
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार यूपी की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थ व्यवस्था बनाने पर फोकस कर रही है। GDP रैंकिंग की ताजा रिपोर्ट में नोएडा पहले स्थान पर है और लखनऊ दूसरे स्थान पर है। बता दें कि इसमें कानपुर की हिस्सेदारी घटी है। प्रदेश के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 14 जिलों की हिस्सेदारी लगातार कम हो रही है, जबकि 10 जिलों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। जिलों की जीडीपी रैंकिंग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार नोएडा सर्वाधिक हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर हैं। वहीं लखनऊ और आगरा दूसरे तथा तीसरे स्थान पर हैं। हालांकि, पिछले वर्ष की तुलना में इन दोनों जिलों की राज्य की जीडीपी में हिस्सेदारी में गिरावट आई है। आपको बता दें कि वहीं प्रदेश की जीडीपी 19,16,913.42 करोड़ रुपये हो गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी पूर्वी, बुंदेलखण्ड व केंद्रीय उत्तर प्रदेश की तुलना में सबसे ज्यादा है।
नोएडा शहर की बात करें तो जीडीपी के मामले में नोएडा उत्तर प्रदेश का नम्बर-वन शहर बन गया है। नोएडा की जीडीपी में भागीदारी 166073.92 करोड रुपये यानि 8.66 प्रतिशत है। इस सूची में लखनऊ -75762.73 करोड के साथ 3.95 प्रतिशत पर, आगरा - 69266.03 करोड के साथ 3.61 प्रतिशत पर, प्रयागराज - 63719.05 करोड के साथ 3.32 प्रतिशत पर, मेरठ - 59167.55 करोड के साथ 3.09 प्रतिशत पर, गाजियाबाद- 55677.70 करोड के साथ 2.90 प्रतिशत पर, कानपुुर नगर- 54640.53 करोड के साथ 2.85 प्रतिशत पर, बरेली - 52423.42 करोड के साथ 2.73 प्रतिशत पर, बिजनौर- 38926.58 करोड के साथ 2.03 प्रतिशत पर तथा बुलंदशहर- 38044.70 करोड के साथ 1.98 प्रतिशत पर मौजूद है।
इस विश्लेषण से यह प्रमाणित होता है कि नोएडा विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। साथ ही यह भी प्रमाणित होता है कि नोएडा प्राधिकरण पूरी सिद्दत के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस सपने को साकार कर रहा है जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना देखा है। नोएडा को उत्तर प्रदेश का ग्रोथ इन्जन बनाने में नोएडा प्राधिकरण कोई कमी नहीं छोड रहा है।
निवेश से लेकर निर्यात के क्षेत्र में अव्वल नोएडा ने एक नए कीर्तिमान की तरफ कदम बढ़ा दिया है। नोएडा ने वर्ष 2024-25 में 70,155 करोड़ रुपये के साफ्टवेयर का निर्यात करके यह इतिहास रचा। नोएडा में मौजूद सॉफ्टवेयर टेक्नॉलजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) से जुड़ी इकाइयों ने केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे भारत के तकनीकी उद्योग को सशक्त बनाने का काम किया है। देश में सॉफ्टवेयर निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1991 में नोएडा में स्थापित एसटीपीआई अब इनोवेशन, स्टार्टअप सशक्तिकरण और डिजिटल समावेशन का मजबूत स्तंभ बन गया है। एसटीपीआई के महानिदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि एसटीपीआई के लिए यह गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि नोएडा प्राधिकरण लगातार हमारे काम में मददगार रहा है।
एसटीपीआई ने तीन केंद्रों से अपनी शुरुआत की थी, जब आईटी उद्योग शुरुआती दौर में था। अब एसटीपीआई के देशभर में 67 केंद्र हैं, जिन्होंने आईटी उद्योग को बदलने में अहम भूमिका निभाई है। वर्ष 2024-25 में एसटीपीआई से पंजीकृत इकाइयों का निर्यात 10 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। भारत सरकार के निर्देशानुसार, एसटीपीआई टियर-2 और टियर-3 शहरों में आईटी उद्योग के विस्तार के लिए काम कर रहा है, ताकि समावेशी विकास हो सके। इसके साथ ही एसटीपीआई अब तक 1400 से ज्यादा स्टार्टअप्स का समर्थन किया है। एसटीपीआई इकोसिस्टम से जुड़े स्टार्टअप्स ने अब तक निवेशकों से 574 करोड़ रुपये का फंड जुटाया है। 44 प्रतिशत स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जिनमें से कई छोटे शहरों और कस्बों से आती हैं।
एसटीपीआई के महानिदेशक ने नोएडा प्राधिकरण के विकासोन्मुख प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि एसटीपीआई नोएडा निदेशालय उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आईटी उद्योग और टेक स्टार्टअप्स के विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। बीते वर्षों में इसने देहरादून, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज और आगरा में छह उप-केंद्र शुरू करके अपने नेटवर्क का विस्तार किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में एसटीपीआई-नोएडा के तहत पंजीकृत कंपनियों ने 70,155 करोड़ का सॉफ्टवेयर निर्यात किया है। नोएडा प्राधिकरण के सहयोग के बिना यह काम संभव नहीं था।
उत्तर प्रदेश का नोएडा शहर निवेशकों की पसंदीदा जगह बनकर उभरा है। PropEquity की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2025 तक नोएडा में नए प्रोजेक्ट्स की कीमतों में औसतन 152 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यानी सिर्फ चार साल में दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि नोएडा बडी तेजी से हाई रिटर्न जोन बनता जा रहा है। इस कारण नोएडा दुनिया भर के निवेशकों की पहली पसन्द बन रहा है।
नोएडा प्राधिकरण विकास का बड़ा खाका लेकर आगे बढ़ रहा है। यही कारण है कि नोएडा के नागरिकों का जीवन स्तर भी लगातार उच्च श्रेणी का बन रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशन में किए जा रहे नोएडा प्राधिकरण के तमाम काम धरातल पर परिणाम के रूप में सामने आ रहे हैं। बात प्रति व्यक्ति आमदनी की करें तो नोएडा इस मामले में भी अव्वल स्थान पर कायम हो गया है। देश की राजधानी दिल्ली की बगल में स्थापित नोएडा शहर कमाई यानि धन के मामले में सबसे आगे है। हाल ही में सामने आए एक सर्वे में उत्तर प्रदेश के टॉप-10 शहरों में नोएडा सर्वोच्च शिखर पर स्थापित है। नोएडा शहर में औसत प्रति व्यक्ति आय 6 लाख रूपये है।
उत्तर प्रदेश के सभी टॉप-10 शहरों की जानकारी पढऩे से पहले यह जान लीजिए कि सर्वोच्च शिखर पर मौजूद नोएडा शहर को यूपी का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। यह नोएडा शहर ही है जिसे उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी भी कहा जाता है। वर्ष-1976 में 17 अप्रैल 1976 को स्थापित हुए नोएडा शहर के बारे में बड़ी ही सटीक भविष्यवाणी की गई थी। इस भविष्यवाणी में कहा गया था कि ‘एक दिन नोएडा एशिया की सर्वश्रेष्ठ औद्योगिक नगरी बनेगा।’ अपनी स्थापना के 49 साल पूरे कर चुका नोएडा शहर वास्तव में ही आज एशिया की महत्वपूर्ण औद्योगिक नगरी व उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी बन चुका है। सर्वे के मुताबिक नम्बर-1 पर मौजूद नोएडा के बाद उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर का नंबर है। एक लाख 27 हजार रूपये प्रति व्यक्ति आमदनी के साथ मेरठ शहर दूसरे नंबर पर है। आगरा शहर की प्रति व्यक्ति आमदनी एक लाख 63 हजार 354 रूपये है। इस प्रकार आगरा तीसरे पायदान पर है। चौथे नंबर पर यूपी का एटा शहर है। छठां नंबर अमरोहा का है। Noida News :