुरुआत करने की योजना बनाई।
पूनम गुप्ता ने दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज से इकनामिक ऑनर्स किया, इसके बाद एमबीए किया है। 2002 में पूनम की शादी पुनीत गुप्ता से हो गई थी। इसके बाद पूनम भी पति के पास स्कॉटलैंड चली गई। अब पूनम गुप्ता स्कॉटलैंड में ही अपने परिवार के साथ रहती हैं।
2003 में पूनम गुप्ता ने पीजी पेपर की शुरुआत की। जिसके बाद आज करीब 20 साल बाद पूनम गुप्ता की कंपनी ग पेपर 800 करोड रुपए की कंपनी बन गई है। पूनम गुप्ता दुनिया के कई देशों से रद्दी कागज खरीदती हैं और उसकी रीसाइकलिंग कर अच्छी क्वालिटी का पेपर तैयार कर उसे दुनिया भर के देशों में बेचती हैं।