सिरसा में अपने ही खून में नशे की गोलियां घोलकर ले रहे युवा
गांव में अब तक 35 से अधिक युवा मारे जा चुके हैं, जिनकी उम्र 16 से 25 साल के बीच थी। कोविड-19 महामारी के दौरान नशे की आपूर्ति में रुकावट आने के बाद इस समस्या ने और अधिक गंभीर रूप ले लिया। युवक पहले अपनी नसों से खून निकालते हैं और उसमें नशे की गोलियां मिलाकर शरीर में इंजेक्शन लगाते हैं।

Drug Addiction Problem : हरियाणा के सिरसा जिले के ओटू गांव में नशे की समस्या बेहद गंभीर रूप ले चुकी है। हालात इतने भयावह हैं कि युवा अब अपनी जान जोखिम में डालकर नशा कर रहे हैं। यहां पानी की कमी के कारण कुछ युवा अपने ही खून में नशे की गोलियां घोलकर इंजेक्शन लगा रहे हैं।
मौतों की संख्या और उम्र
गांव में अब तक 35 से अधिक युवा मारे जा चुके हैं, जिनकी उम्र 16 से 25 साल के बीच थी। कोविड-19 महामारी के दौरान नशे की आपूर्ति में रुकावट आने के बाद इस समस्या ने और अधिक गंभीर रूप ले लिया। युवक पहले अपनी नसों से खून निकालते हैं और उसमें नशे की गोलियां मिलाकर शरीर में इंजेक्शन लगाते हैं। यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि गांव-गांव में देखी जाने वाली सच्चाई है। इस व्यवहार ने न केवल उनके जीवन को खतरे में डाल दिया है, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक और आर्थिक दबाव में डाल दिया है। उदाहरण के तौर पर, एक बुजुर्ग ने बताया कि उनके 19 वर्षीय पोते की ओवरडोज से मौत हो गई जबकि बड़ा पोता राजस्थान में नशामुक्ति केंद्र में इलाज करा रहा है।
प्रशासनिक और सामाजिक विफलता
युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए 2017-18 में खेल मैदान बनाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए पंचायत ने जमीन भी उपलब्ध करवाई, लेकिन अब तक काम नहीं हुआ और जमीन पर कूड़ाघर बन गया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि काम प्रक्रियाधीन है।
विधायक अर्जुन चौटाला ने विधानसभा में बार-बार इस मुद्दे को उठाया है और तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, नशामुक्ति केंद्रों को मजबूत करने और जिला स्तर पर निगरानी कमेटियां बनाने की मांग की है।
सामाजिक और मानवीय प्रभाव
* युवा नशे के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं।
* परिवार मानसिक और आर्थिक बोझ झेल रहे हैं।
* रात के समय श्मशान घाट के पास इंजेक्शन लगाने वाले युवा देखे जाते हैं।
समाधान की दिशा
* सरकारी नशामुक्ति केंद्रों को सुदृढ़ करना।
* नशा तस्करों और माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।
* युवाओं के लिए खेल, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों की सुविधा।
* परिवार और समाज में जागरूकता और सहयोग बढ़ाना।
Drug Addiction Problem : हरियाणा के सिरसा जिले के ओटू गांव में नशे की समस्या बेहद गंभीर रूप ले चुकी है। हालात इतने भयावह हैं कि युवा अब अपनी जान जोखिम में डालकर नशा कर रहे हैं। यहां पानी की कमी के कारण कुछ युवा अपने ही खून में नशे की गोलियां घोलकर इंजेक्शन लगा रहे हैं।
मौतों की संख्या और उम्र
गांव में अब तक 35 से अधिक युवा मारे जा चुके हैं, जिनकी उम्र 16 से 25 साल के बीच थी। कोविड-19 महामारी के दौरान नशे की आपूर्ति में रुकावट आने के बाद इस समस्या ने और अधिक गंभीर रूप ले लिया। युवक पहले अपनी नसों से खून निकालते हैं और उसमें नशे की गोलियां मिलाकर शरीर में इंजेक्शन लगाते हैं। यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि गांव-गांव में देखी जाने वाली सच्चाई है। इस व्यवहार ने न केवल उनके जीवन को खतरे में डाल दिया है, बल्कि उनके परिवारों को भी मानसिक और आर्थिक दबाव में डाल दिया है। उदाहरण के तौर पर, एक बुजुर्ग ने बताया कि उनके 19 वर्षीय पोते की ओवरडोज से मौत हो गई जबकि बड़ा पोता राजस्थान में नशामुक्ति केंद्र में इलाज करा रहा है।
प्रशासनिक और सामाजिक विफलता
युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए 2017-18 में खेल मैदान बनाने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए पंचायत ने जमीन भी उपलब्ध करवाई, लेकिन अब तक काम नहीं हुआ और जमीन पर कूड़ाघर बन गया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि काम प्रक्रियाधीन है।
विधायक अर्जुन चौटाला ने विधानसभा में बार-बार इस मुद्दे को उठाया है और तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, नशामुक्ति केंद्रों को मजबूत करने और जिला स्तर पर निगरानी कमेटियां बनाने की मांग की है।
सामाजिक और मानवीय प्रभाव
* युवा नशे के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं।
* परिवार मानसिक और आर्थिक बोझ झेल रहे हैं।
* रात के समय श्मशान घाट के पास इंजेक्शन लगाने वाले युवा देखे जाते हैं।
समाधान की दिशा
* सरकारी नशामुक्ति केंद्रों को सुदृढ़ करना।
* नशा तस्करों और माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।
* युवाओं के लिए खेल, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों की सुविधा।
* परिवार और समाज में जागरूकता और सहयोग बढ़ाना।












