क्या बिहार का वैशाली जिला देश के नए इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में उभरने जा रहा है ? क्या बेंगलुरु की तर्ज पर यहां 1,100 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी विकसित होने से राज्य की औद्योगिक तस्वीर बदल सकती है ?

National News: बिहार के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की तैयारी है। राज्य के वैशाली जिले में बेंगलुरु की तर्ज पर करीब 1,100 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी विकसित की जाएगी। राजापाकर क्षेत्र में प्रस्तावित इस परियोजना में देश-विदेश की इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित किया जा रहा है। यहां मोबाइल फोन, स्मार्ट टीवी, चिप, कंप्यूटर पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज सहित कई उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना से करीब 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश आने का अनुमान है। इसके अलावा लगभग एक लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। दक्षिण कोरिया की एक कंपनी के प्रतिनिधियों के दौरे के बाद इस परियोजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की दिलचस्पी भी चर्चा में है।
यह भी पढ़ें :उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या के पति उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार
वैशाली जिले के राजापाकर में प्रस्तावित इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी को बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी मॉडल की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इसके लिए बिहार सरकार का उद्योग विभाग तैयारी कर रहा है। विभाग की टीम बेंगलुरु जाकर वहां विकसित औद्योगिक ढांचे का अध्ययन भी कर चुकी है। इस इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी में मोबाइल फोन, चिप, एलईडी बल्ब, कंप्यूटर पार्ट्स, डिजिटल कैमरा, टेलीविजन, स्मार्ट टीवी और स्मार्ट वॉच बनाने वाली कंपनियों को जगह देने की योजना है। इसके साथ ही मेडिकल और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्माण से जुड़ी इकाइयों को भी यहां निवेश के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
इसे भी पढ़ें : कन्हैयालाल हत्याकांड :राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपियों को नहीं दी राहत, UAPA बरकरार
वैशाली इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी को बिहार में बड़े औद्योगिक निवेश के केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। परियोजना से करीब 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश आने का अनुमान लगाया गया है। इससे स्थानीय युवाओं के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों के कुशल और तकनीकी पेशेवरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। सरकार की योजना आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को यहां लाने की है। इसके लिए इंफोसिस, विप्रो और टीसीएस जैसी कंपनियों को आमंत्रित करने की तैयारी की जा रही है। एचसीएल और टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों को भी इस औद्योगिक क्षेत्र से जोड़ने की संभावना जताई गई है।
वैशाली जिले के राजापाकर, जंदाहा और महुआ प्रखंड क्षेत्रों में करीब 1,243 एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना है। इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी और राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) इसी औद्योगिक विकास योजना का हिस्सा होंगे। प्रस्तावित योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के लिए करीब 1,100 एकड़ और निफ्टेम के लिए लगभग 100 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, औद्योगिक क्षेत्र के लिए 485 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है, जबकि शेष भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है।
इस इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी की खासियत कंपनियों को मिलने वाली प्लग एंड प्ले सुविधा होगी। इसके तहत कंपनियों को जरूरी औद्योगिक ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे मशीनें स्थापित कर जल्द उत्पादन शुरू कर सकेंगी। इस व्यवस्था से कंपनियों को शुरुआती बुनियादी ढांचा तैयार करने में लगने वाला समय और खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।मोबाइल फोन, स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य तकनीकी उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के लिए यह सुविधा निवेश को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
बिहार में एनडीए सरकार के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राज्य दौरा प्रस्तावित बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 21 नवंबर को वैशाली जिले के राजापाकर क्षेत्र के जाफरपट्टी में उनकी सभा प्रस्तावित है। इस दौरान प्रधानमंत्री इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पार्क और राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम) के निर्माण कार्य का शुभारंभ कर सकते हैं। हालांकि, इस कार्यक्रम की अंतिम आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत कार्यक्रम के आधार पर ही इसे निश्चित माना जाना चाहिए।
वैशाली में इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी विकसित होने से बिहार को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के राष्ट्रीय नक्शे पर नई पहचान मिलने की संभावना है। इससे राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने, तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं को रोजगार देने और स्थानीय स्तर पर उत्पादन इकाइयां स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
विज्ञापन