क्या राज्य सरकारों को अतिरिक्त बिक्री कर और सरचार्ज लगाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है ? क्या GST लागू होने के बाद राज्यों के टैक्स अधिकारों से जुड़ा करीब 27 साल पुराना विवाद अब अप्रासंगिक हो गया है ?
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National News : राज्य सरकारों के अतिरिक्त बिक्री कर (Additional Sales Tax) और सरचार्ज लगाने के अधिकार से जुड़े करीब तीन दशक पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सात जजों की संविधान पीठ ने कहा कि GST व्यवस्था लागू होने के बाद इस मामले में उठाया गया संवैधानिक सवाल अब अकादमिक महत्व का रह गया है। अदालत ने इस रेफरेंस को निर्णय के लिए अप्रासंगिक मानते हुए इसका जवाब देना आवश्यक नहीं समझा। यह मामला ओडिशा के अर्जुन फ्लोर मिल्स से जुड़ा था। इसमें राज्य सरकार की ओर से कारोबारियों के सालाना टर्नओवर के आधार पर 10 और 15 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाने के प्रावधान को चुनौती दी गई थी। मुख्य सवाल यह था कि क्या राज्य सरकारों को बिक्री कर के आधार पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है या यह संसद के आयकर लगाने के अधिकार में हस्तक्षेप करता है।
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सात जजों की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया कि बिक्री कर के प्रतिशत के आधार पर तय किया गया अतिरिक्त टैक्स या सरचार्ज मूल रूप से बिक्री कर की दर में वृद्धि के समान है। इसे केवल इस आधार पर अलग प्रकार का टैक्स नहीं माना जा सकता कि इसकी गणना पहले से लगाए गए टैक्स के प्रतिशत के रूप में की गई है। अदालत ने कहा कि पुराने संवैधानिक प्रावधानों और संबंधित राज्य कानूनों को GST व्यवस्था के तहत बदल दिया गया है। ऐसे में जिस संवैधानिक सवाल पर राय मांगी गई थी, उसका वर्तमान संदर्भ में कोई खास महत्व नहीं रह गया है।
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इस विवाद की शुरुआत ओडिशा सेल्स टैक्स एक्ट, 1947 के तहत अतिरिक्त टैक्स लगाने के प्रावधान से हुई थी। राज्य में कारोबारियों के सालाना टर्नओवर के आधार पर 10 और 15 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाने की व्यवस्था की गई थी। इस प्रावधान को लेकर कानूनी विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। मामला राज्य सरकारों की विधायी शक्तियों और संविधान की सातवीं अनुसूची की तत्कालीन सूची-II की एंट्री 54 से जुड़ा था। इसी के तहत राज्यों को वस्तुओं की बिक्री और खरीद पर टैक्स लगाने का अधिकार प्राप्त था।
संविधान पीठ ने कहा कि जिस संवैधानिक प्रावधान और राज्य कानूनों के आधार पर विवादित टैक्स लगाए गए थे, उनकी जगह अब GST व्यवस्था ने ले ली है। इसी वजह से पुराने रेफरेंस पर अब अलग से फैसला सुनाने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, अदालत ने पंजाब जनरल सेल्स टैक्स एक्ट, 1948 के तहत सरचार्ज की वैधता और पंजाब सोशल सिक्योरिटी एक्ट, 2000 के तहत सेस की राशि को सीधे सोशल सिक्योरिटी फंड में जमा करने से जुड़े सवालों को खुला रखा है। इन मुद्दों पर संबंधित मामलों में आगे सुनवाई होगी।
इस मामले में जस्टिस केवी विश्वनाथन ने अलग राय भी दी। उन्होंने कोडार और होचस्ट फार्मास्यूटिकल्स से जुड़े पुराने फैसलों का विश्लेषण करते हुए कहा कि अतिरिक्त बिक्री कर को राज्य की विधायी शक्ति के तहत उचित ठहराया जा सकता है। उनके अनुसार, यदि अतिरिक्त टैक्स किसी कारोबारी द्वारा देय बिक्री कर के आधार पर निर्धारित होता है तो उसे वस्तुओं की बिक्री पर टैक्स के रूप में देखा जा सकता है। यह केवल इस वजह से आय पर लगाया गया टैक्स नहीं बन जाता कि इसकी गणना कारोबारी के टर्नओवर से जुड़ी है। अदालत ने मुख्य मामले और संबंधित याचिकाओं को आगे की सुनवाई एवं निपटारे के लिए नियमित पीठ के सामने सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।च
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