UPSC के 100 साल पूरे होने पर PM मोदी ने भर्ती प्रक्रिया में बदलाव और भविष्य की जरूरतों के अनुसार चयन मानकों को विकसित करने पर जोर दिया। जानें पूरी खबर।

संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर लिए हैं। देश की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती संस्थाओं में शामिल UPSC के शताब्दी समारोह के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भर्ती प्रक्रिया और भविष्य की सिविल सेवा को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय की जरूरतों को देखते हुए चयन प्रक्रिया में भी बदलाव जरूरी होगा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सिविल सर्विस में ऐसे युवाओं को लाया जाना चाहिए, जो केवल सरकारी पद हासिल करने के लिए नहीं बल्कि लोगों की सेवा करने की भावना के साथ आगे आएं।
UPSC के 100 साल पूरे होने के मौके पर 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर UPSC की 100 साल की यात्रा और आने वाले समय में सिविल सेवाओं की भूमिका पर चर्चा हुई। UPSC की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। समय के साथ यह संस्था विकसित होकर संविधान के तहत काम करने वाला स्वतंत्र संवैधानिक निकाय बनी। लोक सेवा आयोगों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान संविधान के भाग XIV में अनुच्छेद 315 से 323 तक दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए चयन के मानकों और भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करना होगा। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षा का उद्देश्य केवल यह पता लगाना नहीं होना चाहिए कि उम्मीदवार कितना जानता है, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि वह युवा सिविल सेवा में क्यों आना चाहता है। प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक सेवा और सार्वजनिक पद के बीच अंतर पर भी जोर दिया। उनके अनुसार सिविल सर्विस में ऐसे युवाओं का चयन होना चाहिए जो Public Office की बजाय Public Service की भावना से प्रेरित हों। उन्होंने UPSC और राज्य लोक सेवा आयोगों के लिए भी भविष्य की जरूरतों के अनुसार चयन प्रक्रिया को विकसित करने की बात कही।
UPSC के शताब्दी समारोह के दौरान आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने भी परीक्षा सुधार को लेकर महत्वपूर्ण बातें रखीं। उन्होंने कहा कि परीक्षा में उम्मीदवारों की reasoning, spontaneous thinking और अस्पष्ट परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता को समझने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य ऐसे जवाबों को प्राथमिकता देना है जो केवल पहले से तैयार या रटे हुए मॉडल उत्तरों को दोहराने पर आधारित न हों।
UPSC की भर्ती प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल भी लगातार बढ़ रहा है। PIB की जानकारी के मुताबिक आयोग ने 2025 में Universal Registration Number शुरू किया। इसके अलावा randomised interview boards, Candidate Helpdesk और परीक्षा केंद्रों के विस्तार जैसे कदम भी उठाए गए हैं। 2026 में Civil Services Preliminary Examination के दौरान AI आधारित facial authentication का इस्तेमाल बड़े स्तर पर किया गया। PIB के अनुसार 24 मई 2026 को आयोजित परीक्षा में करीब 5.50 लाख उम्मीदवारों को इस व्यवस्था के तहत कवर किया गया। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की पहचान और सुरक्षा को मजबूत करना था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में Time Certainty की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि परीक्षा चक्र को कम करने की दिशा में काम होना चाहिए, लेकिन इसके लिए परीक्षा के मानकों से समझौता नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक लंबी चलने वाली परीक्षा प्रक्रिया अभ्यर्थियों और उनके परिवारों पर कोचिंग, किराए और यात्रा जैसे खर्चों का बोझ बढ़ा सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि समय पर पूरी होने वाली परीक्षा प्रक्रिया अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिशा में तकनीक और बेहतर व्यवस्थाओं का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने भविष्य की प्रशासनिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले समय में सिविल सेवकों के सामने नई तरह की चुनौतियां होंगी। इनमें AI, सूचना युद्ध, deepfakes, algorithmic bias और climate justice जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे में उन्होंने चयन प्रक्रिया में complex problem-solving और foresight जैसी क्षमताओं को महत्व देने की बात कही। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में प्रशासन को Pro-People, Pro-Active और Good Governance के सिद्धांतों के साथ आगे बढ़ना होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले समय में नागरिकों की अपेक्षाएं बदलेंगी और प्रशासन को भी उसी के अनुसार अपनी कार्यप्रणाली विकसित करनी होगी।
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शताब्दी समारोह के दौरान UPSC की स्वतंत्रता, निष्पक्षता, योग्यता, गोपनीयता और निष्पक्ष प्रक्रिया जैसे मूल मूल्यों को बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में आयोग को नई चुनौतियों के अनुसार अपनी व्यवस्था को मजबूत करना होगा, लेकिन उसकी बुनियादी विश्वसनीयता से समझौता नहीं होना चाहिए। UPSC के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने भी आयोग के आगे के काम के लिए Trust, Transparency और Technology को प्रमुख आधार बताया। उन्होंने बताया कि UPSC हर साल करीब 250 अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाएं आयोजित करता है। आयोग ने परीक्षा और भर्ती व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को भी लगातार बढ़ाया है।
इस तरह UPSC के 100 साल पूरे होने का यह अवसर सिर्फ संस्था के इतिहास को याद करने तक सीमित नहीं रहा। शताब्दी समारोह में आने वाले वर्षों की भर्ती व्यवस्था, परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक, उम्मीदवारों की क्षमताओं और भविष्य की सिविल सर्विस की जरूरतों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री के संबोधन से यह संकेत मिला कि आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया को बदलती प्रशासनिक और तकनीकी जरूरतों के अनुसार विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
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