क्या नोएडा में भी अब वाराणसी और हरिद्वार जैसी भव्य यमुना आरती की परंपरा शुरू होने जा रही है ? आगामी 7 नवंबर 2026 को नोएडा के सेक्टर-94 स्थित यमुना तट पर श्री यमुना सनातन ज्योति महासंगम-2026 का आयोजन होगा।

Noida News : उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर नोएडा में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को एक नई पहचान मिलने जा रही है। अब तक हरिद्वार में मां गंगा की हर की पौड़ी और वाराणसी के गंगा घाटों पर होने वाली भव्य गंगा आरती की तर्ज पर नोएडा में भी मां यमुना की महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इसकी शुरुआत 7 नवंबर को होने जा रहे ‘श्री यमुना सनातन ज्योति महासंगम-2026’ से होगी। इस अवसर पर यमुना तट 21 हजार दीपों की रोशनी से जगमगाएगा और काशी से आए 11 विद्वान वैदिक आचार्य वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां यमुना की भव्य महाआरती करेंगे। नोएडा के सेक्टर-94 स्थित यमुना तट पर आयोजित होने वाला यह महासंगम शहर के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। आयोजन के माध्यम से नोएडा में यमुना आराधना की ऐसी परंपरा विकसित करने का संकल्प लिया गया है, जो आने वाले समय में शहर की आध्यात्मिक पहचान बन सके।
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काशी की गंगा आरती और अयोध्या की दीपोत्सव परंपरा देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती है। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। अब इसी तरह का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण नोएडा में भी तैयार करने की पहल की जा रही है। श्री यमुना सनातन ज्योति महासंगम के दौरान 21 हजार दीपों का सामूहिक दीपदान किया जाएगा। यमुना तट पर दीपों की कतारें सजाई जाएंगी। वैदिक मंत्रों, शंखध्वनि और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच काशी के 11 विद्वान आचार्य मां यमुना की महाआरती करेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य केवल एक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि नोएडा और दिल्ली-एनसीआर के लोगों को यमुना नदी के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व से जोड़ना भी है।
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इस महासंगम का सबसे प्रमुख आकर्षण काशी से आने वाले 11 विद्वान वैदिक आचार्यों द्वारा की जाने वाली मां यमुना की महाआरती होगी। वाराणसी के गंगा घाटों पर होने वाली आरती की परंपरा से प्रेरित इस आयोजन में वैदिक विधि-विधान के अनुसार मां यमुना की आराधना की जाएगी। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में वैदिक महायज्ञ, सामूहिक दीपदान और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी। धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भारतीय सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराओं का संदेश दिया जाएगा।
आयोजन के मुख्य संरक्षक एवं अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौशाला अनुसंधान संस्थान के संस्थापक तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य डॉ. गुंजी गौतम ऋषि ने बताया कि महासंगम के आयोजन के पीछे सनातन संस्कृति के संवर्धन के साथ-साथ यमुना की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण उद्देश्य भी है। उन्होंने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर है। यमुना के धार्मिक महत्व के साथ उसकी स्वच्छता और संरक्षण के प्रति भी समाज को जागरूक करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि संस्था का संकल्प है कि काशी और अयोध्या की तर्ज पर नोएडा में भी मां यमुना की आराधना और संरक्षण की एक स्थायी सांस्कृतिक परंपरा विकसित हो। इस पहल के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं यूनिवर्सल ग्रुप के प्रेसिडेंट श्री दिनेश जैन तथा संस्था के राष्ट्रीय महासचिव ठा. मान सिंह चौहान ने आयोजन की तैयारियों की जानकारी देते हुए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-एनसीआर के नागरिकों से परिवार सहित महासंगम में शामिल होने की अपील की है। आयोजकों का कहना है कि इस आयोजन को जनभागीदारी से एक व्यापक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अभियान का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
नोएडा तेजी से विकसित होता हुआ आधुनिक शहर है। यहां देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से आकर लाखों लोग बसे हुए हैं। ऐसे शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से सामुदायिक जुड़ाव बढ़ाने की संभावनाएं भी हैं। यदि श्री यमुना सनातन ज्योति महासंगम के माध्यम से यमुना आरती की नियमित परंपरा विकसित होती है, तो आने वाले समय में सेक्टर-94 का यमुना तट नोएडा की एक नई धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बन सकता है। हरिद्वार और वाराणसी की गंगा आरती की तरह नोएडा में यमुना आरती शुरू करने की यह पहल शहर के लिए एक नई शुरुआत है। अब देखना होगा कि 7 नवंबर का यह आयोजन किस प्रकार नोएडा के लोगों को यमुना की आस्था, स्वच्छता और संरक्षण के एक साझा अभियान से जोड़ता है।
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