Noida News : प्रेरणा विमर्श-2022 : फेंक न्यूज से समाज में फैलता है वैमनस्य : प्रो. सुरेश
कार्यशाला मे विचार व्यक्त करते मुख्य वक्ता।
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 04:40 AM
Noida : नोएडा। प्रेरणा शोध संस्थान न्यास, प्रेरणा जन सेवा न्यास और केशव संवाद पत्रिका की तरफ से नोएडा के सेक्टर-12 स्थित सरस्वती शिशु मन्दिर में पाँच दिवसीय प्रेरणा विमर्श-2022, मीडिया कॉन्क्लेव एवं फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन मीडिया शिक्षक एवं छात्र विमर्श विषय पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला के प्रथम सत्र में कैरियर समाज और राष्ट्र विषय पर विमर्श हुआ।
प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के तौर पर भोपाल के माखल लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ंने अपने व्यक्तव्य कैरियर समाज और राष्ट्र विषय पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि जीवन में कई बार अलग अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मेरे जीवन में भी इस तरह के कई चुनौतियां आई। जब मैं अधिक पैसे कमा सकता था। विदेशी मीडिया संस्थानों में काम करके डॉलर कमा सकता था लेकिन मैंने राष्ट्र सेवा को चुना। समाज के हित में राष्ट्र के हित में क्या करना है ये आपको तय करना है। तभी आप पत्रकारिता के मूल उद्श्यों को प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने जम्मू कश्मीर में हुए एक चुनावी रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि कैसे हुर्रियत के बंद के एलान के बाद जब वहां चुनाव हो रहे थे कुछ चैनल ये बताने कि कोशिश कर रहे थे कि हुर्रियत के कारण लोग वोटिंग करने नहीं आ रहे है और खाली बूथ दिखा रहे थे। जबकि कुछ चैनल पर वोटिंग करने आए लोगों की भारी भीड़ दिख रही थी। जाहिर है कि वे फेंक न्यूज दिखा रहे थे लोगों को गुमराह कर रहे थे। फेंक न्यूज से समाज में वैमनस्य फैलता है। आपको सामने आकर इस तरह के फेंक न्यूज को खण्डित करना पड़ेगा।
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मुख्य अतिथि के तौर पर डीडी न्यूज के वरिष्ठ सलाहकार संपादक अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि कैरियर आज निजी स्वार्थ तक समिट कर रह गया है। कैरियर के अंतर्गत हम सुख सुविधा या फिर परिवार को सुख सुविधा दिलाने तक संकुचित होकर रह गए है। सवाल उठता है कि क्या आज करियर में हम सिर्फ नौकरी के लिए आते हैं या कैरियर में राष्ट्र सेवा के लिए भी कोई स्थान है।आज ज्यादातर लोग पत्रकारिता में चमक दमक मान सम्मान के लिए आते हैं। लेकिन यदि आप देश और समाज के सेवा के लिए मीडिया में नहीं आते हैं तो फिर मीडिया से बेहतर कैरियर उपलब्ध है इसके लिए मीडिया में आने की आवश्यकता नहीं है। दूसरी तरफ ये भी है यदि आप पत्रकार बनेंगे तो देश की तस्वीर बदल देंगे तो ये भी उचित नहीं होगा। क्योंकि आज सभी मीडिया संस्थानों की अपनी एडिटोरियल पॉलिसी होती है आपको उसके अनुसार ही कार्य करना होता है। कई बार आपको इस बात को लेकर भी पीड़ा होगी कि आप पत्रकारिया में रहते हुए देश और राष्ट्र की सेवा नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन आपको सही समय का इंतजार करना चाहिए।
वहीं कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में भविष्य के भारत में नवोदित पत्रकारों की भूमिका विषय पर विर्मश हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता हरियाणा के उच्च शिक्षा परिषद के चैयरमैन प्रो. ब्रज किशोर कुठियाला ने की। उन्होंने कहा कि आज यहां आकर पता चला कि आज के नवोदित पत्रकारों की सोच क्या है। जो कुछ भी करना है वह राष्ट्रहित और मानव हित में करना है।
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नवोदित भारत अर्थ नया भारत नहीं है उसका पुनरोत्थान है। एक समय था जब हम दुनिया में सर्वश्रेष्ठ थे। लेकिन अंग्रेजों के समय यह समाप्त हो गया था। आज जब हम दुनिया के किसी देश में जाते हैं तो हमारे पासपोर्ट देखकर कहते हैं के कि ओह भारतीय, ओह हिन्दू, यही है भारत की असली तस्वीर है। जो हमें भारतीय होने पर गर्व करने का अवसर देता है। कल का भारत विशाल हृदय वाला बनने वाला है। समाज के क्षेत्र में अध्यात्म के क्षेत्र में अग्रसर होने वाला है।
मुख्य वक्ता के तौर पर भारतीय संचार संस्थान नई दिल्ली के महानिदेश प्रो. संजय द्विवेदी उपस्थित रहे। उन्होंने सत्र को सम्बोधित करते हुए नवोदित पत्रकारों से कहा कि सभी लोग खराब नहीं होते हैं। हर जगह कुछ न कुछ लोग गड़बड़ होते हैं। समाज में संवाद होना आवश्यक है। हमारा एक उपनिषद का नाम ही है प्रश्न उपनिषद। हमारे समाज में प्रश्न और संवाद का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। पत्रकारिता का उदेश्य सिर्फ सवाल पूछना नहीं है। उसका हल देना भी है।
मुख्य अतिथि के तौर पर दिल्ली विश्व विद्यालय के प्रोफेसर अवनिजेश अवस्थी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि कहा आज की तुलना में वह पत्रकार विशेष सफल थे जिन्होंने बिना किसी डिग्री के पत्रकारिता के क्षेत्र में काम किए। आज के डिग्री धारी पत्रकारों को जिस तथ्य और सत्य के बारे में पढ़ाया जाता है। बाद के समय में उन्हीं पत्रकारों के तथ्य और सत्य अलग अलग क्यों हो जाते हैं। जबकि सत्य तो एक ही होता है। अगर सच्ची पत्रकारिता करनी है तो सच बोलना होगा। सत्य दिखाना होगा। अगर आपको लगता है कि खबर दिखाने और बोलने से उसका असर होता है तो आपको सच दिखाना चाहिए।
कार्यशाला के तृतीय सत्र में नव मीडिया में राष्ट्रीय चेतना विषय पर विर्मश हुआ। सत्र की अध्यक्षता रायपुर के कुशाभाव ठाकरे पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के प्रो. बलदेव शर्मा जी ने की।
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इस दौरान बलदेव शर्मा ने नवोदित पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने सीखने की परंपरा पर बल दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सिर्फ सेलिब्रेटी के लिए पत्रकार नहीं बनना चाहिए। पत्रकार बनने के लिए जीवन लगाना पड़ता है। जीवन में तत्काल कुछ नहीं मिलता है। जिन्हें तत्काल सब कुछ चाहिए उसे पत्रकारिता छोड़ देना चाहिए। पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने वालों को निरन्तर सीखना ही पड़ेगा। है जो अपने जीवन में सबकुछ झोंक देते हैं अंत में उसे ही सब कुछ प्राप्त होता है। पत्रकारिता केवल लिखना नहीं है किसी राष्ट्र का नैतिक सम्वाद है।
मुख्य वक्ता के तौर पर लखनऊ के स्कूल ऑफ मीडिया एंड कम्यूनिकेशन, बीआर आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के डीन प्रो. गोविन्द पांडेय जी उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि नव मीडिया में पहले वन टू मेनी था अब मेनी टू मेनी है। और इसी से फेंक न्यूज का सिलसिला शुरू हो जाता है। नई मीडिया में अब आपको देखना होगा कि कौन सी न्यूज आपको देखना है और उसे आगे बढ़ाना है। कई बार हम बिना सोचे फेंक न्यूज को शेयर तो नहीं कर रहे हैं। आज हम एक्टिव दर्शक नहीं पेसिव दर्शक की तरह व्यवहार करते हैं। हम सिर्फ राष्ट्र और राष्ट्रवाद के नाम पर ही किसी को स्वीकार नहीं करे जब तक कि उसका कोई वैज्ञानिक आधार न हो।