अभिभाषण के दौरान नारेबाजी से गरमाया सदन, राजभर ने सपा पर साधा निशाना
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि प्रदेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठीं राज्यपाल के खिलाफ इस तरह के नारे लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि मर्यादा की सीमा लांघने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने राज्यपाल के सम्मान को ठेस पहुंचाई है और इससे महिलाओं के प्रति विपक्ष के रवैये पर भी सवाल खड़े होते हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को उस वक्त सियासी तापमान बढ़ गया, जब उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान समाजवादी पार्टी के विधायकों ने नारेबाजी की। सदन में राज्यपाल गो बैक जैसे नारे लगे, जिसके बाद कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर तीखा हमला बोला और इसे गरिमा का अपमान करार दिया। ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि प्रदेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठीं राज्यपाल के खिलाफ इस तरह के नारे लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि मर्यादा की सीमा लांघने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने राज्यपाल के सम्मान को ठेस पहुंचाई है और इससे महिलाओं के प्रति विपक्ष के रवैये पर भी सवाल खड़े होते हैं। राजभर ने कहा कि ऐसे व्यवहार की जितनी निंदा की जाए, कम है और जनता आने वाले समय में इसका जवाब देगी।
SIR विवाद पर भी सपा को घेरा
उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर ओम प्रकाश राजभर ने सख्त लहजे में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का यह पुनरीक्षण पूरी तरह चुनाव आयोग की निगरानी में चल रहा है और आयोग निष्पक्षता के साथ अपना संवैधानिक दायित्व निभा रहा है। राजभर ने आरोप लगाया कि सपा बिना ठोस तथ्यों के सरकार को निशाने पर लेकर बेवजह का हंगामा खड़ा कर रही है, ताकि असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। राजभर के मुताबिक, विपक्ष की बेचैनी की वजह यह है कि आगे जाकर फर्जी मतदान जैसे मुद्दों पर सख्ती बढ़ेगी।
स्पीकर सतीश महाना ने भी दी नसीहत
इस पूरे प्रकरण पर उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी सख्त लेकिन संतुलित अंदाज में विपक्ष को मर्यादा का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति स्वाभाविक है, पर सदन की गरिमा और महामहिम राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद का सम्मान हर हाल में बना रहना चाहिए। महाना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर किसी दल को अभिभाषण नहीं सुनना था तो उत्तर प्रदेश विधानसभा की परंपरा के मुताबिक वे वॉकआउट कर सकते थे, लेकिन सदन के भीतर नारेबाजी कर माहौल बिगाड़ना संसदीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि आगे की कार्यवाही में सभी दल संयम दिखाएंगे और सदन विकास, बजट और जनहित के मुद्दों पर सुचारु रूप से चलेगा। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को उस वक्त सियासी तापमान बढ़ गया, जब उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान समाजवादी पार्टी के विधायकों ने नारेबाजी की। सदन में राज्यपाल गो बैक जैसे नारे लगे, जिसके बाद कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर तीखा हमला बोला और इसे गरिमा का अपमान करार दिया। ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि प्रदेश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठीं राज्यपाल के खिलाफ इस तरह के नारे लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि मर्यादा की सीमा लांघने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने राज्यपाल के सम्मान को ठेस पहुंचाई है और इससे महिलाओं के प्रति विपक्ष के रवैये पर भी सवाल खड़े होते हैं। राजभर ने कहा कि ऐसे व्यवहार की जितनी निंदा की जाए, कम है और जनता आने वाले समय में इसका जवाब देगी।
SIR विवाद पर भी सपा को घेरा
उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर ओम प्रकाश राजभर ने सख्त लहजे में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का यह पुनरीक्षण पूरी तरह चुनाव आयोग की निगरानी में चल रहा है और आयोग निष्पक्षता के साथ अपना संवैधानिक दायित्व निभा रहा है। राजभर ने आरोप लगाया कि सपा बिना ठोस तथ्यों के सरकार को निशाने पर लेकर बेवजह का हंगामा खड़ा कर रही है, ताकि असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। राजभर के मुताबिक, विपक्ष की बेचैनी की वजह यह है कि आगे जाकर फर्जी मतदान जैसे मुद्दों पर सख्ती बढ़ेगी।
स्पीकर सतीश महाना ने भी दी नसीहत
इस पूरे प्रकरण पर उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी सख्त लेकिन संतुलित अंदाज में विपक्ष को मर्यादा का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति स्वाभाविक है, पर सदन की गरिमा और महामहिम राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद का सम्मान हर हाल में बना रहना चाहिए। महाना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर किसी दल को अभिभाषण नहीं सुनना था तो उत्तर प्रदेश विधानसभा की परंपरा के मुताबिक वे वॉकआउट कर सकते थे, लेकिन सदन के भीतर नारेबाजी कर माहौल बिगाड़ना संसदीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि आगे की कार्यवाही में सभी दल संयम दिखाएंगे और सदन विकास, बजट और जनहित के मुद्दों पर सुचारु रूप से चलेगा। UP News












