राजस्थान में एक लाख से ज्यादा रसोइए बिना वेतन, बजट केंद्र–राज्य बजट से उम्मीद
केंद्र सरकार 2026 बजट रविवार (1 फरवरी 2026) को रसोइयों की मांग है कि केंद्र और राज्य सरकारें बजट में उनके मानदेय में बढ़ोतरी करेंगी की नहीं इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने डबल इंजन की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है।

RAJSTHAN NEWS : केंद्र की मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का आम बजट 1 फरवरी 2026 को पेश होगा, जबकि इसके करीब 10 दिन बाद राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार राज्य का बजट लाएगी। इन दोनों बजटों से प्रदेश के करीब 1 लाख 14 हजार सरकारी स्कूल रसोइयों को बड़ी उम्मीदें हैं, जो पिछले सात महीनों से बिना भुगतान काम कर रहे हैं।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील (अब पीएम पोषण योजना) के तहत बच्चों के लिए खाना बनाने वाले रसोइयों को वर्तमान में मात्र 2297 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। इसमें 600 रुपये केंद्र सरकार और 1697 रुपये राज्य सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यह राशि रोजाना औसतन करीब 76 रुपये बैठती है। हैरानी की बात यह है कि पिछले करीब 16 वर्षों से इस मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। रसोइयों का आरोप है कि चालू शैक्षणिक सत्र में अब तक उन्हें एक भी रुपये का भुगतान नहीं मिला है, जबकि वे नियमित रूप से स्कूलों में भोजन तैयार कर रहे हैं। वहीं, छुट्टियों के नाम पर उनके मानदेय में कटौती भी की जाती है।
बजट से क्या चाहते हैं रसोइए
बता दें कि रसोइयों की मांग है कि केंद्र और राज्य सरकारें बजट में उनके मानदेय में बढ़ोतरी करें और उन्हें कम से कम न्यूनतम मजदूरी के बराबर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। रसोइयों का कहना है कि मौजूदा राशि में परिवार का गुजारा करना बेहद मुश्किल है।
महिला वित्त मंत्रियों से उम्मीद
बता दें कि रसोइयों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राजस्थान की वित्त मंत्री दिया कुमारी से मानदेय बढ़ाने की मांग की है। चूंकि रसोइयों में बड़ी संख्या महिलाओं की है और केंद्र व राज्य दोनों जगह वित्त मंत्री महिलाएं हैं, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि इस बार बजट में उनके लिए कोई राहत जरूर मिलेगी।
रसोइयों के नेता का बयान
बता दें कि राज्य के मिड डे मील रसोइयों के नेता एचएस चौधरी ने कहा कि पिछले सात महीनों से हमें एक भी पैसे का भुगतान नहीं हुआ है। रोजाना हम सबसे पहले स्कूल पहुंचते हैं और ताला बंद होने के बाद ही लौटते हैं। खाना बनाने के साथ-साथ हमसे साफ-सफाई और अन्य काम भी कराए जाते हैं, लेकिन इसके बदले सम्मानजनक मेहनताना नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में रोजाना सौ रुपये से भी कम की कमाई होने के कारण लोगों को अपने भुगतान के बारे में बताने में भी शर्म आती है।
सियासी बयानबाजी तेज
बता दें कि इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने डबल इंजन की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि उनकी सरकार के दौरान कई बार रसोइयों का मानदेय बढ़ाया गया था। कांग्रेस विधायक रफीक खान ने कहा कि भाजपा सरकारों को भी रसोइयों के साथ न्याय करना चाहिए। RAJSTHAN NEWS
RAJSTHAN NEWS : केंद्र की मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का आम बजट 1 फरवरी 2026 को पेश होगा, जबकि इसके करीब 10 दिन बाद राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार राज्य का बजट लाएगी। इन दोनों बजटों से प्रदेश के करीब 1 लाख 14 हजार सरकारी स्कूल रसोइयों को बड़ी उम्मीदें हैं, जो पिछले सात महीनों से बिना भुगतान काम कर रहे हैं।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील (अब पीएम पोषण योजना) के तहत बच्चों के लिए खाना बनाने वाले रसोइयों को वर्तमान में मात्र 2297 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। इसमें 600 रुपये केंद्र सरकार और 1697 रुपये राज्य सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यह राशि रोजाना औसतन करीब 76 रुपये बैठती है। हैरानी की बात यह है कि पिछले करीब 16 वर्षों से इस मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। रसोइयों का आरोप है कि चालू शैक्षणिक सत्र में अब तक उन्हें एक भी रुपये का भुगतान नहीं मिला है, जबकि वे नियमित रूप से स्कूलों में भोजन तैयार कर रहे हैं। वहीं, छुट्टियों के नाम पर उनके मानदेय में कटौती भी की जाती है।
बजट से क्या चाहते हैं रसोइए
बता दें कि रसोइयों की मांग है कि केंद्र और राज्य सरकारें बजट में उनके मानदेय में बढ़ोतरी करें और उन्हें कम से कम न्यूनतम मजदूरी के बराबर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। रसोइयों का कहना है कि मौजूदा राशि में परिवार का गुजारा करना बेहद मुश्किल है।
महिला वित्त मंत्रियों से उम्मीद
बता दें कि रसोइयों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राजस्थान की वित्त मंत्री दिया कुमारी से मानदेय बढ़ाने की मांग की है। चूंकि रसोइयों में बड़ी संख्या महिलाओं की है और केंद्र व राज्य दोनों जगह वित्त मंत्री महिलाएं हैं, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि इस बार बजट में उनके लिए कोई राहत जरूर मिलेगी।
रसोइयों के नेता का बयान
बता दें कि राज्य के मिड डे मील रसोइयों के नेता एचएस चौधरी ने कहा कि पिछले सात महीनों से हमें एक भी पैसे का भुगतान नहीं हुआ है। रोजाना हम सबसे पहले स्कूल पहुंचते हैं और ताला बंद होने के बाद ही लौटते हैं। खाना बनाने के साथ-साथ हमसे साफ-सफाई और अन्य काम भी कराए जाते हैं, लेकिन इसके बदले सम्मानजनक मेहनताना नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में रोजाना सौ रुपये से भी कम की कमाई होने के कारण लोगों को अपने भुगतान के बारे में बताने में भी शर्म आती है।
सियासी बयानबाजी तेज
बता दें कि इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस ने डबल इंजन की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि उनकी सरकार के दौरान कई बार रसोइयों का मानदेय बढ़ाया गया था। कांग्रेस विधायक रफीक खान ने कहा कि भाजपा सरकारों को भी रसोइयों के साथ न्याय करना चाहिए। RAJSTHAN NEWS












