Noida News: एसटीएफ को उसके पास से फर्जी आधार कार्ड मिला है जबकि उसके 12 बैंक खातों की जानकारी भी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब इन खातों के लेन-देन, हवाला कनेक्शन और भारत में उसके नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।

नोएडा में अवैध रूप से रह रहे चीनी नागरिक लियाओ लोंगहुई को लेकर जांच में बड़े खुलासे सामने आए हैं। नोएडा एसटीएफ की जांच में पता चला है कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपनी पहचान बदली और करीब छह साल तक भारत में रहा। एसटीएफ को उसके पास से फर्जी आधार कार्ड मिला है जबकि उसके 12 बैंक खातों की जानकारी भी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब इन खातों के लेन-देन, हवाला कनेक्शन और भारत में उसके नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान एसटीएफ को लियाओ लोंगहुई के नोएडा सेक्टर-93 स्थित घर से एक आधार कार्ड मिला। जांच में सामने आया कि यह आधार कार्ड नागालैंड के कोहिमा के एक पते पर बनवाया गया था। इस दस्तावेज में उसका नाम सैमुएल दर्ज था। एसटीएफ को शक है कि उसने इसी फर्जी पहचान के आधार पर अन्य भारतीय दस्तावेज भी हासिल किए होंगे। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या उसने इसी पहचान के जरिए भारतीय पासपोर्ट भी बनवाया था या नहीं।
जांच के मुताबिक लियाओ लोंगहुई साल 2018 में भारत आया था। उसका वीजा वर्ष 2020 में समाप्त हो गया था लेकिन इसके बाद भी वह भारत में ही रहा। आरोप है कि वीजा खत्म होने के बाद उसने अवैध तरीके से अपनी पहचान बदलने की कोशिश की और फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। एसटीएफ अब इस बात की भी जांच कर रही है कि वह इतने लंबे समय तक किन लोगों के संपर्क में था और उसकी गतिविधियां क्या थीं।
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एसटीएफ की जांच में लोंगहुई के 12 बैंक खातों की जानकारी सामने आई है। इनमें से तीन बैंक खातों को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है। बाकी खातों को भी फ्रीज करने की प्रक्रिया चल रही है। जांच एजेंसियां इन बैंक खातों में हुए लेन-देन की जानकारी जुटा रही हैं। खासतौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इन खातों का इस्तेमाल हवाला या अवैध धन के लेन-देन के लिए किया गया था।
एसटीएफ को शक है कि लियाओ लोंगहुई के जरिए बड़ी रकम विदेश भेजी गई हो सकती है। इसी एंगल से हवाला नेटवर्क की जांच की जा रही है। एजेंसियां उसके मोबाइल फोन और लैपटॉप की जांच कर रही हैं। डिजिटल डिवाइस से मिली जानकारी के आधार पर उसके संपर्कों और गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि लोंगहुई कुछ अन्य चीनी नागरिकों के संपर्क में था। एसटीएफ को उसके डिजिटल उपकरणों से ऐसे संकेत मिले हैं कि वह कुछ लोगों के विदेश यात्रा से जुड़े इंतजाम भी कर रहा था। अब एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नोएडा और आसपास के इलाकों में कितने विदेशी नागरिक बिना अनुमति के रह रहे हैं और उनकी गतिविधियां क्या हैं।
नोएडा एसटीएफ इससे पहले भी कई चीनी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। जांच एजेंसी अब तक 12 चीनी नागरिकों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें से कुछ पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पहचान हासिल करने के आरोप भी लगे हैं। इस पूरे मामले की जांच में उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, नागालैंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असम और दिल्ली की एजेंसियां भी सहयोग कर रही हैं।
जांच एजेंसियां लियाओ लोंगहुई के संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं। जांच में सामने आया है कि उसके साथ पूर्वोत्तर राज्यों की दो युवतियां रह रही थीं। एजेंसियां उनकी भूमिका और लोंगहुई से उनके संबंधों की जांच कर रही हैं। इससे पहले भी कुछ मामलों में चीनी नागरिकों के स्थानीय संपर्कों को लेकर जांच हो चुकी है।
जानकारी के मुताबिक, एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि नोएडा और हैदराबाद में कुछ चीनी नेटवर्क सक्रिय रहे हैं। इनमें ऑनलाइन ठगी और संदिग्ध ऐप से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। जांच एजेंसियां ऐसे नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन की जांच के बाद ही पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
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