नोएडा के राम अस्पताल में पुष्पा देवी की मौत के मामले में परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। CMO जांच में CECT, मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार प्रक्रिया से जुड़ी कई कमियां सामने आई हैं।

Noida News : नोएडा में स्थापित कुछ तथाकथित बड़े प्राइवेट अस्पतालों का बहुत बड़ा काला सच धन दौलत तथा प्रतिष्ठा की आड़ में छिपा हुआ है। प्राइवेट अस्पतालों के इस काले सच को उजागर करने वालों के मुँह पर ताला लगवाने में बहुत से हथकंड़े भी प्राइवेट अस्पतालों के मालिकों को अच्छी तरह से आते हैं। नोएडा में मकडज़ाल की तरह फैले हुए अस्पतालों के काले सच का हम यहां एक छोटे से उदाहरण से स्पष्ट कर रहे हैं
नोएडा के प्राइवेट अस्पतालों की बड़ी-बड़ी इमारतों के साए में बहुत बड़े-बड़े घपले तथा घोटाले दबे हुए हैं। इन्हीं घपले तथा घोटालों की कड़ी में नोएडा के सेक्टर-61 में स्थापित रामा अस्पताल का बड़ा सच बहुत ही कड़वा है। इस सच का सबसे कड़वा पहलू यह है कि रामा अस्पताल के डॉक्टरों ने एक अच्छी खासी स्वस्थ महिला को इलाज के नाम पर मार डाला। उस महिला का बेटा नोएडा से लेकर लखनऊ तक के सभी बड़े दरवाजे खटखटा रहा है। वह बेटा मांग कर रहा है कि उसकी माँ के हत्यारे डॉक्टरों को जेल में डाला जाए ताकि उसकी माँ की आत्मा को शांति मिल जाए। दुर्भाग्य से उस मासूम बेटे की चीख-पुकार प्राइवेट अस्पतालों को संरक्षण देने वालों के कानों तक पहुंच ही नहीं पा रही है।
आपको बता दें कि एक मां की मौत के बाद उसका बेटा पिछले कई महीनों से न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। मामला नोएडा के सेक्टर-61 स्थित राम अस्पताल से जुड़ा हुआ है, जहां छजारसी निवासी मोहित शर्मा की 52 वर्षीय मां पुष्पा देवी को 14 अप्रैल 2026 को हल्के बुखार और उल्टी की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मां की हालत में सुधार हो रहा था और उन्हें डिस्चार्ज करने की तैयारी थी, लेकिन इसके बाद कराई गई CECT (CT Contrast) जांच के बाद उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। मामले को लेकर मोहित शर्मा ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ गंभीर शिकायतें की हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गौतमबुद्धनगर की ओर से गठित जांच समिति की जांच आख्या में भी अस्पताल के उपचार एवं दस्तावेजी प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर बिंदु दर्ज किए गए हैं। Noida News :
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मोहित शर्मा के अनुसार उनकी मां पुष्पा देवी को 14 अप्रैल को रामा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें हल्का बुखार और उल्टी की शिकायत थी। परिजनों का कहना है कि मेडिसिन विभाग की चिकित्सक डॉ. श्रुति श्री उनकी देखरेख कर रही थीं और उनकी स्थिति में सुधार बताया जा रहा था। परिवार का आरोप है कि इसी दौरान उनकी मां की CECT जांच कराई गई। परिजनों का कहना है कि इस जांच को लेकर उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और उनकी मां की स्थिति को देखते हुए इसकी आवश्यकता पर भी सवाल उठे। मोहित शर्मा का आरोप है कि 15 अप्रैल की शाम CECT कराने के बाद उनकी मां की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें उपचार के लिए गाजियाबाद स्थित यशोदा मेडिसिटी अस्पताल ले जाया गया, जहां 16 अप्रैल 2026 को पुष्पा देवी की मौत हो गई।
इस मामले में 29 मई 2026 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गौतमबुद्धनगर के समक्ष प्रस्तुत जांच आख्या में कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए हैं।
जांच समिति के अनुसार— मरीज का CECT Abdomen primary physician डॉ. श्रुति श्री की सहमति के बिना कराया गया पाया गया।
मरीज को वार्ड से रेडियोलॉजी ले जाने के संबंध में referred slip उपलब्ध नहीं मिली।
CECT के दौरान दिए जाने वाले testing dose के प्रमाण दस्तावेजों में नहीं मिले।
CECT के बाद मरीज की हालत बिगड़ने पर दिए गए उपचार में विलंब प्रतीत होने की बात जांच आख्या में दर्ज की गई।
नर्सिंग नोट्स में sedation का उल्लेख मिला, लेकिन उसके लिए किसी डॉक्टर के आदेश का रिकॉर्ड नहीं पाया गया।
जांच समिति ने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन और treating physician की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला तथा मांगे गए दस्तावेज अपूर्ण रूप से उपलब्ध कराए गए। जांच समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों की स्थिति को देखते हुए यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थिति में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायसंगत नहीं होगा।
मोहित शर्मा का दर्द उनकी शिकायत में साफ दिखाई देता है। उनका कहना है कि उनकी मां परिवार की सबसे बड़ी ताकत थीं। वह अस्पताल में अपनी मां को सामान्य बीमारी के इलाज के लिए लेकर गए थे, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें खो दिया। मोहित का सवाल है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि अस्पताल में उपचार के दौरान सुधार की बात कही जा रही थी और बाद में उनकी हालत इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ा? उनका कहना है कि मां को वापस तो कोई नहीं ला सकता, लेकिन उनकी मौत के लिए यदि कोई चिकित्सीय लापरवाही या व्यवस्था संबंधी कमी जिम्मेदार है तो उसकी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई जरूर होनी चाहिए।
मोहित शर्मा ने अधिकारियों से मांग की है कि मामले से संबंधित अस्पताल के CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, नर्सिंग नोट्स और अन्य दस्तावेजों को सुरक्षित कराया जाए, ताकि किसी भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की संभावना न रहे। उन्होंने संबंधित डॉक्टरों, DMS और अस्पताल प्रशासन की भूमिका की जांच कराने तथा दोष पाए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और अस्पताल के लाइसेंस पर भी कार्रवाई की मांग उठाई है।
मोहित शर्मा का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल अपनी मां के लिए नहीं है। उनका दावा है कि यदि अस्पतालों में उपचार और मरीजों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही होती है तो उसका सबसे बड़ा नुकसान आम और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को उठाना पड़ता है। उनकी मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो और जांच में यदि किसी चिकित्सक या अस्पताल प्रबंधन की गलती सामने आती है तो कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि पुष्पा देवी की तबीयत बिगड़ने और उनकी मौत के बीच CECT जांच, उसके बाद दिए गए उपचार तथा अस्पताल की चिकित्सीय व्यवस्था की क्या भूमिका थी? जांच समिति ने अस्पताल के रिकॉर्ड में कई गंभीर कमियां दर्ज की हैं, लेकिन उपलब्ध जांच आख्या ने स्वयं किसी अंतिम चिकित्सीय कारण या किसी डॉक्टर को पुष्पा देवी की मृत्यु के लिए सीधे जिम्मेदार घोषित नहीं किया है। ऐसे में अब निष्पक्ष जांच और सभी मेडिकल रिकॉर्ड के वैज्ञानिक परीक्षण से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। एक बेटे की आंखों में आज भी अपनी मां को खोने का दर्द है। उसका सवाल बेहद सीधा है—अगर गलती हुई थी तो जिम्मेदार कौन है और अगर गलती नहीं हुई थी तो उसकी मां की मौत की असली वजह क्या थी? मोहित शर्मा इसी सवाल के जवाब और अपनी मां के लिए न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। Noida News :
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