तीन शादी करने वाले आईएएस अवि प्रसाद की तीनों बीबियां आईएएस अधिकारी

तीसरा विवाह, जिसने प्रशासनिक हलकों से लेकर सोशल मीडिया तक लोगों का ध्यान खींचा है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी तीनों शादियाँ सिविल सेवा से जुड़ी अधिकारियों से हुई हैं। दो आईएएस बीबियों से तलाक के बाद जब उन्होंने तीसरी शादी की तो वो भी आईएएस अधिकारी ही है।

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आईएएस अधिकारी अवि प्रसाद
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar16 Feb 2026 01:51 PM
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UP News : मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी अवि प्रसाद एक बार फिर चर्चा में हैं। वजह है उनका तीसरा विवाह, जिसने प्रशासनिक हलकों से लेकर सोशल मीडिया तक लोगों का ध्यान खींचा है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी तीनों शादियाँ सिविल सेवा से जुड़ी अधिकारियों से हुई हैं। दो आईएएस बीबियों से तलाक के बाद जब उन्होंने तीसरी शादी की तो वो भी आईएएस अधिकारी ही है। इस तीन शादी करने वाले आईएएस की काफी चर्चा हो रही है।

शुरुआती सफर: आईपीएस से आईएएस तक

अवि प्रसाद मूल रूप से सीतापुर (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। उन्होंने पहले भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की परीक्षा पास की थी, लेकिन इसके बाद दोबारा सिविल सेवा परीक्षा दी और बेहतर रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में शामिल हुए।

मध्य प्रदेश कैडर मिलने के बाद उन्होंने विभिन्न जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ संभालीं और एक सक्रिय अधिकारी के रूप में पहचान बनाई।

वैवाहिक जीवन : तीन अध्याय

1 पहली शादी :

उनकी पहली शादी आईएएस अधिकारी रिजु बाफना से हुई थी। वे वर्तमान में शाजापुर जिले में कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। कुछ समय बाद दोनों के बीच अलगाव हो गया।

 2 दूसरी शादी :

इसके बाद उन्होंने आईएएस अधिकारी मिशा सिंह से विवाह किया। वे भी प्रशासनिक सेवा में सक्रिय हैं और रतलाम जिले में कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। यह संबंध भी अंतत: समाप्त हो गया।

 3 तीसरी शादी :

हाल ही में अवि प्रसाद ने 2017 बैच की आईएएस अधिकारी अंकिता धाकरे के साथ विवाह किया। बताया जाता है कि यह समारोह कूनो राष्ट्रीय उद्यान में सादगी से आयोजित किया गया। अंकिता वर्तमान में राज्य मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी के रूप में कार्यरत हैं।

चर्चा की वजह क्या है?

अवि प्रसाद का नाम इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि उनकी तीनों जीवनसंगिनी स्वयं आईएएस अधिकारी रही हैं और महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य कर रही हैं। प्रशासनिक सेवा में इस तरह की परिस्थितियाँ कम ही देखने को मिलती हैं, इसलिए यह विषय जनचर्चा का हिस्सा बन गया है। हालाँकि, यह पूरा मामला उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा है। कानूनी रूप से यदि विवाह और तलाक नियमानुसार हुए हों, तो यह व्यक्तिगत निर्णय का विषय माना जाता है।UP News


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उत्तर प्रदेश के 18 जिलों के कोर्ट को मिली बम से उड़ाने की धमकी, मचा हड़कंप

सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं, कोर्ट परिसरों की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया और हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

उत्तर प्रदेश में बम धमकी से हड़कंप
उत्तर प्रदेश में बम धमकी से हड़कंप
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar16 Feb 2026 12:48 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश से इस वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और प्रमुख शहर अयोध्या समेत प्रदेश के 18 जिलों की कचहरियों को ईमेल के जरिए बम धमाके की धमकी मिली है, जिससे अदालत परिसरों में हड़कंप मच गया। धमकी देने वाले अज्ञात व्यक्ति ने पहले 11:15 बजे विस्फोट की चेतावनी दी, फिर कुछ ही देर बाद दूसरा मेल भेजकर समय बदलकर 12:15 बजे कर दिया। सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गईं, कोर्ट परिसरों की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया और हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

लखनऊ कचहरी में घेराबंदी

धमकी सामने आते ही लखनऊ कचहरी में वजीरगंज थाना पुलिस, बम निरोधक दस्ता (BDS) और संबंधित एजेंसियों ने घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। अब तक किसी भी परिसर से कोई संदिग्ध वस्तु मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा कारणों से पूरे इलाके को बार-बार खंगाला जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, सभी 18 प्रभावित जिलों में अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। चूंकि मामला सीधे राज्य सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसकी विस्तृत जांच उत्तर प्रदेश ATS को सौंपी गई है। अलग-अलग एजेंसियां मिलकर ईमेल के सोर्स/ट्रैकिंग और भेजने वाले की पहचान में जुटी हैं।

शुक्रवार को भी आया था ऐसा ही मेल

गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को भी इसी तरह का धमकी भरा ईमेल आया था, जिसके बाद कई जगहों पर कचहरियों को खाली कराकर जांच कराई गई थी और अदालती कामकाज प्रभावित हुआ था। शुरुआती जांच में सूत्रों के हवाले से संकेत मिला है कि मेल का कनेक्शन तमिलनाडु से हो सकता है, जबकि संदेश में महाराष्ट्र का भी उल्लेख बताया जा रहा है। फिलहाल एजेंसियां किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले तकनीकी जांच और सत्यापन कर रही हैं। UP News

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क्या 2027 में दिखेगा सपा-बसपा का साथ? अखिलेश के बदले सुर ने बढ़ाई हलचल

अखिलेश ने न सिर्फ बसपा के साथ संबंधों में मजबूती और गहराई की बात कही, बल्कि मायावती के कभी बेहद भरोसेमंद रहे नसीरुद्दीन सिद्दीकी को सपा में शामिल कराकर यूपी की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी।

सपा-बसपा समीकरण चर्चा में
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locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar16 Feb 2026 10:10 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर खड़ी दिख रही है। होली के शुभ पर्व से पहले राजधानी लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में नई दोस्ती की चर्चाएं तेज हो गई है। दरअसल, राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के मंच से अखिलेश यादव के ताजा संकेतों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सपा और बसपा के बीच रिश्तों की बर्फ पिघल रही है? अखिलेश ने न सिर्फ बसपा के साथ संबंधों में मजबूती और गहराई की बात कही, बल्कि मायावती के कभी बेहद भरोसेमंद रहे नसीरुद्दीन सिद्दीकी को सपा में शामिल कराकर यूपी की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी।

PDA मंच से सोशल इंजीनियरिंग का बड़ा संदेश

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित ‘PDA प्रेम प्रसार समारोह’ में अखिलेश यादव पूरे कॉन्फिडेंस में नजर आए। पार्टी दावा कर रही है कि कार्यक्रम में करीब 15 हजार से ज्यादा लोग अलग-अलग दलों को छोड़कर सपा के साथ जुड़े। जनसभा को संबोधित करते हुए अखिलेश ने कहा कि सपा–बसपा के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और आने वाले वक्त में यह मजबूती और बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल में यह बयान सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी मौसम की दिशा बताने वाला संकेत माना जा रहा है। अखिलेश ने PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) को उत्तर प्रदेश की प्रगति और सामाजिक न्याय की धुरी बताते हुए जोर दिया कि सामाजिक एकता ही सकारात्मक राजनीति की असली ताकत है। दिलचस्प यह है कि अखिलेश अब PDA को केवल वोटों की जोड़-घटाव की भाषा में नहीं, बल्कि एक लंबे सामाजिक अभियान की तरह पेश कर रहे हैंकार्यक्रम की सबसे बड़ी सियासी सुर्खी बनी पूर्व मंत्री नसीरुद्दीन सिद्दीकी की सपा में एंट्री। बसपा के पुराने और प्रभावशाली चेहरों में गिने जाने वाले सिद्दीकी कभी मायावती के करीबी माने जाते थे और बसपा शासन में कई बार मंत्री रहे। 2017 के बाद बसपा से बाहर होने के बाद अब उनका सपा में आना उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में नई हलचल के तौर पर देखा जा रहा है।

 क्या 2027 में मिटेगी पुरानी दरार?

उत्तर प्रदेश में सपा–बसपा का रिश्ता कभी भी सीधी रेखा नहीं रहा। 1993 में दोनों दल साथ आए और भाजपा के उभार को रोकने की कोशिश हुई, लेकिन 1995 के चर्चित गेस्ट हाउस प्रकरण ने भरोसे की ऐसी दीवार खड़ी कर दी कि लंबे समय तक दोनों एक-दूसरे के सबसे बड़े विरोधी बने रहे। 2019 में लोकसभा चुनाव में “फिर साथ” का प्रयोग जरूर हुआ, मगर नतीजे उम्मीदों के मुताबिक नहीं आए तो गठबंधन भी बिखर गया। अब अखिलेश यादव के ताजा संकेतों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में वही पुराना सवाल फिर जिंदा कर दिया है—क्या 2027 से पहले पुरानी कड़वाहट पिघलेगी या यह सिर्फ रणनीति का संकेत भर है? अतीत की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सपा पर यादव वर्चस्व के आरोप लगते रहे, जिसका असर दलित वोटरों पर भी पड़ा। लेकिन अब अखिलेश की राजनीति में दलित-आधार को लेकर नई सक्रियता दिख रही है। PDA की लगातार चर्चा और दलित चेहरों को आगे लाने की कोशिश को सपा की री-ब्रांडिंग रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। UP News

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