Supreme Court : AG के चयन पैनल में CJI को शामिल करने की मांग
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भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 03:25 AM
Supreme Court :भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एक जनहित याचिका (PIL) के तहत जारी किया गया है, जिसमें CAG के चयन पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने की मांग की गई है।
याचिका में क्या कहा गया है?
यह याचिका गैर-सरकारी संगठन (NGO) 'सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन' द्वारा दायर की गई है। याचिका में मौजूदा प्रणाली की आलोचना करते हुए कहा गया है कि CAG की नियुक्ति वर्तमान में प्रधानमंत्री की सिफारिश पर की जाती है, जिससे निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्न उठते हैं। इस प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता जताते हुए याचिका में मांग की गई है कि CAG की नियुक्ति के लिए एक स्वतंत्र चयन पैनल का गठन किया जाए। इस पैनल में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है।
CAG की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल
वर्तमान में CAG की नियुक्ति पूरी तरह से प्रधानमंत्री की सिफारिश पर निर्भर करती है, जिससे इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका बनी रहती है। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि यदि चयन प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता को शामिल किया जाए, तो नियुक्ति अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी हो सकेगी।
केंद्र सरकार से मांगा गया जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को पहले से लंबित एक अन्य याचिका के साथ जोड़ते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और जवाब देने के लिए कहा है। इससे पहले भी CAG की नियुक्ति को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों द्वारा सवाल उठाए जाते रहे हैं। मौजूदा प्रक्रिया को सरकार के पक्ष में पक्षपाती बताया गया है, जिससे इसकी निष्पक्षता पर संदेह बना रहता है।
संभावित प्रभाव और सुधार की दिशा में कदम
इस याचिका के चलते सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि याचिका में सुझाई गई सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो इससे CAG की नियुक्ति प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बन सकती है। इससे सरकार के वित्तीय कामकाज की निगरानी को भी और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
CAG की भूमिका सरकार के वित्तीय लेन-देन की जांच और लेखा परीक्षण में महत्वपूर्ण होती है। इसलिए, इसकी नियुक्ति की प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के अनुरूप होगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम एक बड़े प्रशासनिक और संवैधानिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं। Supreme Court