केजीएमयू में मजार हटाने को लेकर विवाद तेज, प्रशासन ने चस्पा किया दूसरा नोटिस

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मुद्दे पर दूसरा नोटिस जारी करते हुए 28 फरवरी तक का समय दिया है। सोमवार को यह नोटिस परिसर में मौजूद सभी मजारों पर चस्पा किया गया।

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किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू)
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar09 Feb 2026 07:35 PM
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UP News : लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) परिसर में बनी मजारों को हटाने को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मुद्दे पर दूसरा नोटिस जारी करते हुए 28 फरवरी तक का समय दिया है। सोमवार को यह नोटिस परिसर में मौजूद सभी मजारों पर चस्पा किया गया। इससे पहले 23 जनवरी को भी प्रशासन ने मजार हटाने को लेकर नोटिस जारी किया था, लेकिन तय समयसीमा में संतोषजनक कार्रवाई न होने के कारण अब दोबारा सख्त रुख अपनाया गया है।

मजारें बिना किसी वैध अनुमति के बनी हैं

केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि परिसर के विभिन्न हिस्सों में बनी ये मजारें बिना किसी वैध अनुमति या आधिकारिक आदेश के स्थापित की गई हैं। इनके चलते अस्पताल परिसर में आवागमन बाधित हो रहा है और अतिक्रमण की समस्या भी बनी हुई है। प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार क्वीन मेरी अस्पताल के मुख्य गेट, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, ट्रॉमा सेंटर, आथोर्पेडिक सुपर स्पेशियलिटी भवन और टीजी हॉस्टल परिसर सहित कई स्थानों पर अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि 28 फरवरी के बाद खुद कार्रवाई कर मजारें हटाई जाएंगी।

केवल एक मजार से मिला जवाब

प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के जवाब में अब तक सिर्फ एक मजार, जो आथोर्पेडिक सुपर स्पेशियलिटी भवन के पास स्थित है, से प्रतिक्रिया मिली है। जवाब में मजार के पुराने होने का दावा किया गया है, लेकिन इसके निर्माण से जुड़ी अनुमति, आदेश या स्वामित्व से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।

1.5 लाख वर्गफुट जमीन पहले ही करा चुका है मुक्त

केजीएमयू प्रशासन के अनुसार अब तक संस्थान करीब 1.5 लाख वर्गफुट भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करा चुका है। इनमें नेत्र विभाग के पीछे, जगतनारायण रोड और शताब्दी-2 भवन के पास की जमीन शामिल है। शेष छह स्थलों को भी जल्द खाली कराने की तैयारी है। प्रशासन का कहना है कि खाली कराई गई भूमि का उपयोग रोगियों की सुविधा और अस्पताल के विस्तार के लिए किया जाएगा। स्पष्ट किया गया है कि 1947 के बाद बनी सभी अवैध मजारों को हटाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। UP News


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सुप्रीम कोर्ट से कुलदीप सेंगर को राहत नहीं, हाई कोर्ट को तय समयसीमा में फैसला सुनाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह सेंगर की अपील पर तीन महीने के भीतर अंतिम निर्णय दे। शीर्ष अदालत ने कहा कि लंबे समय से लंबित मामलों में अनावश्यक देरी न्याय के हित में नहीं है, इसलिए इस केस को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाना चाहिए।

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पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar09 Feb 2026 07:18 PM
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UP News : उन्नाव मामले से जुड़े एक अहम प्रकरण में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए स्पष्ट कर दिया कि इस स्तर पर हस्तक्षेप उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह सेंगर की अपील पर तीन महीने के भीतर अंतिम निर्णय दे। शीर्ष अदालत ने कहा कि लंबे समय से लंबित मामलों में अनावश्यक देरी न्याय के हित में नहीं है, इसलिए इस केस को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाना चाहिए।

सेंगर की सजा पर रोक लगाने या उन्हें अंतरिम राहत देने से भी इंकार

कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि संभव हो, तो पीड़िता पक्ष द्वारा दायर संबंधित याचिकाओं के साथ इस अपील की संयुक्त सुनवाई की जा सकती है, ताकि एकसमान और प्रभावी फैसला सामने आ सके। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ किया कि केवल जेल में बिताए गए समय के आधार पर सजा को निलंबित नहीं किया जा सकता। इसी वजह से सेंगर की सजा पर रोक लगाने या उन्हें अंतरिम राहत देने से भी इंकार कर दिया गया।

पहले से ही उन्नाव मामले में दोषी करार दिए जा चुके 

गौरतलब है कि कुलदीप सिंह सेंगर पहले से ही उन्नाव मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं और वे पीड़िता के पिता की मौत से जुड़े केस में सजा के खिलाफ अपील कर रहे हैं। अब इस पूरे मामले पर अगला और निर्णायक कदम दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा। अभी तक उनकी अपील को निरस्त किया गया है अब दिल्ली हाईकोर्ट को निर्णय सुनाने की समय सीमा निर्धारित की गई है। UP News


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अकबरुद्दीन ओवैसी ने सीएम योगी आदित्यनाथ को दी खुली चुनौती

अकबरुद्दीन के बयान का मतलब साफ है कि एआईएमआईएम अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में कदम रखने को तैयार है और यह भाजपा के लिए सीधी चुनौती हो सकती है। यह बयान 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों से पहले आया है, जब सभी दल अपनी चुनावी रणनीतियों को लेकर सक्रिय हो रहे हैं।

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ओवैसी योगी आदित्यनाथ
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar09 Feb 2026 06:12 PM
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UP News : अकबरुद्दीन ओवैसी, जो एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के भाई हैं और हैदराबाद की चंद्रयानगुट्टा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं, ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधे चुनौती दी है। उन्होंने कहा मिस्टर योगी, तैयार हो जाओ, मैं यूपी आ रहा हूँ। इस बयान के जरिए एआईएमआईएम ने संकेत दिया है कि वह आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में सक्रिय भूमिका निभाने की योजना बना रही है।

एआईएमआईएम की यूपी में राजनीतिक दावेदारी

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एआईएमआईएम ने किसी खास सीट पर उम्मीदवार घोषित नहीं किया

अभी तक एआईएमआईएम ने किसी खास सीट पर उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, लेकिन इस बयान ने साफ संकेत दे दिया है कि पार्टी चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। जिस अंदाज और जोश से ओवैसी ने योगी आदित्यनाथ को ललकारा है उससे साऊ लग रहा है कि पार्टी उत्तर प्रदेश चुनाव में अपने प्रत्याशी बड़ी संख्या में उतारने के मूड में है।UP News



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