
Noida News / जेवर। जेवर में पूरी तरह से अवैध रुप से चल रहे चौधरी मेडिकेयर सेंटर को अब पूरी तरह से खाली कराकर उस पर प्रशासन का ताला जड़ दिया गया है। आपको पता ही है कि चेतना मंच इस मामले को लगातार उठा रहा था। प्रशासन द्वारा अस्पताल को सील करने का दावा करने के बाद भी अस्पताल संचालक डा. अजीत चौधरी बेखौफ होकर अवैध अस्पताल चौधरी मेडिकेयर सेंटर को चला रहा था।
आपकेा बता दें कि 6 वर्षीय मासूम बच्चे माधव के दोनों हाथ काटने के जिम्मेदार जेवर में स्थित चौधरी मेडिकेयर अस्पताल की कारगुजारी को चेतना मंच ने विस्तार से उजागर किया था। चेतना मंच के न्यूज पोर्टल www.chetnamanch.com पर समाचार प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन ने दावा किया था कि चौधरी मेडिकेयर को सील कर दिया गया है। चेतना मंच को पता चला था कि सील केवल कागजों पर किया गया था। इस सूचना पर चेतना मंच ने बाकायदा वीडियो सबूत के साथ यह उजागर किया कि अवैध अस्पताल चौधरी मेडिकेयर अभी भी चल रहा है। चेतना मंच न्यूज पोर्टल का समाचार तथा चेतना मंच के यूट्यूब चैनल पर वीडियो प्रसारित होने के बाद जिला प्रशासन नींद से जागा और रविवार को पूरा अस्पताल परिसर खाली कराकर उस पर जिला प्रशासन का ताला जड़ दिया गया है।
इस बीच पता चला है कि इस मामले में कुछ दलाल किस्म के लोग सक्रिय हो गए है। ये दलाल मासूम बच्चे माधव के परिवार से समझौता करके चौधरी मेडिकेयर अस्पताल को तीसरी बार भी खुलवाना चाहते हैं। इसी साजिश के तहत रविवार को चौधरी मेडिकेयर अस्पताल के मालिक डा. अजीत चौधरी के कुछ दलाल मासूम माधव के गांव दीग हामिदपुर भी पहुंच गए थे। माधव के पिता योगेंद्र चौहान पर समझौते का दबाव भी बनाया गया। योगेंद्र चौहान ने साफ कह दिया है कि वह दोषी डाक्टर व उसके साथियों को सजा दिलवाने तक न्यायल के लिए संघर्ष करुंगा।
आपको बता दें कि 29 जून को चेतना मंच ने ” जेवर में अवैध रुप से बने अस्पाल ने छीन लिए एक मासूम के दोनो हाथ” शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार में बताया गया था कि जेवर कस्बे में चौधरी मेडिकेयर अस्पताल स्थित है। 23 जून को इस अस्पताल में दस्तमपुर गांव के रहने वाले सौरभ की पत्नी सीमा की डिलीवरी हुई थी। घर में नया मेहमान (बच्चा) आने से पूरे परिवार में खुशियां मनाई जा रही थीं। इसी खुशी में शरीक होने के लिए 6 वर्ष का बच्चा माधव अपने पिता योगेश के साथ अस्पताल गया था।
दरअसल, सीमा माधव की बुआ हैं। वह बच्चा अपनी बुआ व नवजात शिशु को देखने गया था। बुआ व शिशु से मिलकर यह बच्चा माधव अस्पताल की बालकनी में खेल रहा था। उस बालकनी के ठीक ऊपर बिजली की 11 हजार वोल्टेज (हाईटेंशन) की लाइन जा रही है। अचानक मासूम माधव उस बिजली की लाइन की चपेट में आ गया। बिजली का करंट इतना भयंकर था कि मासूम बच्चे के दोनों हाथ बस्ट (फट गए) हो गए। खुशी के माहौल में चारों तरफ चीख-पुकार मच गई।
परिवार वाले अपने कुछ मित्रों की मदद से आनन-फानन में बच्चे को ऑल इंडिया इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल सांईस (एम्स) में ले गए। मासूम माधव के पूरे शरीर में जहर फैलना शुरू हो गया था। उसकी जान बचाने के लिए एम्स के डाक्टरों को मासूम बच्चे माधव के दोनों हाथ काटने पड़े। यह बच्चा इस समय एम्स में जीवन और मौत से गुजर रहा है। Noida News
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