Noida News : बाल तस्करी, बाल श्रम व बाल विवाह एक अभिशाप : कैलाश सत्यार्थी
भारत
चेतना मंच
22 Nov 2025 06:55 PM
Noida News : एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ सोशियल साइंसेस के समाजिक कार्य विभाग द्वारा कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फांउडेशन के सहयोग के ‘‘एक्सेस टू जस्टिस प्रोजेक्ट’’ के 290 प्रोजेक्ट मैनेजर या डिस्ट्रीक्ट कोआर्डीनेटरों के लिए राष्ट्रीय स्तर के तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘‘एनश्योरिंग एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन’’ का आयोजन किया गया है। इस प्रशिक्षण में नोबेल शंाति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश भर के 252 जिलों से प्रतिभागी शामिल हुए।
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नोबेल शंाति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चे देश का भविष्य है और यह सुनिश्चित करना प्रत्येक नागरिक की समाजिक और नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए कि प्रत्येक बच्चे के अधिकारों की रक्षा की जाये और किसी भी बच्चे का शोषण ना हो। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी हर व्यक्ति के कंधे पर है और उनका एक ही लक्ष्य होना चाहिए यानी बच्चों को बाल तस्करी, बाल श्रम, बाल विवाह और समाज में प्रचलित अन्य समाजिक बुराईयों से मुक्त कराना। प्रतिभागियों को सलाह देते हुए उन्होनें कहा कि प्रत्येक दिन नई उर्जा के साथ अथक परिश्रम करें और अपने काम के माध्यम से अन्य लोगों के दिलों में करूणा और दया की लौ जलायें। सपने सदैव नये विचारों को जन्म देता है और व्यक्ति को बड़े आत्मविश्वास और स्वंय पर विश्वास के साथ आगे बढऩा चाहिए।
एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला ने कहा कि कई वंचित बच्चे पीडि़त और बालशोषण, बाल श्रम का शिकार बन रहे है। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में जहां जागरूकता की कमी है 10 से 12 वर्ष की उम्र में इनका विवाह कर दिया जाता है इसलिए यह और भी महत्वपूर्ण है कि देश के प्रत्येक नागरिक बच्चों को बचाने की जिम्मेदारी ले और बच्चों के शोषण को रोकें।
सामाजिक कार्यकर्ता और सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता भुवन ऋभु ने कहा कि पिछले तीन माह में हमारे अभियान के जरीए देश भर में लगभग 6200 बच्चे मुक्त किये गये है और 1732 एफआईआर दर्ज की गई जबकी वर्ष- 2021 में कुल 9000 बच्चे मुक्त कराये गये थे और लगभग 1050 एफआईआर दर्ज की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता रविकांत ने कहा कि हमें ध्येय स्थापित करना होगा कि बाल विवाह के स्तर को वर्ष- 2025 तक 10 प्रतिशत और कम किया जाये और वर्ष 2030 तक इस अभिशाप को समाप्त किया जा सकें।
इस मौके पर एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ सोशियल साइंसेस की निदेशक डा निरूपमा प्रकाश, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ सोशियल साइंसेस के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रशांत चौहान ने भी अपने विचार रखे।