गाजियाबाद में दर्दनाक हादसा, 9वीं मंजिल से कूदकर तीन सगी बहनों ने दी जान

घटना के बाद पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई, जबकि परिवार सदमे में है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती संकेतों में मोबाइल गेमिंग की लत, घर में बढ़ता तनाव और पढ़ाई से दूरी जैसी बातें सामने आ रही हैं।

गाजियाबाद ट्रिपल डेथ केस
गाजियाबाद ट्रिपल डेथ केस
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar04 Feb 2026 11:40 AM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। गाजियाबाद के टीला मोड़ इलाके की एक हाई-राइज सोसाइटी में रहने वाली तीन नाबालिग सगी बहनों की एक साथ मौत हो गई। घटना के बाद पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई, जबकि परिवार सदमे में है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती संकेतों में मोबाइल गेमिंग की लत, घर में बढ़ता तनाव और पढ़ाई से दूरी जैसी बातें सामने आ रही हैं।

मोबाइल फॉरेंसिक जांच में जुटी पुलिस

परिजनों के मुताबिक तीनों बहनें लंबे समय से मोबाइल पर एक ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम/कंटेंट में अत्यधिक समय दे रही थीं। परिवार इसे लेकर परेशान था और कई बार उन्हें समझाया भी गया। पुलिस को घटनास्थल से मोबाइल फोन मिले हैं जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या किसी ऐप/ऑनलाइन ग्रुप से दबाव, टास्क या मनोवैज्ञानिक ट्रिगर तो नहीं जुड़ा था ।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान से जुड़ेगा पूरा केस-फ्रेमवर्क

सूत्रों/परिवार की जानकारी के आधार पर पुलिस यह भी खंगाल रही है कि बच्चियां पढ़ाई और स्कूल रूटीन से काफी समय से कट रही थीं या नहीं। अगर ऐसा था, तो यह संकेत देता है कि समस्या केवल मोबाइल इस्तेमाल नहीं, बल्कि रूटीन टूटना, सोशल आइसोलेशन, और मानसिक दबाव जैसी बड़ी तस्वीर का हिस्सा हो सकती है। पुलिस इस एंगल से भी पड़ताल कर रही है कि बच्चियों के व्यवहार में बदलाव कब से शुरू हुआ और परिवार/स्कूल स्तर पर क्या संकेत मिले थे। पुलिस को एक नोट मिलने की बात सामने आई है, जिसमें परिवार से माफी और गेम को लेकर भावनात्मक लगाव जैसा संकेत बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस अभी इसे सबूतों के साथ जोड़कर देख रही है। मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, फोन डेटा, चैट/ऐप एक्टिविटी और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। UP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

21 मामलों का हिस्ट्रीशीटर… कौन था बनारसी यादव, जिसे पुलिस ने मार गिराया?

पुलिस के मुताबिक, मंगलवार देर रात चौबेपुर थाना क्षेत्र में बारियासनपुर रिंग रोड के पास उसकी मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी। टीम ने इलाके को चारों ओर से घेरकर उसे सरेंडर का अवसर दिया, लेकिन उसने हथियार डालने की बजाय फायरिंग शुरू कर दी।

काशी में ढेर हुआ बनारसी यादव
काशी में ढेर हुआ बनारसी यादव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar04 Feb 2026 10:14 AM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध के खिलाफ तेज हुई कार्रवाई के बीच वाराणसी से बड़ी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश पुलिस और उत्तर प्रदेश STF की संयुक्त टीम ने कुख्यात शूटर बनारसी यादव को मुठभेड़ में ढेर कर दिया। पुलिस के मुताबिक, मंगलवार देर रात चौबेपुर थाना क्षेत्र में बारियासनपुर रिंग रोड के पास उसकी मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी। टीम ने इलाके को चारों ओर से घेरकर उसे सरेंडर का अवसर दिया, लेकिन उसने हथियार डालने की बजाय फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह गोली लगने से घायल हुआ और अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एनकाउंटर के बाद मौके से दो पिस्टल और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं। घटना स्थल पर फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया और आसपास के सीसीटीवी फुटेज/तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है, ताकि यह साफ हो सके कि वह किन-किन लोगों के संपर्क में था और किस नेटवर्क के लिए काम कर रहा था।

महेंद्र गौतम हत्याकांड में सामने आया था सामने नाम

बनारसी यादव का नाम 21 अगस्त 2025 को हुए चर्चित हत्याकांड में प्रमुख रूप से उभरा था। उस दिन सारनाथ क्षेत्र के अरिहंत नगर कॉलोनी (फेज-2) में बाइक सवार बदमाशों ने कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं थीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या के पीछे जमीन/प्रॉपर्टी विवाद की आशंका थी और कथित तौर पर करीब 40 बिस्वा जमीन को लेकर तनाव चल रहा था, जिसकी कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये बताई गई।

21 मुकदमों वाला हिस्ट्रीशीटर था बनारसी यादव

जांच में यह भी सामने आया कि इस सनसनीखेज वारदात के पीछे करीब 5 लाख रुपये की सुपारी का खेल था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, घटना के वक्त अरविंद यादव उर्फ फौजी (कल्लू) और विशाल की मौजूदगी का भी उल्लेख है। बताया जा रहा है कि बाइक की कमान विशाल के हाथ में थी, जबकि ट्रिगर दबाने वालों में बनारसी यादव और अरविंद के नाम सामने आए। वारदात के बाद से बनारसी उत्तर प्रदेश में एक जिले से दूसरे जिले तक ठिकाने बदलता रहा। पुलिस के अनुसार, बनारसी के खिलाफ वाराणसी समेत अलग-अलग जिलों में हत्या, लूट और अन्य गंभीर धाराओं में कुल 21 मुकदमे दर्ज थे।  UP News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

VIP सुरक्षा चूक पर उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा कदम, गठित होगी स्पेशल टीम

शासन स्तर से निर्देश जारी हो चुके हैं और चयन प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, एडिशनल एसपी से लेकर उप निरीक्षक (दारोगा) स्तर तक के अफसरों और कर्मियों से आवेदन मांगे गए हैं।

यूपी की स्पेशल VIP टीम
यूपी की स्पेशल VIP टीम
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar04 Feb 2026 09:52 AM
bookmark

UP News : उत्तर प्रदेश में वीआईपी सुरक्षा को लेकर सरकार ने जीरो-टॉलरेंस का संदेश देते हुए बड़ा कदम उठाया है। हाल के कुछ कार्यक्रमों में सुरक्षा घेराबंदी में दिखी चूकों को गंभीरता से लेते हुए अबउत्तर प्रदेश पुलिस के भीतर स्पेशल वीआईपी प्रोटेक्शन फोर्स/विशेष सुरक्षा टीम बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। शासन स्तर से निर्देश जारी हो चुके हैं और चयन प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, एडिशनल एसपी से लेकर उप निरीक्षक (दारोगा) स्तर तक के अफसरों और कर्मियों से आवेदन मांगे गए हैं। चयनित पुलिसकर्मियों को इसी महीने मेघालय में हाई-टेक ट्रेनिंग दी जाएगी, जहां उन्हें वीआईपी मूवमेंट की बारीकियां, काफिले की रणनीति, संभावित खतरे की पहचान, भीड़ नियंत्रण, आपात स्थिति में त्वरित रिस्पॉन्स और सुरक्षा प्रोटोकॉल के सख्त पालन जैसी स्किल्स पर विशेष रूप से तैयार किया जाएगा। 

गोरखपुर मॉडल अब पूरे प्रदेश में

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए गोरखपुर में पहले ही एक विशेष वीआईपी सुरक्षा टीम गठित की जा चुकी है, जो अब तक कई बड़े और संवेदनशील कार्यक्रमों में अपनी क्षमता साबित कर चुकी है। अब इसी सफल गोरखपुर मॉडल को पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करने की तैयारी है। योजना के तहत प्रदेश के हर जिले में एक-एक डेडिकेटेड वीआईपी प्रोटेक्शन यूनिट बनाई जाएगी, जो जिले में आने वाले मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, न्यायिक अधिकारियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों की सुरक्षा की कमान संभालेगी। 

सामान्य ड्यूटी से अलग रहेगी स्पेशल टीम

मेघालय में होने वाली ट्रेनिंग के दौरान पुलिसकर्मियों को आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल, क्लोज प्रोटेक्शन तकनीक, इंटेलिजेंस इनपुट पर काम, और संभावित खतरे को पहले ही निष्क्रिय करने की रणनीतियों का अभ्यास कराया जाएगा। साथ ही, तनावपूर्ण परिस्थितियों में सही निर्णय लेने के लिए मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि भीड़ और आपात स्थिति में टीम का रिस्पॉन्स तेज और नियंत्रित रहे। पुलिस विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ट्रेनिंग पूरी करने के बाद चयनित पुलिसकर्मियों को सामान्य ड्यूटी से अलग रखा जाएगा और उन्हें सिर्फ वीआईपी सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां दी जाएंगी। इससे सुरक्षा व्यवस्था में निरंतरता बनी रहेगी और हर बार अलग-अलग स्टाफ जुटाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। सरकार का मानना है कि अलग से प्रशिक्षित फोर्स होने पर सुरक्षा व्यवस्था ज्यादा प्रभावी, प्रोफेशनल और एक्शन-ओरिएंटेड हो सकेगी। UP News

संबंधित खबरें