
Admission) दिलाने का आश्वासन देते थे। छात्रों को अपने ऑफिस बुलाकर उन्हे बेंगलुरु व अन्य राज्यों के मेडिकल कॉलेजों (Medical Colleges) में कम पैसों में दाखिला दिलाने झांसा देते थे। छात्रों व उनके परिजनों का भरोसा जीतने के लिए यह उनका बकायदा एयर टिकट करा कर देते थे और उन्हें आईटीसी के लग्जरी होटलों में रुकवाते थे। अन्य राज्य में पहुंचने पर यश चतुर्वेदी उर्फ जय मेहता का एक आदमी छात्रों के परिजनों से संपर्क कर उन्हें खुद को मेडिकल कॉलेज का अधिकारी बताकर दाखिला दिलाने का पूरा आश्वासन देता था। इसके बाद होटल में बैठकर एडमिशन की एवज में रकम तय की जाती थी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपियों ने उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, दिल्ली व हरियाणा के दर्जनों लोगों को दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी का शिकार बनाया है। आरोपी इतने शातिर है कि यह एक मोबाइल से केवल एक ही पार्टी से बात करते थे। उक्त मोबाइल का इस्तेमाल यह किसी अन्य से बात करने के लिए नहीं करते थे। जांच में पता चला है कि आरोपी करीब 13 बैंक अकाउंट प्रयोग में ला रहे थे। एडीसीपी ने बताया कि पुलिस ने ठगी के पैसों से दीपेंद्र द्वारा खरीदी गई अर्टिगा कार को सीज किया गया है। इनके पास से ठगी में प्रयुक्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड, आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। आरोपियों द्वारा ठगी में प्रयुक्त किए जाने वाले बैंक अकाउंट को भी सीज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है कि अब तक इन लोगों ने कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है।
दो से तीन महीने में बंद कर देते थे ऑफिस
पकड़े गए आरोपी ठगी की वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद अपना ठिकाना बदल लेते थे। किसी भी स्थान पर यह 2 से 3 माह से अधिक अपना ऑफिस नहीं रखते थे।
जांच में पता चला है कि आरोपियों ने कानपुर, लखनऊ, (Lucknow, Kanpur and Delhi) मालवीय नगर में भी ठगी का ऑफिस खोला था। यहां भी यह 2 से 3 महीने के भीतर ही ऑफिस बंद कर रफूचक्कर हो गए थे। पकड़े गए आरोपी दीपक, राजेश व यश चतुर्वेदी ऑफिस आने वाले लोगों से खुद ही डील करते थे और अपने स्टाफ को इस गोरखधंधे की भनक तक नहीं लगने देते थे। स्टाफ को भी यह लंबे समय तक ऑफिस में नहीं टिकने देते थे। ऑफिस में काम करने वाले स्टाफ को 15 से 20 दिनों के भीतर ही नौकरी से निकाल कर नया स्टाफ नियुक्त कर देते थे।