
Noida News : एक साल नोएडा पुलिस द्वारा किए गए दो अलग-अलग एनकाउंटर के मामलों में पुलिसकर्मियों पर मजिस्ट्रेट जांच चल रही थी। इस जांच में 31 पुलिसकर्मियों को मजिस्ट्रेट जांच के बाद क्लीन चिट मिल गई है। क्लीन चिट मिलने के बाद पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली है।
एक साल तक चली जांच के बाद दोनों अलग-अलग एनकाउंटर में 31 के पुलिसकर्मियों को मजिस्ट्रेट की क्लीन लए चिट मिल गई है। गवाहों की गवाही को मुख्य आधार मानकर इस मामले में 31 पुलिसकर्मियों को मजिस्ट्रेट के द्वारा ये फैसला लिया गया है।
आपको बता दें कि पहला एनकाउंटर ग्रेटर नोएडा की बीटा 2 कोतवाली क्षेत्र में पिछले वर्ष हुआ था। जबकि दूसरा इसी वर्ष बिसरख कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत हुआ था। कोतवाली बोटा 2 क्षेत्र अंतर्गत पिछले वर्ष किराना व्यापारी मेघ सिंह के बेटे हर्ष का अपहरण कर बदमाशों ने 30 लाख की फिरौती वसूली थी। अपहरण कांड में शामिल बदायूं जिला निवासी मुख्य बदमाश शिवम यादव को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। पुलिस ने उसके कब्जे से फिरौती की रकम बरामद भी की थी। बदमाश का एनकाउंटर करने वाली टीम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुलाकात की थी। एनकाउंटर के बाद मामले में मजिस्ट्रेट जांच शुरू हुई। जांच में कहा गया कि एनकाउंटर के दौरान तत्कालीन बीटा 2 कोतवाली प्रभारी अनिल राजपूत की बुलेट प्रूफ जैकेट पर गोली लगी थी। मामले की जांच के दौरान स्वतंत्र गवाह रविंद्र, करतार, सुरेश और सादिर की गवाही को अहम माना गया था।
वहीं, दूसरा एनकाउंटर इसी वर्ष के पहले दिन यानी एक जनवरी को बिसरख कोतवाली क्षेत्र में हुआ था। एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक लाख का इनामी कपिल बसी मारा गया था। मुठभेड़ में मारा गया इनामी कपिल बसी बागपत जिले का रहने वाला था। कपिल बसी पर पूर्व से कई आपराधिक मामले दर्ज थे। इस मुठभेड़ में स्वतंत्र गवाह राजू, नरेंद्र और गौरव की गवाही को अहम माना गया। बताया जा रहा कि बदमाश की तरफ से चलाई गई थी। मुठभेड़ के दौरान दो गोलियां एसटीएफ के उप निरीक्षक अक्षय त्यागी को बोलेरो गाड़ी पर लगी थी। पुलिस और एसटीएफ की जवाबी कार्रवाई में कपिल मारा गया था।
आपको बता दें कि दो अलग-अलग मुठभेड़ की जांच मजिस्ट्रेट को सौंपी गई थी। जिसमें 31 पुलिसकर्मियों को इन मामलों में क्लीन चिट दे गई है। क्लीन चिट मिलने वालों में इंस्पेक्टर राकेश कुमार, इंस्पेक्टर अनिल राजपूत, सब इंस्पेक्टर अक्षय त्यागी, अंजनी रिह, सरिता मलिक, अनुज कुमार, मुठभेड़ में घायल हुए वरुण पंवार, चंदपाल और तत्कालीन एसओजी प्रभारी महिपराज समेत 31 पुलिसकर्मी शामिल है।
मिली जानकारी के अनुसार अपहरण कांड में मारे गए बदमाश शिवम के पिता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष जांच को गलत दिशा में मोड़ने की कोशिश की थी। उन्होंने बयान दिया था कि उसके बेटे का प्रापर्टी डीलर से लेनदेन था। लेकिन मजिस्ट्रेट जांच में ये बयान झूठा पाया गया। वहीं दूसरे मामले में एक लाख के इनामी बदमाश कपिल बसी की मां ने भी मजिस्ट्रेट जांच की मांग की थी। Noida News